केंद्रीय बजट 2026–27 से पहले ऑटोमोबाइल, ऑटो कंपोनेंट और इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) सेक्टर की निगाहें सरकार की नीतिगत दिशा पर टिकी हुई हैं। उद्योग जगत का मानना है कि यह बजट भारत को मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अगले चरण में ले जाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
ऊनो मिंडा के एमडी रवि मेहरा के अनुसार, ऑटो कंपोनेंट सेक्टर ऐसी नीतियों की उम्मीद कर रहा है जो मैन्युफैक्चरिंग को मज़बूत करें, इनोवेशन को बढ़ावा दें और निर्यात को गति दें। उनका कहना है कि पीएलआई-ऑटो योजना का विस्तार कर उसमें ईवी से जुड़े सेंसर, सेमीकंडक्टर और एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स को शामिल करना घरेलू वैल्यू एडिशन बढ़ाने के लिए ज़रूरी है। इसके साथ ही आरएंडडी प्रोत्साहन, ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स और क्लीन मोबिलिटी के लिए अलग इनोवेशन फंड, टैक्स विवाद समाधान, जीएसटी और कस्टम ड्यूटी का सरलीकरण तथा स्थिर टैक्स व्यवस्था से कारोबार करना आसान होगा।
वहीं, स्कोडा ऑटो वोक्सवैगन इंडिया के एमडी एवं सीईओ पियूष अरोड़ा का कहना है कि जीएसटी 2.0 के सफल लागू होने के बाद उद्योग को नीतियों में स्थिरता और लंबी अवधि की स्पष्टता की उम्मीद है। घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को लगातार सपोर्ट और सड़क व परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अधिक बजट ज़रूरी है। इलेक्ट्रिक वाहनों पर उलटी टैक्स व्यवस्था को ठीक करने से ईवी निर्माण को बढ़ावा मिलेगा, प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और भारत का स्वच्छ व टिकाऊ परिवहन की ओर सफर तेज़ होगा।
ट्रेवल के को-फाउंडर साहिल जिंदल मानते हैं कि आगामी बजट भारत की ईवी यात्रा को सिर्फ़ सोच से आगे बढ़ाकर बड़े स्तर पर लागू करने का मौका है। उनके मुताबिक तेज़ी से चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार, फ्लीट आधारित इलेक्ट्रिफिकेशन को सपोर्ट और दीर्घकालिक पूंजी तक आसान पहुंच बेहद अहम है। ईवी फ्लीट्स न केवल अपनाने की रफ्तार बढ़ाती हैं, बल्कि पर्यावरण पर भी ठोस और मापने योग्य सकारात्मक असर डालती हैं।
बिजलीराइड के को-फाउंडर और सीईओ शिवम सिसोदिया का कहना है कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम इस समय एक निर्णायक मोड़ पर है। खासकर दोपहिया और लास्ट-माइल सेगमेंट में ईवी अपनाने की रफ्तार तेज़ हुई है। इस बदलाव को और गति देने के लिए रेंटल, सब्सक्रिप्शन और ईवी-एज़-ए-सर्विस मॉडल को मान्यता देना ज़रूरी है, ताकि गिग वर्कर्स और छोटे कारोबारों के लिए ईवी सुलभ हो सकें। साथ ही सस्ती पूंजी, शहर और मोहल्ला स्तर पर चार्जिंग व बैटरी-स्वैपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाले टैक्स प्रोत्साहन अहम होंगे।
इसी तरह, ज़ेलियो ई-मोबिलिटी के को-फाउंडर एवं एमडी कुनाल आर्य का मानना है कि भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का भविष्य मुख्य रूप से दोपहिया वाहनों से तय होगा, जहां किफ़ायत और रोज़मर्रा की उपयोगिता सबसे अहम है। वे कहते हैं कि टिकाऊ ईवी विकास अल्पकालिक सब्सिडी से ज़्यादा दीर्घकालिक संरचनात्मक सपोर्ट और नीति स्थिरता पर निर्भर करता है। बजट 2026–27 में बैटरी सेल, कंट्रोलर और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए विशेष पीएलआई सपोर्ट, दोपहिया ईवी पर जीएसटी का तार्किककरण, कम लागत वाली फाइनेंसिंग और एक स्पष्ट राष्ट्रीय चार्जिंग रोडमैप जिसमें 2027 तक 50,000 सार्वजनिक चार्जिंग पॉइंट्स का लक्ष्य शामिल होना ज़रूरी होगा।
कुल मिलाकर, उद्योग जगत की राय है कि यदि बजट 2026–27 में नीति निरंतरता, लोकल मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और पूंजी तक आसान पहुंच पर ध्यान दिया गया, तो भारत न केवल अपनी ईवी महत्वाकांक्षाओं को ज़मीन पर उतार पाएगा, बल्कि भविष्य के ऑटोमोटिव और मोबिलिटी समाधानों का एक वैश्विक केंद्र भी बन सकता है।