केंद्रीय बजट 2026–27 से पहले भारत के बैटरी, इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) और क्लीन एनर्जी सेक्टर में उद्योग जगत की निगाहें सरकार की नीतियों पर टिकी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सही नीतिगत सुधार और वित्तीय प्रोत्साहन इन सेक्टरों को मजबूती देने और भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान कर सकते हैं।
स्पार्क मिंडा के ग्रुप सीटीओ डॉ. सुरेश डी ने कहा “ईवी इंडस्ट्री ऐसे बजट का इंतज़ार कर रही है जो सिर्फ गाड़ियों को नहीं, बल्कि एक साफ़ सोच को आगे बढ़ाए जहाँ साफ़ नीतियाँ, सही प्रोत्साहन और मज़बूत इंफ्रास्ट्रक्चर मिलकर भारत की हरित क्रांति को आगे ले जाएँ।
स्पष्टता ज़रूरी है। अगर नीतियाँ लंबे समय तक साफ़ और एक जैसी न हों, तो कंपनियाँ निवेश करने से कतराती हैं। सरकार की साफ़ दिशा से तकनीक, मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन में निवेश सुरक्षित रहता है।
प्रोत्साहन रफ्तार बढ़ाते हैं। सब्सिडी, आसान टैक्स और रिसर्च को सपोर्ट मिलने से ईवी आम लोगों के लिए सस्ती बनती हैं और नई तकनीक तेज़ी से आगे बढ़ती है। इंफ्रास्ट्रक्चर सबसे अहम है। चार्जिंग स्टेशन, सप्लाई और लॉजिस्टिक्स मजबूत होंगे, तभी ईवी सिर्फ शहरों तक नहीं, बल्कि पूरे देश में अपनाई जाएँगी। यह बजट भरोसा बढ़ाए, नए आइडियाज़ को आगे बढ़ाए और भारत को दुनिया की ईवी क्रांति में आगे लाए।”
एप्सिलॉन एडवांस्ड मैटीरियल्स के एमडी, विक्रम हांडा का कहना है कि जैसे-जैसे भारत ऊर्जा बदलाव के अगले चरण में प्रवेश कर रहा है, सेल निर्माताओं और मटीरियल सप्लायर्स के बीच बेहतर एकीकरण के अवसर बढ़ गए हैं। उन्होंने बताया कि एनोड और कैथोड जैसे अपस्ट्रीम बैटरी मटीरियल्स के निर्माण के लिए लक्षित कैपेक्स सब्सिडी बेहद जरूरी है, ताकि बड़े निवेश का जोखिम कम हो और भारत आत्मनिर्भर बन सके। इससे एक मजबूत और विश्वसनीय एसीसी (ACC) सप्लाई चेन तैयार होगी, जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी होगी और चीन जैसी किसी एक देश पर निर्भरता कम होगी।
लिको मटीरियल्स के फाउंडर और सीईओ, गौरव डोलवानी ने कहा कि भारत के बैटरी रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम में मजबूत नीतिगत पहल की जरूरत है। उन्होंने पीएलआई और फेम (FAME) योजनाओं के विस्तार और बेहतर समन्वय की उम्मीद जताई। इसके साथ ही, एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (ESS) और ई-मोबिलिटी के लिए बैटरियों पर जीएसटी को 18% से घटाकर 5% करने की भी आवश्यकता है। गौरव डोलवानी ने कहा कि रीसाइक्लर्स, OEM और सेल निर्माताओं के बीच सहज सहयोग के लिए अनुकूल नियामक और व्यावसायिक ढांचा होना चाहिए। साथ ही बैटरियों के जीवन-चक्र की ट्रेसबिलिटी, दीर्घकालिक ऑफटेक की सुनिश्चितता और नई बैटरियों में रीसाइकल्ड मैटीरियल के उपयोग को बढ़ावा देने वाले दिशा-निर्देश भारत की सर्कुलर बैटरी अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे और आयात पर निर्भरता कम करेंगे।
एवर्टा (EVERTA) के एमडी और फाउंडर, बेनी परिहार के अनुसार, भारत के ईवी सेक्टर में वाहन अपनाने और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर दोनों में तेज़ी देखी जा रही है। हालांकि, लंबे समय में स्थिर और परिपक्व विकास के लिए कई वर्षों तक स्पष्ट और स्थिर नीतियों की जरूरत है। डीसी फास्ट चार्जर का निर्माण पूंजी-गहन है और इसके लिए दीर्घकालिक योजना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बजट में पीएम ई-ड्राइव योजना के भविष्य को लेकर स्पष्टता होनी चाहिए और स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के लिए डीसी चार्जर, पावर मॉड्यूल और हाई-वोल्टेज कंपोनेंट्स के निर्माताओं हेतु पीएलआई या वॉल्यूम-लिंक्ड इंसेंटिव योजनाओं की जरूरत है। इसके अलावा प्राथमिकता क्षेत्र ऋण, कम ब्याज दरें और गैर-स्थानीय इनपुट्स पर तार्किक शुल्क घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करेंगे।
इंडिया एनर्जी स्टोरेज एलायंस (IESA) के प्रेसिडेंट, डेबमल्या सेन ने बताया कि भारत का क्लीन एनर्जी सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। 2025 तक सोलर क्षमता 132 GW और कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 250 GW से अधिक हो गई है। पीएम सूर्य घर योजना और 100 GW तक घरेलू सोलर मॉड्यूल बनाने की योजना इसके स्पष्ट संकेत हैं। लेकिन अब चुनौती यह है कि पूरे सिस्टम को मजबूत और टिकाऊ बनाया जाए, खासकर ग्रिड इंटीग्रेशन, स्टोरेज और स्थिरता के मामले में। उन्होंने कहा कि बजट में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के लिए स्थानीय निर्माण बढ़ाना जरूरी है, ताकि ग्रिड स्थिर रहे और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा मिले। BESS के लिए लंबी अवधि का वित्तीय प्रोत्साहन, टेंडर की स्पष्टता और रीसाइक्लिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का समर्थन एक मजबूत सर्कुलर अर्थव्यवस्था बनाने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा।
डेबमल्या सेन ने आगे कहा कि हरित वित्तपोषण, नीति स्थिरता और योजना के क्रियान्वयन में भरोसेमंदता बनाए रखना भी बेहद जरूरी है। बजट 2026 केवल विस्तार पर ध्यान देने का नहीं, बल्कि एक ऐसा भविष्य-सुरक्षित क्लीन एनर्जी सिस्टम बनाने का अवसर है, जो भारत को स्टोरेज, रीसाइक्लिंग और टिकाऊ निर्माण में वैश्विक नेतृत्व दिला सके।
काजाम के फाउंडर और सीईओ अक्षय शेखर ने कहा “केंद्रीय बजट को भारत में ईवी विस्तार को पावर सेक्टर और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर की तैयारियों के साथ मेल खाने योग्य बनाना चाहिए। FAME II के ₹11,500 करोड़ (वित्त वर्ष 2019–24) के बजट के तहत 16 लाख से अधिक ईवी को समर्थन मिला, जिसमें 14.3 लाख दोपहिया, 1.64 लाख तिपहिया, 22,500 चारपहिया और 5,000 से अधिक ई-बस शामिल हैं। 3W के लिए आवंटन योजना के अंत से बहुत पहले ही समाप्त हो गया, जो मजबूत व्यावसायिक अपनाने को दर्शाता है। FAME II का नवीनीकरण और ईवी तथा बैटरी निर्माण के लिए सतत प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) – कुल ₹25,938 करोड़ (वित्त वर्ष 2024–28) में से अब तक ₹2,300 करोड़ जारी – सार्वजनिक और आवासीय चार्जिंग के लिए उच्च आवंटन के साथ होना चाहिए, ताकि अवसंरचना अपनाने की गति के साथ तालमेल बना सके।
रिवैम्प्ड डिस्ट्रिब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDS) के तहत स्मार्ट मीटर की त्वरित तैनाती और बैटरी आधार (Battery Aadhaar) फ्रेमवर्क को लागू करना, जिससे ट्रेसबिलिटी, सुरक्षा और सर्कुलैरिटी सुनिश्चित हो, स्मार्ट चार्जिंग, लोड मैनेजमेंट और भरोसेमंद ग्रिड इंटीग्रेशन को सक्षम करेगा। बिल्डिंग बायलॉज में ईवी-रेडी चार्जिंग के लिए स्पष्ट नीति, बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रीशियन सर्टिफिकेशन के साथ, सुरक्षित और मानकीकृत इंस्टॉलेशन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
क्लीन एनर्जी के मामले में, पीएम सूर्य योजना को ईवी चार्जिंग के साथ गहरे स्तर पर एकीकृत करना, साथ ही पियर-टू-पियर एनर्जी ट्रेडिंग, व्हीकल-टू-ग्रिड और वर्चुअल पावर प्लांट के लिए राज्य स्तर पर नियम बनाना, ईवी को सक्रिय और वितरित ऊर्जा संसाधन के रूप में स्थापित कर सकता है। मोबिलिटी, पावर और शहरी नियोजन में समन्वित नीतियां ही भारत के क्लीन मोबिलिटी संक्रमण के आर्थिक, जलवायु और ग्रिड-रेजिलिएंस लाभों को पूरी तरह से उजागर करने के लिए आवश्यक हैं।”
कुल मिलाकर, उद्योग जगत का मानना है कि यदि बजट 2026–27 में नीति स्थिरता, स्थानीय निर्माण, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और वित्तीय सपोर्ट पर ध्यान दिया गया, तो भारत बैटरी, ईवी और क्लीन एनर्जी सेक्टर में वैश्विक नेतृत्व स्थापित कर सकता है।