फ्रांस के नीस शहर में आयोजित ‘भारत इनोवेट्स 2026’ कार्यक्रम में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT Madras) और IITM Global ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए सात वाणिज्यिक और दो संस्थागत समझौता ज्ञापनों (MoU) का आदान-प्रदान किया। संस्थान के अनुसार इन समझौतों से लगभग 100 मिलियन डॉलर के आर्थिक मूल्य सृजन की संभावना है, जो भारतीय शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
IIT मद्रास द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, सात वाणिज्यिक समझौते भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप्स को फ्रांस सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय भागीदारों से जोड़ने पर केंद्रित हैं। वहीं, दो संस्थागत समझौते वैश्विक बाजारों तक पहुंच बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और नवाचार को गति देने के उद्देश्य से किए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये साझेदारियां भारतीय स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी तकनीकों और समाधानों को प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करेंगी।
भारतीय नवाचार को वैश्विक पहचान
IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटी ने कहा कि ‘भारत इनोवेट्स 2026’ भारतीय डीप-टेक क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक अवसर साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि ये समझौते केवल औपचारिक दस्तावेज नहीं हैं, बल्कि मजबूत वित्तीय प्रतिबद्धताओं और व्यावसायिक संभावनाओं से जुड़े वास्तविक सहयोग हैं। उनके अनुसार, भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों ने यह साबित कर दिया है कि भारत का नवाचार और अनुसंधान वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करने की क्षमता रखता है।
संस्थान के इंडस्ट्रियल कंसल्टेंसी एंड स्पॉन्सर्ड रिसर्च डीन प्रोफेसर मनु संथानम ने कहा कि ये समझौते इस बात का उदाहरण हैं कि किस प्रकार वैज्ञानिक शोध और तकनीकी उत्कृष्टता को आर्थिक मूल्य और व्यावसायिक अवसरों में बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि इससे शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और उद्योग जगत के बीच सहयोग को नई दिशा मिलेगी।
डीप-टेक स्टार्टअप्स को मिलेगा निवेश
कार्यक्रम के दौरान IITM Global और Agna Capital के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ, जिसके तहत दोनों संस्थाएं मिलकर ‘भारत इनोवेट्स फंड’ स्थापित करेंगी। इस फंड का उद्देश्य उच्च क्षमता वाले डीप-टेक स्टार्टअप्स में निवेश को बढ़ावा देना और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने में सहायता प्रदान करना है।
इसके अलावा, IITM Global और SouthwestX के बीच हुई साझेदारी भारतीय स्टार्टअप्स के लिए यूरोप के बड़े बाजारों, विशेष रूप से जर्मनी और फ्रांस, तक पहुंच आसान बनाएगी। इससे भारतीय नवाचारों को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और उद्योगों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
अत्याधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन
समझौतों के साथ IIT मद्रास ने अपने अनुसंधान समूहों और स्टार्टअप इकोसिस्टम द्वारा विकसित कई अत्याधुनिक तकनीकों का भी प्रदर्शन किया। इनमें हाइपरलूप परिवहन प्रणाली, 5G और 6G संचार तकनीक, पोर्ट ऑटोमेशन, लैब-ग्रोन डायमंड तकनीक तथा ऊर्जा दक्ष स्वदेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम शामिल थे। इन तकनीकों ने वैश्विक निवेशकों, शिक्षाविदों और उद्योग जगत का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
कार्यक्रम में यूरोपीय संघ के उद्योग प्रतिनिधियों, विश्वविद्यालयों, निवेशकों और सरकारी अधिकारियों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। इससे IIT मद्रास और IITM Global के साथ अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता, कौशल विकास और तकनीकी सहयोग के नए अवसरों की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।
छात्रों और शोधकर्ताओं को होगा लाभ
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन समझौतों का लाभ केवल संस्थानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छात्रों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को भी मिलेगा। वैश्विक साझेदारियों, निवेश और तकनीकी सहयोग के माध्यम से भारतीय युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीखने, शोध करने और नवाचार को व्यवसाय में बदलने के नए अवसर प्राप्त होंगे।
‘भारत इनोवेट्स 2026’ में IIT मद्रास की यह उपलब्धि भारत को वैश्विक नवाचार और डीप-टेक नेतृत्व की दिशा में एक और मजबूत कदम के रूप में देखी जा रही है। आने वाले वर्षों में ऐसे सहयोग भारतीय शिक्षा, अनुसंधान और स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।