भारत का स्टार्टअप और MSME इकोसिस्टम अब उस चरण में पहुंच गया है, जहां चर्चा केवल अवसरों और संसाधनों तक पहुंच बनाने की नहीं, बल्कि कारोबार को तेजी से आगे बढ़ाने की है। यह बात Entrepreneur 2026 में आयोजित ‘Policy to Progress: Building an Entrepreneur-Friendly India’ विषय पर पैनल चर्चा के दौरान सामने आई।
इस चर्चा में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) के महानिदेशक श्री अरविंद कुमार, MeitY Startup Hub के सीईओ डॉ. पनीरसेल्वम मदनगोपाल, नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन (NSIC) के सीएमडी डॉ. शुभ्रांशु शेखर आचार्य, ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ विभोर जैन और TDK Ventures के अध्यक्ष निकोलस सॉवाज ने अपने विचार साझा किए। सत्र का संचालन Entrepreneur India & APAC के एडिटोरियल डायरेक्टर सचिन मार्या ने किया।
चर्चा की शुरुआत करते हुए मॉडरेटर ने कहा कि सरकारी एजेंसियों में होने वाले नवाचार पर बहुत कम चर्चा होती है, जबकि आज ये एजेंसियां दुनिया के कई अन्य देशों की तुलना में कहीं अधिक काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि उद्यमियों को अवसर और संसाधन उपलब्ध कराने के मामले में सरकार अब आगे आकर नेतृत्व कर रही है।
कंज्यूमर इंटरनेट से डीप टेक की ओर बढ़ता भारत
अरविंद कुमार ने बताया कि STPI की स्थापना 1991 में हुई थी। उस समय आईटी और आईटी-सक्षम सेवाओं (ITeS) का निर्यात 52 करोड़ रुपये था, जो आज बढ़कर 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
उन्होंने बताया कि STPI अब ब्लॉकचेन, हेल्थ टेक, फिनटेक, ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे क्षेत्रों में 27 डोमेन-विशिष्ट सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप चला रहा है। ये केंद्र 1,700 से अधिक टेक स्टार्टअप्स को सहयोग दे रहे हैं। इनमें टियर-2 और टियर-3 शहरों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और 40 प्रतिशत से अधिक महिला उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है।
STPI की योजनाओं में नेक्स्ट जनरेशन इनक्यूबेशन स्कीम शामिल है, जिसके तहत प्रत्येक स्टार्टअप को 25 लाख रुपये दिए जाते हैं। इसके अलावा, ‘लीप अहेड’ योजना के तहत लगभग एक करोड़ रुपये के सह-निवेश मॉडल के जरिए स्टार्टअप्स को सहायता दी जाती है।
स्टार्टअप इंडिया का अगला चरण डीप टेक और AI पर केंद्रित
यह पूछे जाने पर कि स्टार्टअप हब से आगे बढ़कर टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार कैसे हुआ है, कुमार ने कहा कि 2016 में शुरू हुए स्टार्टअप इंडिया के शुरुआती छह से सात वर्षों में कंज्यूमर इंटरनेट पर अधिक ध्यान दिया गया। अब इकोसिस्टम दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है, जहां डीप टेक पर जोर है।
इस चरण में उद्यमी जलवायु परिवर्तन, डिफेंस टेक, स्पेस टेक और एंटरप्राइज AI जैसे क्षेत्रों में समाधान विकसित कर रहे हैं। AI मिशन के तहत सरकार GPU सपोर्ट और डेटासेट उपलब्ध करा रही है। साथ ही, विशेष रूप से AI पर काम करने वाले 50 से अधिक सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप स्थापित किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि ओपन चैलेंज के लिए आने वाले आवेदनों में 50 प्रतिशत से अधिक आवेदन टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रहे हैं। निवेशक भी अब ऐसे स्टार्टअप्स में निवेश करने के लिए तैयार हो रहे हैं, जिन्हें विकास और बाजार में अपनी जगह बनाने के लिए अधिक समय की जरूरत होती है।
स्टार्टअप्स को अब संख्या नहीं, गहराई और मजबूत तकनीक पर ध्यान देना होगा
MeitY Startup Hub के सीईओ डॉ. पनीरसेल्वम मदनगोपाल ने अपने संस्थान को STPI का ‘छोटा भाई’ बताते हुए कहा कि यह टेक, डीप टेक और इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन एवं मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े स्टार्टअप्स को मेंटरशिप, बाजार तक पहुंच और वित्तीय सहायता प्रदान करता है। इसके लिए STPI और C-DAC के साथ मिलकर काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत में 2016 में लगभग 600 से 700 स्टार्टअप्स थे, जबकि आज इनकी संख्या दो लाख से अधिक हो गई है। उनके अनुसार, शुरुआती चरण में स्टार्टअप इकोसिस्टम का विस्तार करना जरूरी था, लेकिन अब इसकी गुणवत्ता और तकनीकी क्षमता को मजबूत करने का समय है।
उन्होंने AI और मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन, साइबर सिक्योरिटी, क्वांटम टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग को प्रमुख अवसर वाले क्षेत्र बताया। इन क्षेत्रों को इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन, इंडिया AI मिशन और नेशनल क्वांटम मिशन जैसी पहलों से समर्थन मिल रहा है। उन्होंने आगे कहा, “हमारे सामने लाखों समस्याएं हो सकती हैं, लेकिन उन्हें हल करने के लिए हमारे पास एक अरब दिमाग हैं।”
MSME के सामने मौजूद छह बड़ी चुनौतियां
NSIC के सीएमडी डॉ. शुभ्रांशु शेखर आचार्य ने कहा कि सभी स्टार्टअप्स सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) की श्रेणी में आते हैं। उन्होंने बताया कि पंजीकृत एमएसएमई की संख्या 9.5 करोड़ से अधिक हो गई है और ये लगभग 40 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं।
उन्होंने एमएसएमई के सामने छह प्रमुख चुनौतियों की पहचान की कर्ज तक पहुंच, टेक्नोलॉजी, बाजार तक पहुंच, व्यावसायिक क्षमता, कौशल और कारोबार का विस्तार।
आचार्य ने कहा कि सही तरह से काम करने वाले उद्यमों के लिए अब केवल कर्ज उपलब्ध कराना सबसे बड़ी चुनौती नहीं है। जरूरत ऐसे क्रेडिट सिस्टम की है, जो डेटा के आधार पर सही उद्यमों की वित्तीय जरूरतों का आकलन कर सके। इसी तरह, टेक्नोलॉजी उपलब्ध होने के साथ-साथ उसे अपनाना भी जरूरी है।
उन्होंने बताया कि NSIC एमएसएमई की कच्चे माल की सामूहिक मांग को एकत्रित कर लागत कम करने पर काम कर रहा है। इससे इनपुट लागत में चार से पांच प्रतिशत तक की कमी लाने का लक्ष्य है। इसके अलावा, ONDC के साथ मिलकर पांच लाख एमएसएमई को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ने की योजना है, जिनमें आधी महिला उद्यमी होंगी।
‘स्टार्टअप इंडिया के बाद अब स्केल-अप इंडिया मिशन की जरूरत’
SIDBI में तीन दशकों से अधिक के अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए आचार्य ने सेल्फ-रिलायंट इंडिया फंड का उदाहरण दिया। इस फंड में सरकार की ओर से 10,000 करोड़ रुपये की पूंजी रखी गई थी और निजी निवेश के जरिए इसकी चार गुना राशि जुटाने का लक्ष्य था। उन्होंने बताया कि इस पहल के तहत लक्ष्य से सात गुना राशि जुटाई गई, जिससे विकास की संभावनाओं वाले एमएसएमई के लिए कुल 50,000 करोड़ रुपये उपलब्ध हुए। इनमें से अधिकतर सूक्ष्म उद्यम हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में अब स्टार्टअप्स की संख्या बढ़ाने से आगे बढ़कर उनके कारोबार को बड़े स्तर पर पहुंचाने पर ध्यान देना चाहिए। उनके शब्दों में, “स्टार्टअप इंडिया का दौर पीछे छूट चुका है; अब हमें स्केल-अप इंडिया मिशन की जरूरत है।”
ONDC के जरिए छोटे कारोबारियों को डिजिटल बाजार तक पहुंच
ONDC के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ विभोर जैन ने कहा कि ONDC का उद्देश्य बाजार में मौजूद उन बाधाओं को दूर करना है, जिन्हें सामान्य बाजार व्यवस्था अपने आप हल नहीं कर पाती या जिन्हें हल करने के लिए पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं मिलता। उन्होंने बताया कि ONDC पर 500 से अधिक उद्यम काम कर रहे हैं। इस नेटवर्क पर प्रति मिनट लगभग 500 लेनदेन होते हैं और कुल लेनदेन की संख्या 50 करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है।
जैन ने इसकी तुलना एक नए हाईवे से की, जो टियर-2, टियर-3 और टियर-4 शहरों में कारोबार के नए अवसर खोल सकता है। उनके अनुसार, ONDC सभी कारोबारियों को साझा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराता है, जिससे छोटे व्यवसाय भी डिजिटल बाजार में अपनी जगह बना सकते हैं।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से कारोबार की लागत कम करने पर जोर
जैन ने कहा कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बाजार तक पहुंच, कामकाज की दक्षता, प्रति यूनिट लागत और नवाचार के अवसरों को बेहतर बनाता है। उन्होंने ‘Amazing India for Kisans and Karigars’ और ‘DigiDukan’ जैसी पहलों का उल्लेख किया। DigiDukan छोटे खुदरा कारोबारियों को अपनी कार्यशील पूंजी तक पहुंच बनाने और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने में मदद करता है। यह डिजिटल रिकॉर्ड आगे चलकर कर्ज प्राप्त करने में भी उपयोगी हो सकता है।
यह पूछे जाने पर कि क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म बाजार में एकाधिकार को बढ़ावा दे सकते हैं, उन्होंने कहा कि निष्पक्षता का मतलब है कि छोटे दुकानदारों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को भी बाजार में दिखाई देने, कम लागत पर टेक्नोलॉजी अपनाने और कर्ज तक पहुंच बनाने के समान अवसर मिलें।
उन्होंने आगे कहा, “भारत ने एक अलग रास्ता चुना है, जिसमें टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल निष्पक्षता को बढ़ावा देने के लिए किया जा सकता है।”
भारतीय स्टार्टअप्स को वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बनानी होगी
वैश्विक बाजार में भारतीय स्टार्टअप्स की संभावनाओं पर बात करते हुए कुमार ने बताया कि STPI द्वारा अमेरिका ले जाए गए 15 स्टार्टअप्स में से 12 को कारोबारी संभावनाएं मिलीं, जबकि तीन को फंडिंग प्राप्त हुई। उन्होंने कहा कि अब संस्थापक केवल शुरुआती पूंजी नहीं चाहते, बल्कि अपने उत्पादों का परीक्षण करने, पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अवसर तलाशने का मौका चाहते हैं। सरकार को ऐसे अवसर उपलब्ध कराने में मदद करनी चाहिए।
कुमार ने स्टार्टअप्स को एजेंटिक AI समाधान विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि भारत के पास वैश्विक IT और ITeS सेवा बाजार का 55 प्रतिशत हिस्सा है। अब देश को इसी तरह अपनी तकनीकी क्षमताओं का इस्तेमाल नए उत्पाद और समाधान विकसित करने में करना होगा।
सेवाओं से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर के उत्पाद बनाने की जरूरत
MeitY Startup Hub के प्रतिनिधि ने कहा कि वह भारत की संभावनाओं को लेकर आशावादी हैं, लेकिन अभी काफी काम करना बाकी है। उनके अनुसार, भारत को सेवाएं प्रदान करने वाले बाजार से आगे बढ़कर विश्वस्तरीय उत्पाद विकसित करने वाले देश के रूप में अपनी पहचान बनानी होगी। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि औसत दर्जे के उत्पादों के दम पर वैश्विक बाजार में सफलता हासिल नहीं की जा सकती। स्टार्टअप्स को अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतरने से पहले भारत में अपना कारोबार मजबूत करना चाहिए।
उन्होंने सलाह दी कि स्टार्टअप्स को अंतरराष्ट्रीय विस्तार की योजना बनाने से पहले भारत में 100 करोड़ रुपये का कारोबार हासिल करने पर ध्यान देना चाहिए।
TDK Ventures का भारतीय स्टार्टअप्स पर बढ़ता भरोसा
TDK Ventures के अध्यक्ष निकोलस सॉवाज ने बताया कि उनकी फर्म चार फंड के जरिए 50 करोड़ अमेरिकी डॉलर का निवेश प्रबंधन करती है और दुनिया भर में 56 स्टार्टअप्स में निवेश कर चुकी है। भारत उनके लिए दूसरा सबसे बड़ा निवेश बाजार है। फर्म अब तक भारत में छह निवेश कर चुकी है और जल्द ही सातवें निवेश की योजना है।
उन्होंने कहा कि TDK की भारत में फैक्ट्रियां तीन दशकों से अधिक समय से मौजूद हैं, जिससे कंपनी को यहां के औद्योगिक और तकनीकी इकोसिस्टम को समझने में मदद मिली है। TDK Ventures किसी खास निवेश रणनीति के आधार पर उन कंपनियों को चुनती है, जिनके पास अपने क्षेत्र में मजबूत प्रतिस्पर्धी बढ़त बनाने की क्षमता होती है।
उन्होंने अल्ट्रावायलेट (Ultraviolette) का उदाहरण दिया, जो अब यूरोप में इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल बेच रही है। उन्होंने एक ऐसी कंपनी का भी उल्लेख किया, जो भारत के स्पेस इंजीनियरों की विशेषज्ञता का इस्तेमाल करते हुए दोबारा उपयोग किए जा सकने वाले रॉकेट विकसित कर रही है। इसके अलावा, उन्होंने Exponent Energy का उदाहरण दिया, जिसने भारत के बिखरे हुए थ्री-व्हीलर बाजार में अवसर तलाशे। सॉवाज ने यह भी बताया कि TDK Ventures संभावित साझेदारी को लेकर MeitY के साथ बातचीत कर रही है।
सरकार और उद्यमियों के सहयोग से आगे बढ़ेगा इकोसिस्टम
सत्र का समापन करते हुए मॉडरेटर सचिन मार्या ने कहा कि उद्यमियों को अवसर उपलब्ध कराने और उनके कारोबार को गति देने में सरकार अब अग्रणी भूमिका निभा रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार उद्यमियों, कारोबार निर्माताओं और निवेशकों के साथ मिलकर ऐसे व्यवसाय तैयार करने में मदद कर रही है, जो अधिक मजबूत हों और लंबे समय तक विकास कर सकें। चर्चा का मुख्य संदेश यह रहा कि भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को अब केवल संख्या बढ़ाने से आगे बढ़कर गहरी तकनीकी क्षमता, बड़े स्तर पर कारोबार के विस्तार और वैश्विक बाजार के लिए प्रतिस्पर्धी उत्पाद बनाने पर ध्यान देना होगा।