सिंगापुर मुख्यालय वाली वैश्विक एडटेक कंपनी Eruditus ने आने वाले पांच वर्षों में भारत को अपना सबसे महत्वपूर्ण बाजार बनाने की योजना बनाई है। कंपनी का अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में उसके कुल रेवेन्यू का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा भारत से आएगा। वर्तमान में कंपनी की कुल आय में भारत की हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी विश्वविद्यालयों की बढ़ती भागीदारी और वैश्विक शिक्षा की मांग के चलते भारत Eruditus के लिए तेजी से उभरता हुआ बाजार बन रहा है।
वर्ष 2010 में स्थापित की गई Eruditus आज दुनिया के प्रमुख एडटेक प्लेटफॉर्म्स में शामिल है। कंपनी MIT, Harvard, Cambridge सहित कई प्रतिष्ठित वैश्विक विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी कर उच्च गुणवत्ता वाली कार्यकारी शिक्षा, पेशेवर कौशल विकास और डिग्री कार्यक्रम उपलब्ध कराती है। कंपनी अपने Emeritus ब्रांड के माध्यम से 80 से अधिक देशों के 3.5 लाख से ज्यादा शिक्षार्थियों तक पहुंच बना चुकी है।
भारत में बढ़ रही वैश्विक शिक्षा की मांग
Eruditus के, को-फाउंडर और सीईओ अश्विन डामेरा ने कहा कि भारत उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रहा है। छात्रों और कामकाजी पेशेवरों के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा, वैश्विक डिग्री और करियर-केंद्रित कौशल कार्यक्रमों की मांग लगातार बढ़ रही है। यही कारण है कि कंपनी भारत में अपने निवेश और साझेदारियों का विस्तार कर रही है।
उन्होंने बताया कि Eruditus ने भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों के प्रवेश को आसान बनाने के लिए सात अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ संयुक्त उपक्रम (JV) मॉडल के तहत साझेदारी की है। इनमें UNSW Sydney, University of Bristol, University of Liverpool, University of York, University of Aberdeen, Illinois Tech और Victoria University शामिल हैं।
इस मॉडल के तहत विदेशी विश्वविद्यालयों के पास 51 प्रतिशत और Eruditus के पास 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम, शिक्षण पद्धति, फैकल्टी नियुक्ति, प्रवेश प्रक्रिया और शोध गतिविधियों का संचालन करेंगे, जबकि Eruditus संचालन, छात्र अनुभव, आवास, तकनीकी एकीकरण और उद्योग सहयोग से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी संभालेगा।
भारतीय छात्रों को मिलेगा वैश्विक अवसर
कंपनी का मानना है कि इस मॉडल से भारतीय छात्रों को देश में रहकर ही विश्वस्तरीय शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त डिग्रियां हासिल करने का अवसर मिलेगा। इससे उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और छात्रों की रोजगार क्षमता भी बढ़ेगी।
अश्विन डामेरा ने कहा कि Eruditus की शुरुआत भारत से हुई थी और अब कंपनी फिर से भारतीय शिक्षा बाजार में अपनी भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि अगले पांच वर्षों में भारत कंपनी की विकास रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बन जाएगा।
एडटेक क्षेत्र में मजबूत पहचान
Eruditus आज भारत के सबसे अधिक रेवेन्यू अर्जित करने वाले एडटेक प्लेटफॉर्म्स में से एक है। कंपनी का मूल्यांकन लगभग 3 बिलियन डॉलर है और इसे SoftBank, TPG तथा Accel जैसे प्रमुख वैश्विक निवेशकों का समर्थन प्राप्त है। वित्त वर्ष 2024 में कंपनी ने 3,733 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री दर्ज की थी।
कंपनी 80 से अधिक विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर अल्पकालिक और दीर्घकालिक पाठ्यक्रम, बूटकैंप, डिग्री कार्यक्रम और कॉर्पोरेट प्रशिक्षण समाधान प्रदान करती है। इसके अलावा Eruditus विभिन्न उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप विशेष लर्निंग एंड डेवलपमेंट (L&D) कार्यक्रम भी तैयार करती है।
शिक्षा के भविष्य को नई दिशा
अश्विन डामेरा ने कहा कि Eruditus Group और Emeritus भारत में एडटेक क्षेत्र के अग्रणी प्लेटफॉर्म के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी का उद्देश्य केवल राजस्व वृद्धि नहीं, बल्कि लाखों शिक्षार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाकर उनके करियर और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है।
उनके अनुसार, भारत में उच्च शिक्षा का भविष्य वैश्विक साझेदारियों, डिजिटल लर्निंग, कौशल विकास और आजीवन सीखने (Lifelong Learning) पर आधारित होगा। विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ बढ़ती साझेदारियां भारतीय छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा तक आसान पहुंच प्रदान करेंगी।
उच्च शिक्षा में नए अवसरों का दौर
शिक्षाविदों का मानना है कि भारत दुनिया के सबसे तेजी से विकसित हो रहे शिक्षा बाजारों में से एक है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए खुले अवसरों ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई गति दी है। ऐसे में Eruditus जैसी कंपनियां भारतीय छात्रों, पेशेवरों और संस्थानों को वैश्विक शिक्षा इकोसिस्टम से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
भारत में विदेशी विश्वविद्यालय परिसरों, ऑनलाइन डिग्री कार्यक्रमों और कौशल-आधारित शिक्षा के विस्तार के साथ आने वाले वर्षों में उच्च शिक्षा का परिदृश्य तेजी से बदलने की उम्मीद है। Eruditus की रणनीति इसी परिवर्तन का हिस्सा मानी जा रही है, जो भारत को वैश्विक शिक्षा और कौशल विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में योगदान दे सकती है।