हरिद्वार में शुरू हुई पतंजलि सिविल सेवा अकादमी, IAS-IPS अभ्यर्थियों को मिलेगा 2 वर्षीय आवासीय प्रशिक्षण

हरिद्वार में शुरू हुई पतंजलि सिविल सेवा अकादमी, IAS-IPS अभ्यर्थियों को मिलेगा 2 वर्षीय आवासीय प्रशिक्षण

हरिद्वार में शुरू हुई पतंजलि सिविल सेवा अकादमी, IAS-IPS अभ्यर्थियों को मिलेगा 2 वर्षीय आवासीय प्रशिक्षण
भारतीय ज्ञान परंपरा, आधुनिक प्रशासनिक शिक्षा और व्यक्तित्व विकास के समन्वय से तैयार होंगे भविष्य के प्रशासनिक अधिकारी; जुलाई 2026 में होगी पहली प्रवेश परीक्षा।


देश में सिविल सेवा शिक्षा को नई दिशा देने के उद्देश्य से हरिद्वार में पतंजलि सिविल सेवा अकादमी की शुरुआत की गई है। यह अकादमी संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा, राज्य लोक सेवा आयोग (PCS) तथा अन्य केंद्रीय सेवाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाला प्रशिक्षण प्रदान करेगी। संस्थान का लक्ष्य केवल परीक्षा में सफलता दिलाना ही नहीं, बल्कि ऐसे सक्षम, संवेदनशील और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पित प्रशासक तैयार करना है जो देश के विकास में प्रभावी योगदान दे सकें।

पतंजलि द्वारा शुरू की गई यह पहल शिक्षा और प्रशासनिक प्रशिक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अकादमी में UPSC, IAS, IPS, PCS एवं अन्य सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी के लिए दो वर्षीय आवासीय कार्यक्रम संचालित किया जाएगा। इसके लिए जुलाई 2026 में पहली प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा।

समग्र शिक्षा और राष्ट्रसेवा पर विशेष फोकस

अकादमी का उद्देश्य भारतीय संस्कृति, आधुनिक विज्ञान और प्रशासनिक दक्षता का समन्वय करते हुए छात्रों को समग्र शिक्षा प्रदान करना है। संस्थान का मानना है कि भविष्य के प्रशासनिक अधिकारियों को केवल विषय ज्ञान ही नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों, नेतृत्व क्षमता और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना से भी सशक्त होना चाहिए। इसी दृष्टिकोण के साथ अकादमी ने अपने शैक्षणिक मॉडल को तैयार किया है।

इस अवसर पर कहा गया कि भारत की प्रशासनिक व्यवस्था देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और अधिकारियों का चरित्र, दृष्टिकोण तथा सेवा भावना शासन व्यवस्था की गुणवत्ता तय करते हैं। इसलिए अकादमी का प्रयास ऐसे युवाओं को तैयार करना है जो प्रशासनिक दक्षता के साथ-साथ राष्ट्रहित और जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

अकादमी में एक विशेष ‘त्रि-शिक्षा मॉडल’ लागू किया जाएगा। इस मॉडल में आध्यात्मिक ज्ञान, प्रशासनिक उत्कृष्टता और शैक्षणिक कठोरता का संतुलित समावेश होगा। संस्थान के अनुसार यह मॉडल विद्यार्थियों के बौद्धिक, मानसिक और नैतिक विकास को एक साथ आगे बढ़ाने में मदद करेगा।

‘त्रि-शिक्षा मॉडल’ से होगा सर्वांगीण विकास

यह मॉडल विद्यार्थियों को केवल प्रतियोगी परीक्षा के लिए तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन्हें जिम्मेदार नेतृत्वकर्ता के रूप में विकसित करने का भी कार्य करेगा। आध्यात्मिक मूल्यों, प्रशासनिक समझ और गहन अध्ययन का यह संयोजन छात्रों को व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करेगा।

शैक्षणिक पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और भारतीय ज्ञान परंपरा के अनुरूप तैयार किया गया है। इसमें आधुनिक प्रशासनिक अध्ययन के साथ-साथ भारतीय चिंतन, संविधान, सुशासन, नीति निर्माण और लोक प्रशासन से जुड़े विषयों को भी शामिल किया जाएगा।

अकादमी का मानना है कि भारतीय विरासत और आधुनिक ज्ञान का संतुलन विद्यार्थियों को अधिक व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करेगा और उन्हें बदलती प्रशासनिक चुनौतियों के लिए तैयार करेगा।

योग, प्राणायाम और व्यक्तित्व विकास पर जोर

विद्यार्थियों के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए योग, ध्यान और प्राणायाम को भी प्रशिक्षण प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाएगा। इन गतिविधियों के माध्यम से छात्रों में मानसिक दृढ़ता, आत्मविश्वास, एकाग्रता और तनाव प्रबंधन की क्षमता विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि सिविल सेवा जैसी चुनौतीपूर्ण परीक्षाओं और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के लिए मानसिक संतुलन और नेतृत्व क्षमता उतनी ही महत्वपूर्ण है जितना कि शैक्षणिक ज्ञान। इसलिए अकादमी इन पहलुओं पर भी विशेष ध्यान देगी।

शिक्षा और प्रशासनिक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने कहा कि वर्तमान समय में प्रशासनिक सेवाओं में ऐसे अधिकारियों की आवश्यकता है जो तकनीकी रूप से दक्ष होने के साथ-साथ समाज की आवश्यकताओं और संवेदनाओं को भी समझते हों।

अनुभवी शिक्षकों से मिलेगा मार्गदर्शन

अकादमी इसी दिशा में कार्य करते हुए विद्यार्थियों में कर्तव्यनिष्ठा, संवेदनशीलता और जनसेवा की भावना विकसित करने पर विशेष जोर देगी। पतंजलि के अनुसार अकादमी का शैक्षणिक नेतृत्व देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों और अनुभवी सिविल सेवा मार्गदर्शकों के सहयोग से किया जाएगा।

छात्रों को दिल्ली सहित देश के प्रमुख शिक्षा केंद्रों के विशेषज्ञ शिक्षकों से मार्गदर्शन प्राप्त होगा। इसके अलावा नियमित टेस्ट, इंटरव्यू प्रशिक्षण, व्यक्तित्व विकास कार्यक्रम और समसामयिक विषयों पर विशेष सत्र भी आयोजित किए जाएंगे।

संस्थान का लक्ष्य विद्यार्थियों को केवल परीक्षा पास कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें भविष्य के प्रभावी नीति-निर्माता और प्रशासनिक नेतृत्वकर्ता के रूप में तैयार करना भी है।

सिविल सेवा शिक्षा को मिल सकती है नई दिशा

अकादमी का लक्ष्य केवल परीक्षा-केंद्रित तैयारी तक सीमित नहीं रहेगा। विद्यार्थियों को नेतृत्व क्षमता, नीति विश्लेषण, निर्णय लेने की क्षमता और प्रशासनिक व्यवहार से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे वे भविष्य में प्रशासनिक सेवाओं में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए तैयार हो सकेंगे।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हरिद्वार में शुरू हुई यह नई सिविल सेवा अकादमी देशभर के प्रतिभाशाली युवाओं को गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

भारतीय मूल्यों, आधुनिक शिक्षा और प्रशासनिक उत्कृष्टता के समन्वय पर आधारित यह पहल आने वाले वर्षों में सिविल सेवा शिक्षा के क्षेत्र में एक नया मॉडल प्रस्तुत कर सकती है और देश को सक्षम, संवेदनशील तथा राष्ट्रहित के प्रति समर्पित प्रशासनिक नेतृत्व प्रदान करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

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