रिपोर्ट के अनुसार, भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां अनुभवी प्रोफेशनल (ऑपरेटर) अब उद्यमी बनकर नई पीढ़ी की AI-आधारित कंपनियां स्थापित कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में शुरू हुए हर चार ऑपरेटर-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स में से एक AI कंपनी है। वर्ष 2023 से 2025 के बीच कुल 189 ऑपरेटर-फाउंडेड टेक स्टार्टअप्स की स्थापना हुई, जो सीमित फंडिंग के बावजूद भारत के बदलते स्टार्टअप इकोसिस्टम को दर्शाता है।
इन 189 स्टार्टअप्स में से 51 AI कंपनियां हैं। इनमें 30 स्टार्टअप्स वर्टिकल AI (विशिष्ट उद्योगों के लिए AI समाधान) पर काम कर रहे हैं, जबकि अन्य हॉरिजॉन्टल AI, डेवलपर टूल्स, AI इंफ्रास्ट्रक्चर, कंज्यूमर AI, एजेंटिक AI और एंटरप्राइज AI जैसे क्षेत्रों में समाधान विकसित कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, यह बदलाव AI के कारण कंपनी बनाने की प्रक्रिया आसान होने से आया है। AI की मदद से प्रोडक्ट डेवलपमेंट में लगने वाला समय और लागत दोनों कम हुई हैं। साथ ही, जिन फाउंडर्स के पास किसी उद्योग का व्यावहारिक अनुभव है, वे AI के जरिए वास्तविक समस्याओं के समाधान तैयार करने में अधिक सक्षम हो रहे हैं। वहीं रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ऑपरेटर-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स में निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।
इन स्टार्टअप्स द्वारा जुटाई गई फंडिंग 2023 में 11.1 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2025 तक 131.7 मिलियन डॉलर हो गई। वहीं, सीड स्टेज फंडिंग 4.3 मिलियन डॉलर से बढ़कर 75.2 मिलियन डॉलर पहुंच गई। 1 मिलियन डॉलर की फंडिंग पाने वाले ऑपरेटर-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स की संख्या 2 से बढ़कर 21 हो गई, जबकि 2025 में इस श्रेणी में 35 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
2023 से 2025 के बीच ऑपरेटर-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स की औसत सीड फंडिंग 2.4 मिलियन डॉलर रही, जो भारत के अन्य टेक स्टार्टअप्स की 1.4 मिलियन डॉलर की औसत सीड फंडिंग से 1.7 गुना अधिक है। वहीं, सीरीज A चरण में इन स्टार्टअप्स ने औसतन 10.5 मिलियन डॉलर जुटाए, जबकि अन्य भारतीय टेक स्टार्टअप्स का औसत 8.4 मिलियन डॉलर रहा।
रिपोर्ट के इस संस्करण में सीरीज A वैल्यूएशन में भी सुधार देखने को मिला। ऑपरेटर-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स का औसत सीरीज A वैल्यूएशन 53.3 मिलियन डॉलर रहा, जो पहले संस्करण में 38.5 मिलियन डॉलर था।
2023 से 2025 के दौरान ऑपरेटर-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स ने कुल मिलाकर करीब 186 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई। फंडिंग के लिहाज से फिनटेक एवं इंश्योरटेक, रिटेल टेक एवं ई-कॉमर्स और ट्रांसपोर्टेशन एवं मोबिलिटी सबसे बड़े सेक्टर रहे। वहीं, नए स्टार्टअप्स की संख्या के आधार पर AI सॉल्यूशंस, फिनटेक एवं इंश्योरटेक और एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर शीर्ष तीन सेक्टर रहे।
RTP Global की एशिया इन्वेस्टमेंट टीम के पार्टनर निशित गर्ग ने कहा, "भारत में निवेश के 15 वर्ष पूरे होने के साथ यह रिपोर्ट हमारे लंबे अनुभव की पुष्टि करती है। ऑपरेटर-फाउंडर्स टीम बनाने, चुनौतियों का सामना करने और विभिन्न विकास चरणों में कंपनी को आगे बढ़ाने का व्यावहारिक अनुभव लेकर आते हैं। AI के दौर में उनकी कार्यकुशलता, व्यवहारिक सोच और पूंजी का बेहतर उपयोग पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। हालांकि, हमारी निवेश रणनीति हमेशा की तरह उत्कृष्ट फाउंडर्स का समर्थन करने पर आधारित है, चाहे उनका बैकग्राउंड कोई भी हो।"
Tracxn की को-फाउंडर और सीईओ नेहा सिंह ने कहा, "पिछले एक दशक में भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम काफी बदला है। अब बड़ी संख्या में ऐसे ऑपरेटर-फाउंडर्स सामने आ रहे हैं, जिन्होंने वर्षों तक कंपनियों को बढ़ाने में योगदान दिया और अब अपनी खुद की कंपनियां बना रहे हैं। आज अनुभव केवल एक अतिरिक्त योग्यता नहीं, बल्कि निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बन गया है। यही प्रक्रिया भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को लगातार मजबूत और आत्मनिर्भर बना रही है।"
रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम अब केवल प्रयोगों से आगे बढ़कर मजबूत क्रियान्वयन (Execution) की ओर बढ़ रहा है। AI के कारण नवाचार आसान हुआ है और अनुभवी प्रोफेशनल्स के नए स्टार्टअप्स शुरू करने से आने वाले वर्षों में भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के और अधिक मजबूत एवं टिकाऊ बनने की उम्मीद है।