यूजीसी के अनुसार, कुछ एडटेक कंपनियां समाचार पत्रों, सोशल मीडिया और टेलीविजन के माध्यम से ऐसे डिग्री और डिप्लोमा कार्यक्रमों का प्रचार कर रही हैं, जिन्हें वे यूजीसी से मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों के सहयोग से संचालित करने का दावा करती हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकार की फ्रेंचाइजी व्यवस्था यूजीसी नियमों के तहत अनुमेय नहीं है और ऐसे कार्यक्रमों से प्राप्त डिग्री या डिप्लोमा को यूजीसी मान्यता नहीं देता।
एडटेक कंपनियों और संस्थानों पर होगी कार्रवाई
यूजीसी ने अपनी सार्वजनिक सूचना में कहा है कि यदि कोई एडटेक कंपनी या उच्च शिक्षण संस्थान (HEI) इस प्रकार की अनधिकृत व्यवस्था के माध्यम से कार्यक्रम संचालित करता पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध लागू कानूनों, नियमों और विनियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। आयोग ने छात्रों को सलाह दी है कि किसी भी ODL या ऑनलाइन कार्यक्रम में प्रवेश लेने से पहले यूजीसी के डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो (UGC-DEB) की आधिकारिक वेबसाइट पर संबंधित कोर्स और संस्थान की मान्यता अवश्य जांच लें।
यूजीसी का कहना है कि केवल किसी विश्वविद्यालय का नाम विज्ञापन में शामिल होने से यह मान लेना उचित नहीं है कि संबंधित कार्यक्रम यूजीसी से मान्यता प्राप्त है। इसलिए प्रवेश से पहले आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से जानकारी की पुष्टि करना आवश्यक है।
फर्जी विश्वविद्यालयों पर लगातार नजर
शिक्षा मंत्रालय ने संसद में दी गई जानकारी में बताया कि जब भी किसी संस्था द्वारा अनधिकृत रूप से डिग्री कार्यक्रम संचालित किए जाने की शिकायत प्राप्त होती है, तो यूजीसी सबसे पहले संबंधित संस्था को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगता है। यदि संस्था का जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता, तो उसका नाम यूजीसी की फर्जी विश्वविद्यालयों (Fake Universities) की सूची में शामिल कर दिया जाता है।
फरवरी 2026 में प्रकाशित यूजीसी की नवीनतम सूची के अनुसार, देशभर में 32 संस्थानों को फर्जी विश्वविद्यालय के रूप में चिन्हित किया गया है। इन संस्थानों की सूची यूजीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है, ताकि छात्र और अभिभावक प्रवेश लेने से पहले उसकी जांच कर सकें।
1996 से सक्रिय है एंटी-मालप्रैक्टिस सेल
फर्जी विश्वविद्यालयों और अनधिकृत संस्थानों पर निगरानी रखने के लिए यूजीसी ने 30 मई 1996 को एंटी-मालप्रैक्टिस सेल (Anti-Malpractice Cell - AMPC) की स्थापना की थी। यह सेल उन संस्थानों की निगरानी करता है, जो UGC अधिनियम, 1956 का उल्लंघन करते हुए बिना वैध अधिकार के डिग्री प्रदान करते हैं या उच्च शिक्षा कार्यक्रम संचालित करते हैं।
एएमपीसी का उद्देश्य छात्रों को फर्जी संस्थानों से बचाना और देश की उच्च शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना है। समय-समय पर यह सेल शिकायतों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की सिफारिश भी करता है।
जागरूकता बढ़ाने के लिए UGC के प्रमुख कदम
फर्जी विश्वविद्यालयों और अनधिकृत डिग्री कार्यक्रमों पर रोक लगाने के लिए यूजीसी लगातार कई कदम उठा रहा है। आयोग अनधिकृत संस्थानों को कारण बताओ नोटिस, चेतावनी पत्र और स्पष्टीकरण नोटिस जारी करता है। साथ ही, राज्यवार फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची नियमित रूप से अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करता है।
इसके अलावा, छात्रों, अभिभावकों और आम जनता को जागरूक करने के लिए यूजीसी समय-समय पर अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सार्वजनिक सूचनाएं जारी करता है। इन सूचनाओं में छात्रों को सलाह दी जाती है कि किसी भी विश्वविद्यालय या कार्यक्रम में प्रवेश लेने से पहले उसकी मान्यता की जांच अवश्य करें।
यूजीसी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों से भी अनुरोध करता है कि वे अपने क्षेत्र में संचालित फर्जी विश्वविद्यालयों और अनधिकृत संस्थानों के विरुद्ध उचित कार्रवाई करें तथा आवश्यकता होने पर ऐसे संस्थानों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराएं।
पहले भी जारी कर चुका है सार्वजनिक नोटिस
यह पहली बार नहीं है जब यूजीसी ने एडटेक कंपनियों को लेकर चेतावनी जारी की हो। इससे पहले भी आयोग ने एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर कहा था कि कुछ एडटेक कंपनियां विदेशी संस्थानों के साथ मिलकर ऑनलाइन माध्यम से डिग्री और डिप्लोमा कार्यक्रमों का प्रचार कर रही हैं, जबकि उन्हें यूजीसी की अनुमति प्राप्त नहीं है। आयोग ने स्पष्ट किया था कि ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदान की जाने वाली डिग्रियों को यूजीसी मान्यता नहीं देगा।
छात्रों के लिए क्या है सबसे महत्वपूर्ण सलाह?
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन और डिजिटल शिक्षा के तेजी से बढ़ते दौर में छात्रों को केवल आकर्षक विज्ञापनों या एडटेक प्लेटफॉर्म के दावों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। किसी भी कोर्स में प्रवेश लेने से पहले संबंधित विश्वविद्यालय, कार्यक्रम और उसकी मान्यता की जानकारी UGC-DEB की आधिकारिक वेबसाइट पर अवश्य जांचनी चाहिए। इससे छात्र फर्जी डिग्री, अनधिकृत संस्थानों और भविष्य में होने वाले शैक्षणिक एवं करियर संबंधी नुकसान से बच सकते हैं।
यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि गुणवत्तापूर्ण और मान्यता प्राप्त उच्च शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए छात्रों की जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण है। इसलिए प्रवेश का निर्णय लेने से पहले संस्थान की वैधता की पुष्टि करना प्रत्येक छात्र और अभिभावक की जिम्मेदारी है।