Swedfund ने भारत के क्लाइमेट फंड SAGF IV में 35 मिलियन डॉलर का निवेश किया

Swedfund ने भारत के क्लाइमेट फंड SAGF IV में 35 मिलियन डॉलर का निवेश किया

Swedfund ने भारत के क्लाइमेट फंड SAGF IV में 35 मिलियन डॉलर का निवेश किया
Swedfund ने भारत में जलवायु पर केंद्रित ग्रोथ-स्टेज कंपनियों को समर्थन देने के लिए South Asia Growth Fund IV में 35 मिलियन डॉलर का निवेश किया है।


Swedfund, स्वीडन की विकास वित्त संस्था ने GEF Capital Partners द्वारा प्रबंधित South Asia Growth Fund IV (SAGF IV) में 35 मिलियन डॉलर का निवेश किया है। यह फंड भारत की उन ग्रोथ-स्टेज कंपनियों को समर्थन देगा, जो उत्सर्जन कम करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता बढ़ाने पर काम कर रही हैं।

इस फंड का पहला क्लोज अन्य अंतरराष्ट्रीय विकास वित्त संस्थानों और निजी निवेशकों की भागीदारी के साथ होने की उम्मीद है। फंड का लक्ष्य कुल 600 मिलियन डॉलर जुटाना है। मुख्य रूप से यह निवेश नवीकरणीय ऊर्जा, जल प्रबंधन और टिकाऊ कृषि जैसे क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों को दीर्घकालिक पूंजी उपलब्ध कराने में मदद करेगा। इसका उद्देश्य कम कार्बन उत्सर्जन, ऊर्जा दक्षता और जलवायु के प्रति मजबूत क्षमता वाले उत्पादों और सेवाओं को बढ़ावा देना है।

जलवायु-अनुकूल कारोबार और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

इस निवेश से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की क्षमता बढ़ाने और रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे भारत में टिकाऊ आर्थिक विकास को भी समर्थन मिल सकता है। वहीं भारत में ऊर्जा की मांग बढ़ रही है। वहीं, जल संकट और चरम मौसमी घटनाएं भी बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। देश के जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने के लिए निजी क्षेत्र से निवेश जुटाना महत्वपूर्ण है।

GEF Capital Partners वर्ष 2018 से पर्यावरण और संसाधनों के कुशल उपयोग से जुड़े क्षेत्रों में निवेश कर रही है। कंपनी की टीम मुंबई में स्थित है और भारत में जलवायु-केंद्रित कारोबारों को समर्थन देने पर काम करती है।

भारत में Swedfund का पहले भी निवेश

Swedfund इससे पहले साउथ एशिया ग्रोथ फंड II और साउथ एशिया ग्रोथ फंड III में निवेश कर चुका है। वर्ष 2025 में संस्था ने ने Arya.ag में भी सह-निवेश किया था।

Swedfund की इन्वेस्टमेंट डायरेक्टर और हेड ऑफ एनर्जी एंड क्लाइमेट गुनिला निल्सन (Gunilla Nilsson) ने कहा, “इस निवेश के जरिए हम ऐसी कंपनियों तक दीर्घकालिक पूंजी पहुंचाने में मदद कर रहे हैं, जो अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उत्सर्जन कम करती हैं, संसाधनों का अधिक कुशल उपयोग करती हैं और जलवायु संबंधी चुनौतियों से निपटने की क्षमता मजबूत करती हैं।” 


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