शिक्षा: मानव पूंजी को सशक्त करने और 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की विकास यात्रा का मूल आधार है

शिक्षा: मानव पूंजी को सशक्त करने और 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की विकास यात्रा का मूल आधार है

शिक्षा: मानव पूंजी को सशक्त करने और 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की विकास यात्रा का मूल आधार है
आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार रोजगार के लिए जरूरी कौशल जल्दी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से माध्यमिक स्कूलों में व्यवस्थित कौशल विकास की व्यवस्था की जा रही है।


शिक्षा तब अधिक उपयोगी और प्रासंगिक बन सकती है, जब युवाओं को समय पर रोजगार के योग्य कौशल मिलें और स्कूलों को आजीवन सीखने के केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। पीएलएफएस 2023-24 के अनुसार, 14 से 18 वर्ष की उम्र के केवल 0.97 प्रतिशत युवाओं को ही किसी संस्थान से प्रशिक्षण मिला है, जबकि लगभग 92 प्रतिशत युवाओं को कोई औपचारिक प्रशिक्षण नहीं मिला।

भारत को अपने जनसांख्यिकीय लाभ का पूरा फायदा उठाने के लिए इस अंतर को खत्म करना बहुत जरूरी है। स्कूलों में कौशल शिक्षा देने से युवा बाजार की जरूरतों के अनुसार तैयार होंगे, खासकर सेवा क्षेत्र के लिए, जो प्रशिक्षित युवाओं को सबसे ज्यादा रोजगार देता है। इससे शिक्षा को आर्थिक अवसरों से जोड़ा जा सकेगा और स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की संख्या भी कम होगी।

उच्च शिक्षा 

उच्च शिक्षा संस्थानों (HEI) की संख्या 2014-15 में 51,534 थी, जो जून 2025 तक बढ़कर 70,018 हो गई। यह बढ़ोतरी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की संख्या में वृद्धि के कारण संभव हो पाई है। 2014-15 से 2024-25 के बीच देश के प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्तमान में देश में 23 आईआईटी, 21 आईआईएम और 20 एम्स हैं। इसके अलावा जंजीबार और आबुधाबी में आईआईटी के दो अंतरराष्ट्रीय परिसर भी स्थापित किए गए हैं।

अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण 2022-23 (अस्थायी आंकड़ों) के अनुसार, विद्यार्थियों का नामांकन 2021-22 में 4 करोड़ 33 लाख से बढ़कर 2022-23 में 4 करोड़ 46 लाख हो गया है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत उच्च शिक्षा प्रणाली में कई सुधार किए गए हैं। 170 विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय क्रेडिट आधारित ढांचा अपनाया गया है, जिसका उद्देश्य शिक्षा और कौशल आधारित सीख को एक साथ जोड़ना है। एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट 2,660 उच्च शिक्षा संस्थानों में लागू किया गया है। इसके अंतर्गत 4 करोड़ 60 लाख से अधिक पहचान पत्र जारी किए गए हैं, जिनमें 2 करोड़ 20 लाख ‘अपार’ आईडी शामिल हैं।

साल 2035 तक 50 प्रतिशत सकल नामांकन अनुपात (GER) हासिल करने के एनईपी लक्ष्य के तहत 153 विश्वविद्यालयों में लचीली प्रवेश-निकास व्यवस्था लागू की गई है और साल में दो बार प्रवेश की सुविधा शुरू की गई है। एनईपी के अनुरूप शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन की स्थापना की गई है। इसका उद्देश्य देश भर के विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और शोध संस्थानों में शोध आधारित शिक्षा की संस्कृति को प्रोत्साहित करना है।

तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए बहुविषयक शिक्षा और अनुसंधान सुधार योजना को हाल ही में मंजूरी दी गई है। यह योजना 175 इंजीनियरिंग कॉलेजों और 100 पॉलिटेक्निक सहित कुल 275 तकनीकी संस्थानों में लागू की जाएगी।

स्टेम शिक्षा में उद्योग-अकादमिक एकीकरण 

एनईपी का उद्देश्य व्यावसायिक प्रशिक्षण को सामान्य शिक्षा के साथ जोड़ना और उच्च शिक्षा संस्थानों में उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सहयोग बढ़ाना है। अब तक उद्योग-अकादमिक सहयोग मुख्य रूप से संयुक्त शोध, परामर्श और तकनीक हस्तांतरण तक सीमित रहा है।

इसी दिशा में यूजीसी और एआईसीटीई ने उच्च शिक्षा संस्थानों में ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ की श्रेणी शुरू की है। इसके तहत उद्योग जगत के अनुभवी पेशेवर कक्षा में अपने वास्तविक अनुभव साझा कर सकते हैं और इससे शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की कमी भी दूर होगी। इसके साथ ही एआईसीटीई -उद्योग फैलोशिप कार्यक्रम शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी के जरिए उद्योग और शिक्षा के बीच की दूरी को कम करना है।

उच्च शिक्षा का अंतरराष्ट्रीयकरण 

एनईपी का लक्ष्य भारतीय शिक्षा प्रणाली को आत्मनिर्भर बनाना और वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालकर उच्च शिक्षा का अंतरराष्ट्रीयकरण करना है। इसका उद्देश्य विदेशी छात्रों को भारत में पढ़ाई के लिए आकर्षित करना और भारतीय छात्रों के विदेश जाने की आवश्यकता को कम करना है।

यूजीसी ने 2022 में भारतीय और विदेशी उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच शैक्षणिक सहयोग से जुड़े नियम जारी किए हैं। इन नियमों के तहत भारतीय संस्थान प्रतिष्ठित विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी कर ट्विनिंग, संयुक्त और दोहरी डिग्री कार्यक्रम चला सकते हैं। इसके अलावा उच्च शिक्षा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति दी गई है। इन प्रयासों को और मजबूती यूजीसी के 2023 के नियमों से मिली है, जिनके तहत विदेशी उच्च शिक्षा संस्थान भारत में अपने परिसर स्थापित कर सकते हैं। अनुमान है कि लगभग 15 विदेशी उच्च शिक्षा संस्थान भारत में अपने कैंपस शुरू करेंगे।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति की शुरुआत, यूजीसी के अद्यतन दिशानिर्देश, शैक्षणिक सहयोग और डिग्रियों की आपसी मान्यता से जुड़े नियमों तथा गिफ्ट सिटी जैसे क्षेत्रों में विदेशी परिसरों की अनुमति से भारत की उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण की नीति और अधिक अनुकूल हो गई है।

भविष्य के लिए तैयार श्रम शक्ति विकसित करने और देश की पूरी क्षमता का उपयोग करने के लिए जरूरी है कि शिक्षा क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया जाए। इसके लिए एकीकृत, जवाबदेह और लचीली नीतिगत रूपरेखा के माध्यम से शिक्षा सुधारों को आगे बढ़ाना होगा।

शैक्षणिक उपलब्धियां: आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार शिक्षा क्षेत्र में कई अहम उपलब्धियां हुई हैं। इनमें साक्षरता दर में बढ़ोतरी, स्कूलों और उच्च शिक्षा संस्थानों में नामांकन बढ़ना और व्यावसायिक शिक्षा की बेहतर व्यवस्था शामिल है।

प्राथमिक स्तर पर सकल नामांकन अनुपात (GER) 90.9 प्रतिशत और उच्च प्राथमिक स्तर पर 90.3 प्रतिशत हो गया, देश में अब 23 IIT, 21 IIM और 20 AIIMS हैं और जंजीबार और आबूधाबी में IIT के दो अंतरराष्ट्रीय परिसर भी शुरू किए गए, एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट के तहत 2,660 संस्थानों को जोड़ा गया है और 4 करोड़ 60 लाख से अधिक पहचान पत्र जारी किए गए और वर्ष 2035 तक 50 प्रतिशत GER के NEP लक्ष्य को हासिल करने के लिए 153 विश्वविद्यालयों में लचीली प्रवेश-निकास व्यवस्था लागू की गई है और साल में दो बार दाखिले की सुविधा दी गई है।

भारतीय उच्च शिक्षा संस्थान अब प्रतिष्ठित विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी कर रहे हैं, जिसके तहत संयुक्त और ड्यूल डिग्री कार्यक्रम चलाए जाएंगे। साथ ही 15 विदेशी उच्च शिक्षा संस्थानों के भारत में परिसर खुलने की संभावना है। अत: आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार रोजगार के लिए जरूरी कौशल जल्दी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से माध्यमिक स्कूलों में व्यवस्थित कौशल विकास की व्यवस्था की जा रही है।

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