IIT मद्रास की स्वदेशी फोटोनिक्स तकनीक से शिक्षा, रिसर्च, नवाचार और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

IIT मद्रास की स्वदेशी फोटोनिक्स तकनीक से शिक्षा, रिसर्च, नवाचार और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

IIT मद्रास की स्वदेशी फोटोनिक्स तकनीक से शिक्षा, रिसर्च, नवाचार और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
भारत ने उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए चेन्नई में स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मद्रास में स्वदेशी रूप से विकसित सिलिकॉन फोटोनिक्स समाधान लॉन्च किए हैं।


यह पहल देश को सेमीकंडक्टर तकनीक में मजबूत बनाने और “टेक्नोलॉजी आत्मनिर्भरता” को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इस तकनीक का लॉन्च एस. कृष्णन, सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के नेतृत्व में किया गया। इस दौरान दो प्रमुख इनोवेशन पेश किए गए Silicon Photonics Process Design Kit (PDK) और Universal Programmable Photonic Integrated Circuit (PPIC) Test Engine। ये दोनों तकनीकें IIT मद्रास के MeitY समर्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE-CPPICS) में विकसित की गई हैं।

सिलिकॉन फोटोनिक्स: भविष्य की अत्याधुनिक तकनीक

सिलिकॉन फोटोनिक्स एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें एक ही चिप पर ऑप्टिकल (प्रकाश आधारित) और इलेक्ट्रॉनिक घटकों को जोड़ा जाता है। यह तकनीक तेज डेटा ट्रांसफर, बेहतर कम्युनिकेशन सिस्टम और एडवांस कंप्यूटिंग में उपयोगी है। सरकार का मानना है कि यह विकास भारत को इस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा।

नई तकनीक को एक साझा राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया गया है, जिससे शिक्षा संस्थानों, इंडस्ट्री, स्टार्टअप्स और रक्षा संगठनों को रिसर्च और डेवलपमेंट में मदद मिलेगी। इससे छात्रों और शोधकर्ताओं को अत्याधुनिक तकनीक पर काम करने का मौका मिलेगा और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।

PDK और PPIC से मिलेगा तकनीकी बढ़त

लॉन्च किए गए PDK में 50 से अधिक सत्यापित कंपोनेंट्स शामिल हैं, जो उन्नत फोटोनिक सर्किट डिजाइन करने में मदद करेंगे। वहीं PPIC Test Engine एक आधुनिक ऑटोमेटेड प्लेटफॉर्म है, जो फोटोनिक और ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक मॉड्यूल्स की टेस्टिंग और विश्लेषण के लिए उपयोगी है।

कार्यक्रम में अधिकारियों ने बताया कि भारत की सिलिकॉन फोटोनिक्स क्षमता अब वैश्विक स्तर के करीब पहुंच रही है। अमितेश सिन्हा, सीईओ, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) ने कहा कि यह तकनीक क्लासिकल और क्वांटम दोनों क्षेत्रों में उपयोगी है। इसे आगे बढ़ाने के लिए ISM 2.0 के तहत और रिसर्च को समर्थन दिया जाएगा।

परियोजना के अगले चरण में मल्टी-प्रोजेक्ट वेफर (MPW) निर्माण प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जो इस वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही से लागू होगी। इसमें निर्माण, परीक्षण, पैकेजिंग और मॉड्यूल परीक्षण जैसी पूरी प्रक्रिया शामिल होगी, जिससे देश में संपूर्ण तकनीकी इकोसिस्टम विकसित होगा।

शिक्षा और रोजगार के लिए नए अवसर

यह पहल न केवल तकनीकी विकास को बढ़ावा देगी, बल्कि छात्रों के लिए नए कौशल सीखने और रोजगार के अवसर भी पैदा करेगी। इंजीनियरिंग और रिसर्च के क्षेत्र में काम करने वाले युवाओं को अत्याधुनिक तकनीक पर काम करने का मौका मिलेगा, जिससे उनकी स्किल्स मजबूत होंगी और वे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार होंगे।

कुल मिलाकर, IIT मद्रास में स्वदेशी सिलिकॉन फोटोनिक्स तकनीक का विकास भारत को सेमीकंडक्टर और हाई-टेक इंडस्ट्री में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह पहल शिक्षा, रिसर्च, नवाचार और रोजगार- चारों क्षेत्रों में सकारात्मक प्रभाव डालते हुए देश की आर्थिक और तकनीकी प्रगति को नई गति देगी।

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