Unacademy: YouTube चैनल से एडटेक यूनिकॉर्न बनने तक का सफर

Unacademy: YouTube चैनल से एडटेक यूनिकॉर्न बनने तक का सफर

Unacademy: YouTube चैनल से एडटेक यूनिकॉर्न बनने तक का सफर
भारत का एडटेक सेक्टर पिछले एक दशक में तेजी से उभरा है और इस बदलाव में सबसे प्रमुख नामों में Unacademy शामिल रहा है। यह कंपनी एक साधारण YouTube शिक्षण चैनल से शुरू होकर देश की सबसे बड़ी एडटेक यूनिकॉर्न्स में से एक बन गई।


हालांकि, समय के साथ बदलते बाजार, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और फंडिंग मॉडल में बदलाव ने इसके विकास की दिशा को काफी प्रभावित किया।

Unacademy की शुरुआत वर्ष 2015 के आसपास एक YouTube-आधारित शिक्षा प्लेटफॉर्म के रूप में हुई थी। इसके फाउंडर गौरव मुंजाल, रोमन सैनी और हेमेश सिंह ने इसे इस उद्देश्य से शुरू किया कि भारत के सर्वश्रेष्ठ शिक्षक ऑनलाइन माध्यम से लाखों छात्रों तक पहुँच सकें। शुरुआती दौर में यह प्लेटफॉर्म पूरी तरह मुफ्त कंटेंट पर आधारित था और UPSC, JEE, NEET तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो गया।

शुरुआती ग्रोथ और एडटेक बूम

धीरे-धीरे इसकी लोकप्रियता बढ़ने के साथ कंपनी ने 2017 से 2019 के बीच बड़े स्तर पर फंडिंग जुटानी शुरू की। Unacademy को SoftBank, Tiger Global, General Atlantic और Peak XV Partners जैसे बड़े वैश्विक निवेशकों का समर्थन मिला। कंपनी ने लगभग 850 मिलियन डॉलर से अधिक की फंडिंग हासिल की। कोविड-19 महामारी के दौरान जब ऑनलाइन शिक्षा की मांग अपने चरम पर थी, तब Unacademy ने सबसे अधिक लाभ उठाया और इसका वैल्यूएशन लगभग 3.4 से 3.5 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया।

तेज विस्तार और ऑफलाइन रणनीति

कोविड काल में तेज ग्रोथ के बाद Unacademy ने अपने बिजनेस को केवल ऑनलाइन शिक्षा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि ऑफलाइन कोचिंग सेंटर और विभिन्न अधिग्रहणों के माध्यम से तेजी से विस्तार किया। इस दौरान कंपनी ने PrepLadder और Graphy जैसे प्लेटफॉर्म्स को मजबूत किया और देशभर में कई ऑफलाइन कोचिंग सेंटर शुरू किए। हालांकि, यह तेज विस्तार बाद में कंपनी के लिए चुनौती भी बन गया क्योंकि लागत तेजी से बढ़ने लगी।

धीरे-धीरे जैसे ही कोविड के बाद ऑफलाइन शिक्षा संस्थान दोबारा सक्रिय हुए, एडटेक सेक्टर की मांग में गिरावट देखने को मिली। इसके साथ ही Physics Wallah जैसे नए और कम लागत वाले प्रतिस्पर्धियों ने बाजार में मजबूत पकड़ बना ली। इससे Unacademy पर दबाव बढ़ा और इसके बिजनेस मॉडल की चुनौतियाँ सामने आने लगीं।

एडटेक संकट और बढ़ती चुनौतियां

मार्केटिंग खर्च, हायरिंग और ऑफलाइन विस्तार के कारण कंपनी की लागत बढ़ती गई, जबकि ग्रोथ पहले जैसी तेज नहीं रही। वर्ष 2024 और 2025 के दौरान कंपनी ने अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव किया और खर्च कम करने पर ध्यान केंद्रित किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी ने अपना कैश बर्न 1000 करोड़ रुपये से घटाकर लगभग 200 करोड़ रुपये से कम करने का लक्ष्य रखा। कंपनी के पास लगभग 1200 करोड़ रुपये का कैश रिजर्व बताया गया।

वित्तीय सुधार और कैश बर्न में कटौती

इसी दौरान इसके कई यूनिट्स जैसे PrepLadder और Graphy ने रेवेन्यू जनरेट करना शुरू किया और कुछ ऑफलाइन सेंटर लाभ की स्थिति में पहुंचने लगे। हालांकि वित्तीय सुधार के प्रयासों के बावजूद कंपनी के वैल्यूएशन में भारी गिरावट देखने को मिली। कोविड के समय जहां Unacademy का मूल्यांकन लगभग 3.5 बिलियन डॉलर था, वहीं 2025-2026 तक यह घटकर 500 मिलियन डॉलर से भी नीचे बताया जाने लगा।

वैल्यूएशन में गिरावट और सेक्टर बदलाव

इस गिरावट ने पूरे एडटेक सेक्टर में बदलाव के संकेत दिए और यह स्पष्ट हुआ कि महामारी के दौरान बना एडटेक बूम अब स्थिरता की ओर बढ़ रहा है। यह दौर भारतीय एडटेक उद्योग के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जहां ग्रोथ से ज्यादा फोकस अब प्रॉफिटेबिलिटी पर शिफ्ट हो गया।

नेतृत्व बदलाव और AirLearn फोकस

इसी अवधि में कंपनी के नेतृत्व में भी बदलाव देखने को मिला। संस्थापक गौरव मुंजाल, रोमन सैनी ने दैनिक संचालन से दूरी बनानी शुरू की और उनका ध्यान नए AI आधारित प्रोजेक्ट AirLearn की ओर बढ़ गया। इससे Unacademy के पारंपरिक टेस्ट-प्रेप बिजनेस की जिम्मेदारी नए नेतृत्व को सौंपी गई। यह संकेत माना गया कि कंपनी अब एक नए ट्रांजिशन फेज में प्रवेश कर चुकी है।
upGrad डील और इंडस्ट्री कंसोलिडेशन

वर्ष 2025-2026 के दौरान सबसे बड़ी खबर यह रही कि Unacademy और upGrad के बीच संभावित मर्जर या अधिग्रहण को लेकर बातचीत हुई। रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों कंपनियों के बीच टर्म शीट साइन होने की भी जानकारी सामने आई, जिससे यह संकेत मिला कि भारतीय एडटेक सेक्टर अब Consolidation की दिशा में बढ़ रहा है। यदि यह डील पूरी होती है, तो यह भारत के एडटेक उद्योग में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।

छात्रों और कर्मचारियों पर प्रभाव

इस पूरे बदलाव का असर केवल कंपनी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कर्मचारियों और छात्रों पर भी पड़ा। कई ऑफलाइन सेंटर बंद हुए, कर्मचारियों की छंटनी देखने को मिली और कुछ कोर्सेज की उपलब्धता भी प्रभावित हुई। ESOP वैल्यू में गिरावट ने भी कर्मचारियों के मनोबल पर असर डाला।

वर्तमान स्थिति और भविष्य की दिशा

आज Unacademy एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां वह Profitability की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही है। कंपनी अब नए बिजनेस मॉडल, AI आधारित शिक्षा प्लेटफॉर्म और संभावित मर्जर के जरिए खुद को फिर से स्थिर करने की दिशा में काम कर रही है। संस्थापक भी नए प्रोडक्ट्स पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि कंपनी अपने पुराने मॉडल से आगे बढ़कर एक नए दौर में प्रवेश कर रही है।

निष्कर्ष: एक सीख देने वाली एडटेक कहानी

Unacademy की कहानी भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जो यह दिखाती है कि तेज ग्रोथ के बाद स्थिरता और लाभप्रदता बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यह यात्रा इस बात का भी प्रमाण है कि किसी भी स्टार्टअप के लिए केवल फंडिंग और विस्तार ही नहीं, बल्कि मजबूत बिजनेस मॉडल और लंबे समय तक टिकने वाली रणनीति भी जरूरी होती है।

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