अशोक लेलैंड (Ashok Leyland) अपने इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के बैटरी पैक में सेल को छोड़कर 50-60% तक लोकलाइजेशन हासिल करने की तैयारी कर रही है। कंपनी का लक्ष्य आयातित कंपोनेंट्स पर निर्भरता कम करना और भारत में अपनी बैटरी पैक व बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) टेक्नोलॉजी विकसित करना है।
अशोक लेलैंड (Ashok Leyland) के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ शेनू अग्रवाल, जो हाल ही में SIAM के President-designate भी बने हैं, के अनुसार कंपनी चेन्नई के पास एक बैटरी पैक मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी स्थापित कर रही है। उन्होंने कहा कि सेल को छोड़कर बैटरी पैक के 50% से अधिक, और संभवतः 60% तक हिस्से को भारत में लोकलाइज करने की योजना है।
कंपनी के अनुसार, ऑटोमोटिव एप्लिकेशन के लिए बैटरी पैक का उत्पादन 2027 के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है। हालांकि, बैटरी सेल के घरेलू उत्पादन के लिए अभी कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की गई है। कंपनी इस दिशा में गंभीरता से योजना बना रही है।
अशोक लेलैंड के बैटरी पैक केवल कंपनी के अपने इलेक्ट्रिक ट्रकों और बसों तक सीमित नहीं रहेंगे। कंपनी इन्हें अन्य ऑटोमोबाइल निर्माताओं को भी सप्लाई करने की योजना बना रही है।
इसके अलावा, कंपनी Battery Energy Storage Systems (BESS) के क्षेत्र में भी अवसर तलाश रही है। शेनू अग्रवाल के अनुसार, शुरुआती दौर में केवल ऑटोमोटिव डिमांड इतनी बड़ी नहीं हो सकती कि बड़े निवेश के लिए जरूरी स्केल उपलब्ध करा सके। ऐसे में BESS जैसे अन्य एप्लिकेशन अतिरिक्त वॉल्यूम उपलब्ध कराने में मदद कर सकते हैं।
अशोक लेलैंड अपने पारंपरिक कमर्शियल व्हीकल कारोबार में हासिल किए गए अनुभव का इस्तेमाल नई इलेक्ट्रिक पावरट्रेन टेक्नोलॉजी विकसित करने में कर रही है।
अग्रवाल के मुताबिक, भारत में दशकों से मैन्युफैक्चरिंग के अनुभव के चलते अशोक लेलैंड के डीजल ट्रकों में इस्तेमाल होने वाले करीब 99% कंपोनेंट्स लोकलाइज्ड हैं। इसके मुकाबले इलेक्ट्रिक ट्रकों में अभी भी बड़ी मात्रा में आयातित कंपोनेंट्स का इस्तेमाल होता है।
उन्होंने कहा कि भारत में अत्यधिक दक्ष बैटरी सेल और पैक तैयार करने की क्षमता विकसित करने में समय लगेगा। इस तरह की टेक्नोलॉजी को देश में विकसित करने या किसी अन्य बाजार से ट्रांसफर करने में भी समय की जरूरत होगी।
अशोक लेलैंड पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य ईवी टेक्नोलॉजी को लेकर भी अपनी रणनीति तैयार कर रही है। कंपनी का मानना है कि हर तकनीक को पूरी तरह इन-हाउस विकसित करना व्यावहारिक नहीं होगा।
अग्रवाल के अनुसार, कंपनी ने एक रोडमैप तैयार किया है, जिसमें यह तय किया गया है कि किन टेक्नोलॉजी को Ashok Leyland खुद विकसित करेगी, किन क्षेत्रों में टेक्नोलॉजी पार्टनर्स के साथ काम किया जाएगा और किन कंपोनेंट्स की सप्लाई बाहरी सप्लायर्स से जारी रखी जाएगी।
इस रणनीति के जरिए कंपनी इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में लोकलाइजेशन बढ़ाने के साथ-साथ बैटरी और अन्य प्रमुख ईवी टेक्नोलॉजी में अपनी क्षमताओं को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है।