लेकिन वर्ष 2026 में उपभोक्ताओं की अपेक्षाएं बदल चुकी हैं। अब लोग सिर्फ यह नहीं जानना चाहते कि वे क्या खरीद रहे हैं, बल्कि यह भी जानना चाहते हैं कि उत्पाद कहां से आया है, उसमें क्या सामग्री है और उसकी गुणवत्ता कितनी विश्वसनीय है। स्वास्थ्य, सुरक्षा और पारदर्शिता के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण उपभोक्ता अब उत्पादों की पूरी जानकारी चाहते हैं।
आज खरीदारी का तरीका बदल रहा है। पारंपरिक खरीदारी की जगह अब एक अधिक पारदर्शी और व्यक्तिगत अनुभव ले रहा है, जहां ग्राहक किसी उत्पाद के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं।
स्कैन की नई ताकत
पारंपरिक 1D बारकोड और नए 2D बारकोड, जैसे QR कोड या डेटा मैट्रिक्स, के बीच बड़ा अंतर है। भारत में लोग पहले से ही UPI भुगतान के लिए रोजाना QR कोड स्कैन करते हैं। देश में एक अरब से अधिक लोग नियमित रूप से स्कैनिंग का उपयोग कर रहे हैं। अब यही आदत भुगतान तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उत्पादों की जानकारी प्राप्त करने का माध्यम भी बनेगी।
जहां 1D बारकोड केवल उत्पाद की पहचान बताता है, वहीं 2D बारकोड उत्पाद की पूरी कहानी सामने ला सकता है। एक स्कैन से उपभोक्ता उत्पाद की ताजगी, सामग्री, स्रोत, निर्माण और समाप्ति तिथि जैसी जानकारी तुरंत देख सकते हैं। एक ही कोड उत्पाद की सुरक्षा, प्रामाणिकता, पोषण संबंधी जानकारी और नियामकीय अनुपालन से जुड़ी कई जानकारियां उपलब्ध करा सकता है।
दुनिया तेजी से 2D बारकोड की ओर बढ़ रही है और भारत को भी इस बदलाव के लिए तैयार होना होगा। स्मार्ट सप्लाई चेन और डिजिटल कारोबार की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। विशेष रूप से FMCG, फार्मास्यूटिकल्स और कृषि जैसे क्षेत्रों के लिए यह बदलाव बेहद अहम माना जा रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है वर्ष 2026?
2D बारकोड अपनाने की आवश्यकता केवल तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक पहल का हिस्सा है जिसे "Ambition 2027" कहा जाता है। इस पहल के तहत वर्ष 2027 के अंत तक वैश्विक रिटेल उद्योग का लक्ष्य है कि सभी पॉइंट-ऑफ-सेल सिस्टम 2D बारकोड को पढ़ने में सक्षम हों।
भारतीय कंपनियों और निर्यातकों के लिए वर्ष 2026 तैयारी का महत्वपूर्ण समय है। यदि कोई उत्पाद इस नई डिजिटल व्यवस्था के अनुरूप नहीं होगा, तो वह आधुनिक वैश्विक सप्लाई चेन में प्रतिस्पर्धा करने में कठिनाई महसूस कर सकता है।
गलत डेटा की समस्या का समाधान
किसी भी व्यवसाय के लिए गलत उत्पाद जानकारी एक बड़ी चुनौती है। यह समस्या विशेष रूप से क्विक-कॉमर्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर देखने को मिलती है। कई बार ग्राहक ऐप पर जो उत्पाद देखते हैं, वास्तविक डिलीवरी में वह अलग दिखाई देता है या उसमें बताई गई विशेषताएं नहीं होतीं। इससे ग्राहकों का भरोसा कम होता है और रिटर्न की संख्या बढ़ जाती है।
आज के समय में 'गलत डेटा' कई बार 'डेटा न होने' से भी अधिक नुकसानदायक साबित होता है।
वैश्विक डेटा मानकों को अपनाने से इस समस्या का समाधान संभव है। इससे उत्पाद से जुड़ी सभी जानकारी का एक विश्वसनीय और समान स्रोत उपलब्ध होगा। इससे भारत के किसी छोटे शहर में बना उत्पाद भी दुनिया के किसी भी बाजार में आसानी से पहचाना और सत्यापित किया जा सकेगा।
‘भारत’ के लिए व्यक्तिगत अनुभव
दुनिया अब डिजिटल प्रोडक्ट पासपोर्ट के दौर की ओर बढ़ रही है। इसका अर्थ है कि प्रत्येक उत्पाद के पास अपनी डिजिटल पहचान होगी, जिसमें उसकी पूरी जानकारी उपलब्ध रहेगी। उदाहरण के लिए, यदि कोई उपभोक्ता आटे का पैकेट स्कैन करता है, तो वह यह जान सकता है कि गेहूं किस खेत से आया है, उसमें कौन-कौन से पोषक तत्व हैं और उसका उपयोग कैसे किया जाना चाहिए।
यह केवल एक तकनीकी सुविधा नहीं है, बल्कि ब्रांड और उपभोक्ता के बीच विश्वास का मजबूत माध्यम भी है।
भारत जैसे विविधतापूर्ण बाजार में यह तकनीक कंपनियों को अलग-अलग जरूरतों वाले ग्राहकों तक सही जानकारी पहुंचाने में मदद करेगी। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक युवा हों या अपने परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाले माता-पिता, सभी को उनकी जरूरत के अनुसार जानकारी मिल सकेगी।
आगे की राह
भारतीय उद्यमियों और कंपनियों के लिए यह बदलाव एक बड़ा अवसर लेकर आया है। जो कंपनियां समय रहते 2D बारकोड अपनाएंगी, वे उपभोक्ताओं का अधिक विश्वास हासिल कर सकेंगी।
आने वाले महीनों में कंपनियों को तीन प्रमुख कदमों पर ध्यान देना चाहिए :
- केवल उत्पाद की पहचान तक सीमित न रहें, बल्कि उसकी जानकारी भी साझा करें।
- गोदामों और स्टोर में ऐसे स्कैनर उपलब्ध कराएं जो 2D बारकोड पढ़ सकें।
- बंद और सीमित डेटा सिस्टम की जगह वैश्विक डिजिटल मानकों को अपनाएं।
भविष्य में किसी ब्रांड की पहचान केवल उसके उत्पाद से नहीं होगी, बल्कि उस जानकारी और पारदर्शिता से होगी जो वह उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराता है। इसलिए आने वाले समय में सबसे सफल कंपनियां केवल उत्पाद नहीं बेचेंगी, बल्कि उसके पीछे की सच्ची और भरोसेमंद जानकारी भी उपभोक्ताओं तक पहुंचाएंगी।
(लेखक: एस. स्वामीनाथन, सीईओ, GS1 इंडिया, व्यक्त किए गए विचार निजी हैं।)