बैटरी रिसाइक्लिंग से फाइनेंस तक: ईवी बदलाव की कहानी

बैटरी रिसाइक्लिंग से फाइनेंस तक: ईवी बदलाव की कहानी

बैटरी रिसाइक्लिंग से फाइनेंस तक: ईवी बदलाव की कहानी
भारत में ग्रीन मोबिलिटी का भविष्य बैटरी रिसाइक्लिंग, वित्तीय इनोवेशन और तकनीकी प्रगति के संयुक्त विकास पर आधारित है।विशेषज्ञों के अनुसार, मजबूत नीति सपोर्ट और सहयोगी दृष्टिकोण से ईवी इकोसिस्टम को स्थायी और आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाया जा सकता है।

हरित परिवहन के तेजी से बदलते परिदृश्य के बीच आयोजित पैनल चर्चा “Building Dreams: Novelties Disrupting Green Mobility” में उद्योग विशेषज्ञों ने ईवी इकोसिस्टम के भविष्य पर गहन विचार साझा किए। सत्र का संचालन अशिता मार्या सीईओ एवं कंसल्टिंग एडिटर, फ्रैंचाइज़ इंडिया और एंटरप्रेन्योर इंडिया ने किया, जबकि एवरग्रीन रिसायकलकरो(Evergreen RecycleKaro)के सीईओ प्रसन्न दफाल (Prassann Daphal), टैपफिन( Tapfin) के सह-संस्थापक और सीईओ आदित्य सिंह और एआरसी इलेक्ट्रिक (ARC Electric) के सह-संस्थापक और सीईओ अभिनव कालिया ने बैटरी रीसाइक्लिंग, फाइनेंसिंग, लागत संरचना और तकनीकी चुनौतियों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत किए।

बैटरी रिसाइक्लिंगवास्तव में कैसे की जाती है? क्या यह कठिन और महंगी प्रक्रिया है?

प्रसन्न दाफल: पिछले कुछ वर्षों में बैटरी रिसाइक्लिंग क्षेत्र में नीतिगत स्पष्टता बढ़ी है। अब बैटरी वेस्ट मैनेजमेंट और EPR जैसे नियमों से यह तय हो गया है कि बैटरी को सुरक्षित रूप से कैसे संभालना, स्टोर करना और रीसायकल करना है।

 रिसाइक्लिंगकई स्तरों पर होती है- कुछ संस्थाएँ केवल बैटरी को तोड़कर “ब्लैक मास” बनाती हैं, जबकि उन्नत श्रेणी के रिसाइक्लर उससे धातु भी निकालते हैं। चुनौती यह है कि उन्नत तकनीक आसानी से उपलब्ध नहीं है और इसके लिए भारी अनुसंधान एवं निवेश की आवश्यकता होती है।

भारत में रीसाइक्लर को बैटरी खरीदनी पड़ती है, जबकि यूरोप में लोग रिसाइक्लिंग के लिए भुगतान करते हैं। यही कारण है कि यह प्रक्रिया तकनीकी रूप से जटिल और आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण है।

क्या प्रयुक्त बैटरियों का पुनः उपयोग संभव है?

प्रसन्न दाफल: ईवी बैटरियों के लगभग 15–20% सेल अभी भी उपयोग योग्य पाए जाते हैं। इन्हें सीधे वाहन में दोबारा उपयोग करना सुरक्षित नहीं होता, लेकिन ऊर्जा भंडारण जैसे सेकेंडरी उपयोगों में इनका प्रयोग संभव है। हालाँकि बैटरी रिफर्बिशमेंट के लिए स्पष्ट सुरक्षा नियम और मानक अभी विकसित हो रहे हैं, क्योंकि गलत प्रबंधन से सुरक्षा जोखिम बढ़ सकते हैं।

ईवी क्षेत्र में वित्तपोषण की स्थिति कैसे बदल रही है?

आदित्य सिंह: पहले वित्तीय संस्थानों को ईवी व्यवसाय मॉडल, तकनीक और अवशिष्ट मूल्य पर भरोसा नहीं था। डेटा की कमी और उद्योग की प्रारंभिक अवस्था के कारण जोखिम अधिक माना जाता था।

  • अब स्थिति बदल रही है।
  • उद्योग अधिक परिपक्व हुआ है।
  • वाहन और बैटरी परफॉर्मेंस का डेटा उपलब्ध है।
  • सेकेंडरी मार्केट विकसित हो रहा है।
  • ग्रीन फाइनेंस और फिनटेक मॉडल उभर रहे हैं।

वर्तमान में B2C वाहन वित्तपोषण अपेक्षाकृत आसान है, जबकि B2B फ्लीट फाइनेंसिंग अभी भी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि छोटे उद्यमों के पास स्थिर वित्तीय रिकॉर्ड नहीं होते।

क्या वित्त की उपलब्धता ईवी बिक्री को प्रभावित करती है?

अभिनव कालिया: हाँ, वित्त की उपलब्धता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ईवी का संचालन खर्च कम है, लेकिन प्रारंभिक खरीद लागत अभी भी पारंपरिक वाहनों से अधिक है। बैटरी वाहन की कुल लागत का सबसे बड़ा हिस्सा है, जिससे कुल स्वामित्व लागत (TCO) प्रभावित होती है। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, स्थानीय बैटरी उत्पादन और बड़े पैमाने पर विनिर्माण से लागत में कमी आएगी। जैसे-जैसे अवसंरचना बेहतर हो रही है, लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स कंपनियों का भरोसा भी बढ़ रहा है।

भविष्य में ईवी उद्योग की दिशा क्या होगी?

पैनल की सामूहिक राय:

  • बैटरी रिसाइक्लिंग और सेकेंडरी उपयोग उद्योग की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
  • वित्तीय संस्थान धीरे-धीरे बड़े पैमाने पर निवेश करेंगे।
  • घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और चार्जिंग नेटवर्क विस्तार से लागत घटेगी।
  • हरित मोबिलिटी का विस्तार तकनीक, नीति और वित्त के संतुलित सहयोग पर निर्भर करेगा।

निष्कर्ष

भारत में हरित मोबिलिटी का भविष्य केवल वाहनों के विद्युतीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि बैटरी रिसाइक्लिंग, वित्तीय इनोवेशन, तकनीकी परिपक्वता और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के समन्वित विकास पर निर्भर करता है। विशेषज्ञों प्रसन्न डफल(Prassann Daphal), आदित्य सिंह और अभिनव कालिया ने इस बात पर जोर दिया कि नीति सपोर्ट, डेटा-आधारित वित्तपोषण और स्थानीय विनिर्माण क्षमताएँ उद्योग की स्थिरता को मजबूत करेंगी। इस चर्चा ने यह संदेश दिया कि सहयोगात्मक दृष्टिकोण, तकनीकी इनोवेशन और दीर्घकालिक रणनीति के माध्यम से भारत स्वच्छ, टिकाऊ और आर्थिक रूप से व्यवहार्य ई-मोबिलिटी भविष्य की ओर निर्णायक कदम बढ़ा रहा है।

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