नई व्यवस्था के तहत अब वोकेशनल शिक्षकों को 38,100 रुपये प्रतिमाह वेतन मिलेगा। वहीं, समग्र शिक्षा अभियान के तहत कार्यरत शिक्षकों का वेतन बढ़ाकर 35,420 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। इससे पहले वोकेशनल शिक्षकों को करीब 20,000 से 23,000 रुपये तक मानदेय मिलता था, जबकि समग्र शिक्षा अभियान से जुड़े शिक्षकों को लगभग 21,000 रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाता था। नई बढ़ोतरी के बाद इन शिक्षकों की आय में बड़ा सुधार हुआ है।
हजारों शिक्षकों और छात्रों को मिलेगा सीधा लाभ
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जानकारी दी कि दिल्ली में लगभग 1,131 वोकेशनल शिक्षक विभिन्न स्कूलों और प्रशिक्षण संस्थानों में छात्रों को स्किल आधारित शिक्षा दे रहे हैं। ये शिक्षक छात्रों को आईटी, रिटेल, हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, टूरिज्म और अन्य रोजगार आधारित क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान करते हैं, ताकि छात्र पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल भी सीख सकें।
इसके अलावा, समग्र शिक्षा अभियान के तहत राजधानी में 784 विशेष प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों में ऐसे बच्चों को शिक्षा दी जाती है, जो किसी कारणवश स्कूल नहीं जा पाए, आर्थिक या सामाजिक कारणों से पढ़ाई छोड़ चुके हैं या लंबे समय से शिक्षा से दूर हैं। इन बच्चों को दोबारा मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने में इन केंद्रों की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।
शिक्षकों की मेहनत और समर्पण को मिला सम्मान
सरकार के अनुसार, यह फैसला केवल वेतन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन शिक्षकों के समर्पण और मेहनत का सम्मान भी है, जो कठिन परिस्थितियों में बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने का काम कर रहे हैं। कई शिक्षक दूरदराज और कमजोर वर्गों के बच्चों के साथ काम करते हैं और उन्हें दोबारा शिक्षा प्रणाली से जोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों की आर्थिक सुरक्षा मजबूत होने से वे और अधिक उत्साह और आत्मविश्वास के साथ काम कर पाएंगे। इससे स्कूलों और प्रशिक्षण केंद्रों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में भी मदद मिलेगी।
शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने पर सरकार का फोकस
दिल्ली सरकार का कहना है कि उसका मुख्य उद्देश्य राजधानी में शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी, आधुनिक और सुलभ बनाना है। सरकार लगातार स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और शिक्षक प्रशिक्षण पर निवेश बढ़ा रही है।
वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि जब शिक्षकों को बेहतर वेतन और स्थिर आर्थिक सुरक्षा मिलती है, तो उनका कार्य प्रदर्शन और छात्रों के प्रति समर्पण भी बढ़ता है। इससे छात्रों को बेहतर मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सीखने का सकारात्मक माहौल मिलता है।
सरकार का लक्ष्य है कि दिल्ली का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। इसी सोच के तहत स्कूल छोड़ चुके बच्चों को फिर से पढ़ाई से जोड़ने, स्किल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने और शिक्षकों को बेहतर सुविधाएं देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला आने वाले समय में दिल्ली की स्कूल शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।