सिंथेटिक बायोलॉजी स्टार्टअप StrainX Bioworks ने जुटाए 13 मिलियन अमेरिकी डॉलर

सिंथेटिक बायोलॉजी स्टार्टअप StrainX Bioworks ने जुटाए 13 मिलियन अमेरिकी डॉलर

सिंथेटिक बायोलॉजी स्टार्टअप StrainX Bioworks ने जुटाए 13 मिलियन अमेरिकी डॉलर
StrainX Bioworks ने 13 मिलियन अमेरिकी डॉलर की फंडिंग हासिल की है। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Prime Venture Partners और Leo Capital ने मिलकर किया।


सिंथेटिक बायोलॉजी स्टार्टअप StrainX Bioworks ने 13 मिलियन अमेरिकी डॉलर की फंडिंग हासिल की है। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Prime Venture Partners और Leo Capital ने मिलकर किया, जिसमें Good Startup, Sparrow Capital, Sun Icon Ventures, Dhoka Ventures और WTF (India) Delhi Angels ने भी हिस्सा लिया।

बेंगलुरु में स्थित इस कंपनी ने बताया कि इस फंड का उपयोग अपने रिसर्च और डेवलपमेंट को बढ़ाने, फर्मेंटेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को स्केल करने और वैज्ञानिक व इंजीनियरिंग टैलेंट को बढ़ाने में किया जाएगा। कंपनी ने वैश्विक स्तर पर अपने कमर्शियल विस्तार को तेज करने की भी योजना बनाई है।

इस कंपनी की स्थापना 2023 में IIT दिल्ली के पूर्व छात्रों अक्षय मित्तल और आलोक मालवीय ने की थी। StrainX Bioworks प्रिसीजन फर्मेंटेशन टेक्नोलॉजी पर काम करती है। यह कंपनी वैकल्पिक प्रोटीन, एंजाइम और बायो-इंजीनियर्ड मेटाबोलाइट्स विकसित करती है, जिनका उपयोग खाद्य, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्रों में होता है।

पिछले दो वर्षों से कंपनी स्टील्थ मोड में काम कर रही थी, जिसमें यह स्ट्रेन इंजीनियरिंग, फर्मेंटेशन प्रक्रिया, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और इंडस्ट्रियल स्केल-अप जैसी क्षमताओं को विकसित कर रही थी।

यह स्टार्टअप ऐसे जैविक सिस्टम विकसित करने का लक्ष्य रखता है जो नियंत्रित वातावरण में उच्च मूल्य वाले सामग्री का उत्पादन कर सकें, जिससे पारंपरिक पौधों और पशु-आधारित स्रोतों पर निर्भरता कम हो सके। कंपनी ने 10,000 लीटर के स्तर पर फर्मेंटेशन का प्रदर्शन किया है और अब उत्पादन को और बढ़ाने पर काम कर रही है। कंपनी भारत के साथ-साथ अमेरिका जैसे विदेशी बाजारों में भी कमर्शियल लॉन्च की तैयारी कर रही है।

सिंथेटिक बायोलॉजी में सूक्ष्म जीवों को संशोधित करके ऐसे यौगिक बनाए जाते हैं जो आमतौर पर प्राकृतिक प्रक्रियाओं से प्राप्त होते हैं। इन सूक्ष्म जीवों को औद्योगिक फर्मेंटेशन सिस्टम में बढ़ाया जाता है ताकि प्रोटीन और अन्य सामग्री तैयार की जा सके। यह तकनीक पहले से ही दवा उद्योग में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है, लेकिन अब कम लागत के कारण इसे खाद्य और उपभोक्ता उत्पादों में भी तेजी से अपनाया जा रहा है।

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