कल्पना कीजिए कि आप एक ही ऐप के जरिए यह जान सकें कि आपकी कार कहाँ है, आपका बच्चा सुरक्षित रूप से स्कूल पहुँच गया है या आपका पालतू जानवर बाहर टहलने गया है। जो कभी भविष्य की कल्पना लगता था, वह अब GPS, IoT सेंसर और डेटा एनालिटिक्स के संयोजन से हकीकत बन रहा है। पारंपरिक रूप से वाहन ट्रैकिंग और एसेट सुरक्षा तक सीमित टेलीमैटिक्स अब रोजमर्रा की जिंदगी को आसान और सुरक्षित बना रहा है।
तेजी से हो रहे तकनीकी विकास आज के टेलीमैटिक्स और एसेट ट्रैकिंग रुझानों को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्नत एनालिटिक्स और AI क्षमताओं के साथ टेलीमैटिक्स सॉल्यूशन ज्यादा सटीक होते जा रहे हैं। हालिया शोध के अनुसार, ऑटोमोटिव टेलीमैटिक्स बाजार का मूल्य 2030 तक 750 अरब डॉलर तक पहुँच सकता है।
एक समय था जब टेलीमैटिक्स की भूमिका केवल परिवहन तक सीमित थी फ्लीट मैनेजमेंट, रूट ऑप्टिमाइज़ेशन, ईंधन खपत की निगरानी और ड्राइवर व्यवहार विश्लेषण तक। लेकिन अब यह तकनीक बदल रही है। मशीन ट्रैकिंग के लिए विकसित तकनीक अब दैनिक जीवन में उपयोग के लिए अनुकूलित हो रही है।
वेयरेबल GPS ट्रैकर्स, SOS बटन वाले स्मार्ट आईडी कार्ड और रियल-टाइम अलर्ट दूर से निगरानी करने में सक्षम बनाते हैं। रियल-टाइम मॉनिटरिंग ने टेलीमैटिक्स को केवल व्यावसायिक समाधान नहीं बल्कि व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण बना दिया है।
ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म इन उन्नत क्षमताओं को एकीकृत कर रहे हैं, जिससे उपयोगकर्ता एक ही इंटरफेस से वाहन की निगरानी कर सकते हैं। टेलीमैटिक्स वाहन की लोकेशन, ड्राइवर व्यवहार और इंजन डायग्नोस्टिक्स पर रियल-टाइम जानकारी देता है, जिससे यात्रा समय और ईंधन खपत कम होती है और सुरक्षित ड्राइविंग को बढ़ावा मिलता है।
सुरक्षा और सुविधा से आगे बढ़कर टेलीमैटिक्स भविष्यवाणी आधारित सुरक्षा भी प्रदान कर रहा है। यदि वाहन में कुछ खराबी आती है तो सिस्टम तुरंत अलर्ट भेज सकता है। शहरीकरण, लंबी यात्रा अवधि और गिग व लास्ट-माइल कार्यबल के विस्तार के कारण भारत में ऐसे समाधान तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। सस्ते IoT उपकरण और स्मार्टफोन की व्यापक उपलब्धता ने टेलीमैटिक्स को आम लोगों तक पहुँचा दिया है।
जब टेलीमैटिक्स लोगों को ट्रैक करने का साधन बन रहा है, तब जिम्मेदार डिज़ाइन अत्यंत महत्वपूर्ण है। गोपनीयता, डेटा सुरक्षा और उपयोगकर्ता सहमति इसकी स्वीकार्यता के मुख्य आधार होंगे। भविष्य में टेलीमैटिक्स स्मार्टफोन, वेयरेबल और अन्य कनेक्टेड उपकरणों के साथ और गहराई से एकीकृत होगा, जिससे व्यक्तिगत सुरक्षा और गतिशीलता प्रबंधन के नए तरीके विकसित होंगे।
तेजी से बढ़ते शहरी बाजारों में, खासकर भारत में, इन ट्रेंड का प्रभाव ज्यादा स्पष्ट हो रहा है। बढ़ती जनसंख्या घनत्व, लंबा आवागमन समय और गिग अर्थव्यवस्था का विस्तार रियल-टाइम दृश्यता और सुरक्षा समाधानों की मांग बढ़ा रहे हैं। साथ ही, स्मार्टफोन अपनाने की दर और घटती हार्डवेयर लागत प्रवेश बाधाओं को कम कर रही है।
व्यावसायिक दृष्टि से यह परिवर्तन बड़े अवसर प्रस्तुत करता है। टेलीमैटिक्स और एसेट ट्रैकिंग कंपनियाँ मजबूत वृद्धि देख रही हैं, कुछ क्षेत्रों में 100% वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में 50 करोड़ रुपये के राजस्व का स्तर बढ़ते विश्वास और अपनाने को दर्शाता है। वैश्विक टेलीमैटिक्स बाजार लगभग 200 अरब डॉलर का आंका गया है, जो आगे विस्तार की बड़ी संभावना दिखाता है। दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में वैश्विक विस्तार नई रणनीति बन रहा है।
हालाँकि, निगरानी के विस्तार के साथ नई चुनौतियाँ भी सामने आई हैं। गोपनीयता, सहमति और डेटा संरक्षण प्रमुख चिंताएँ बन गई हैं, जबकि डिवाइस से छेड़छाड़, डेटा उल्लंघन, GPS स्पूफिंग और सिस्टम आउटेज जैसी तकनीकी जोखिम विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए सुरक्षित क्लाउड अवसंरचना, पारदर्शी डेटा नीतियाँ और प्राइवेसी-बाय-डिज़ाइन दृष्टिकोण अनिवार्य होंगे।
व्यापारिक दृष्टिकोण से सफलता का आधार संतुलन होगा। जो कंपनियाँ बड़े पैमाने पर सेवाएँ प्रदान करते हुए संवेदनशीलता और गोपनीयता सुनिश्चित करेंगी, वही आगे बढ़ेंगी। मॉड्यूलर प्लेटफॉर्म, AI-आधारित अंतर्दृष्टि और दूरसंचार तथा तकनीकी साझेदारियाँ अपनाने की प्रक्रिया को तेज करेंगी।
भविष्य में टेलीमैटिक्स का स्मार्ट सिटी अवसंरचना के साथ एकीकरण इसकी वृद्धि का प्रमुख कारक होगा। ट्रैफिक सिस्टम, आपात सेवाएँ और सार्वजनिक परिवहन के साथ समन्वय प्रतिक्रिया समय को तेज करेगा और शहरों को अधिक सुरक्षित बनाएगा। AI जोखिम पूर्वानुमान, गतिशीलता अनुकूलन और स्वचालित निर्णय प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
AI, IoT और स्मार्ट सिटी सिस्टम का संयोजन टेलीमैटिक्स के विकास का अगला चरण निर्धारित करेगा। प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स ट्रैफिक बाधाओं और संभावित आपात स्थितियों की पहचान कर सकता है, जबकि AI एल्गोरिद्म मार्गों को अनुकूलित कर सकते हैं।
वाहन ट्रैकिंग उपकरण से विकसित होकर टेलीमैटिक्स अब एक व्यापक प्रणाली बन चुका है जो सुरक्षा, गतिशीलता और रियल-टाइम निगरानी को एकीकृत करता है। यह तकनीक अब केवल ट्रैकिंग तक सीमित नहीं रही, बल्कि सुरक्षित निर्णय, स्मार्ट शहर और अधिक कनेक्टेड जीवनशैली को सक्षम बनाने का माध्यम बन गई है।
(लेखक राहुल मेहरा रोडकास्ट के सह-संस्थापक हैं। यह उनके निजी विचार हैं।)