कंपनी इस फंड के जरिए भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में 50 नए उच्च प्रभाव वाले और तेज़ी से बढ़ने वाले क्लाइमेट स्टार्टअप्स को स्थापित करने और उनका विस्तार करने में निवेश करेगी।
यह दूसरा फंड कंपनी के पहले 60 मिलियन डॉलर के फंड की सफलता के बाद लॉन्च किया गया है। वर्ष 2023 में यह फंड अपनी निर्धारित निवेश सीमा (हार्ड कैप) तक पहुंच गया था। पहले फंड में यूएस डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन (DFC), सिंगापुर इकोनॉमिक डेवलपमेंट बोर्ड (EDB), ब्रिटिश इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट (BII), ट्रिपल जंप, कार्लबो एनर्जी (Qarlbo Energy), जेजी डिजिटल इक्विटी वेंचर्स, काजिमा कॉरपोरेशन और बीकन वेंचर्स सहित कई संस्थागत, रणनीतिक और फैमिली ऑफिस निवेशकों ने भाग लिया था।
कंपनी के अनुसार, पहले फंड के जरिए अब तक आठ देशों में 27 कंपनियों की सह-स्थापना (Co-founded) की जा चुकी है। 100×100 का दावा है कि वह पारंपरिक वेंचर कैपिटल फर्मों की तुलना में अपने स्टार्टअप्स में अधिक हिस्सेदारी रखती है और उसकी पोर्टफोलियो कंपनियां लगभग 1.5 गुना अधिक पूंजी दक्षता (Capital Efficiency) के साथ काम करती हैं।
कंपनी ने बताया कि उसके Fund I की पोर्टफोलियो कंपनियों ने अब तक 16 बाहरी निवेशकों से 2.8 करोड़ डॉलर (28 मिलियन डॉलर) से अधिक की अतिरिक्त फंडिंग जुटाई है। इनमें से अधिकांश कंपनियों ने शुरुआत के छह महीने के भीतर ही राजस्व अर्जित करना शुरू कर दिया था।
100×100 ने अपने पोर्टफोलियो की कंपनी Rize की सफलता का भी उल्लेख किया। यह स्टार्टअप धान की खेती के दौरान निकलने वाले मीथेन उत्सर्जन को कम करने और छोटे किसानों की सहायता करने पर काम करता है। कंपनी के अनुसार, वर्ष 2025 में Rize ने 1.1 करोड़ डॉलर (11 मिलियन डॉलर) का राजस्व हासिल किया और 550 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की। साथ ही इसने 40,000 से अधिक किसानों की आय और आजीविका को बेहतर बनाने में योगदान दिया है।
कंपनी ने पिछले 10 महीनों में भारत में तीन नई कंपनियों की सह-स्थापना भी की है। ये कंपनियां बायोएनर्जी, ऊर्जा-कुशल कूलिंग, लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा परिवर्तन (Energy Transition) और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम कर रही हैं। 100×100 का कहना है कि भारत में उसका संचालन देश के मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम, जलवायु लक्ष्यों और तेज़ी से हो रहे आर्थिक परिवर्तन का लाभ उठाने पर केंद्रित है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है, जो क्लाइमेट टेक्नोलॉजी और सतत विकास से जुड़े नवाचारों के लिए बड़े अवसर प्रदान करता है।
100×100 के पार्टनर सुभदीप सान्याल ने कहा कि भारत वह स्थान है, जहां जलवायु परिवर्तन की चुनौती, आर्थिक विकास और उद्यमशीलता की क्षमता एक साथ मिलती हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी का वेंचर बिल्डिंग मॉडल ऐसे स्टार्टअप्स तैयार करने पर केंद्रित है, जो जलवायु संबंधी चुनौतियों का समाधान करने के साथ-साथ बड़े पैमाने पर कारोबार भी विकसित कर सकें।
उन्होंने कहा कि भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया मिलकर वैश्विक कार्बन उत्सर्जन का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में विकसित होने वाले क्लाइमेट स्टार्टअप्स वैश्विक स्तर पर बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में समर्पित क्लाइमेट वेंचर बिल्डर के रूप में 100×100 देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम और जलवायु लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना चाहता है।