बच्चों में बढ़ती नशे की समस्या पर चिंता
मंत्रालय का कहना है कि बच्चों और किशोरों में नशे की बढ़ती आदत एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। इसलिए स्कूलों को इस समस्या से लड़ने में सबसे अहम भूमिका निभानी होगी।
यह फैसला हाल ही में हुई नार्को-समन्वय केंद्र (NCORD) की बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की। बैठक में तय किया गया कि साल 2029 तक नशे के खिलाफ एक मजबूत रोडमैप तैयार किया जाएगा और इसकी नियमित समीक्षा भी की जाएगी।
500 मीटर के दायरे में बनेगा ‘नशा मुक्त क्षेत्र’
नई योजना के तहत स्कूलों के आसपास 500 मीटर के दायरे को “नशा मुक्त क्षेत्र” घोषित किया जाएगा। अगर इस क्षेत्र में नशे से जुड़ी कोई गतिविधि होती है, तो स्कूल के प्रिंसिपल या नोडल शिक्षक को इसकी जानकारी तुरंत पुलिस या संबंधित अधिकारियों को देनी होगी।
इस कार्ययोजना में जागरूकता बढ़ाने पर खास जोर दिया गया है। इसके तहत स्कूलों में नशे के खिलाफ शिक्षा, पोस्टर, अभियान, और स्टूडेंट्स की भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही, शिक्षकों और स्कूल प्रमुखों को ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे बच्चों को सही मार्गदर्शन दे सकें।
छात्रों की सक्रिय भागीदारी और काउंसलिंग सुविधा
छात्रों को भी इस अभियान का हिस्सा बनाया जाएगा, जहां वे अपने साथियों को जागरूक करने में मदद करेंगे। इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग और स्वास्थ्य सेवाओं की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा गया है कि वे इस योजना को प्राथमिकता के साथ लागू करें और इसे सभी सरकारी और निजी स्कूलों तक पहुंचाएं। साथ ही, राज्य और जिला स्तर पर अधिकारियों की नियुक्ति कर मजबूत निगरानी व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
नशा मुक्त और सुरक्षित स्कूल बनाने का लक्ष्य
इस पहल का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में सुरक्षित, स्वस्थ और नशा मुक्त माहौल बनाना है, ताकि बच्चे और युवा नशे से दूर रह सकें और उनका समग्र विकास हो सके।
इसके तहत स्कूलों को केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि सकारात्मक सोच और सही व्यवहार सिखाने वाला सुरक्षित स्थान बनाया जाएगा। बच्चों को शुरुआती स्तर पर ही नशे के नुकसान के बारे में जागरूक किया जाएगा, ताकि वे सही फैसले ले सकें।
इस योजना में व्यवहार परिवर्तन (Behavior Change) पर खास जोर दिया गया है, जिससे छात्र नशे से दूर रहने की आदत विकसित कर सकें। साथ ही, जरूरत पड़ने पर छात्रों को काउंसलिंग और स्वास्थ्य सहायता भी दी जाएगी। शिक्षकों और स्कूल स्टाफ को भी ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे बच्चों के व्यवहार में बदलाव को समझ सकें और समय रहते मदद कर सकें।
अत: यह पहल स्कूल, परिवार और समाज के बीच बेहतर तालमेल बनाकर बच्चों को नशे से बचाने के लिए एक मजबूत सुरक्षा तंत्र (Safety Network) तैयार करने पर भी ध्यान देती है। इसके अतिरिक्त शिक्षा मंत्रालय ने सभी राज्यों से इस योजना पर समय-समय पर रिपोर्ट देने को कहा है, ताकि इसके प्रभावी क्रियान्वयन और बेहतर परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।