RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने बुधवार को सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25% से बढ़ाकर 5.5% करने का फैसला किया। फरवरी 2023 के बाद यह केंद्रीय बैंक की पहली रेपो रेट बढ़ोतरी है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय कमेटी ने अपनी पॉलिसी स्टांस को भी ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ में बदल दिया।
महंगाई और ग्लोबल आर्थिक परिस्थितियों के बीच RBI का फैसला
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर हैं, ग्लोबल फाइनेंशियल कंडीशंस सख्त हुई हैं और प्रतिकूल मौसम की वजह से फूड इन्फ्लेशन पर दबाव बढ़ने का जोखिम बना हुआ है। फैसला सुनाते हुए मल्होत्रा ने कहा, “उपलब्ध आंकड़ों को देखते हुए यह स्पष्ट है कि इन्फ्लेशन और उसका आउटलुक पिछले साल की तरह अनुकूल नहीं है।”
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सीपीआई इन्फ्लेशन का अनुमान बढ़ाकर 5.2% कर दिया है। इसके साथ पूरे वित्त वर्ष के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान भी बढ़ाकर 7.1% कर दिया गया है। तिमाही आधार पर GDP ग्रोथ का अनुमान Q2 FY27 के लिए 7.2%, Q3 के लिए 6.9% और Q4 के लिए 6.8% रखा गया है।
रेपो रेट लगातार चार पॉलिसी मीटिंग में 5.25% पर स्थिर रहा था। इससे पहले 2025 के दौरान कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती की गई थी। बुधवार की बढ़ोतरी इस ईजिंग साइकिल को पलटती है और यह संकेत देती है कि केंद्रीय बैंक कीमतों पर दबाव बढ़ने से पहले इन्फ्लेशन के प्रति अपनी विश्वसनीयता मजबूत करना चाहता है, जबकि वह आने वाले वर्ष में मजबूत आर्थिक ग्रोथ का अनुमान भी बनाए हुए है।