भारत में सड़क परिवहन के सभी वाहन वर्गों में तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अपनाने से 2050 तक कच्चे तेल और बैटरी के संयुक्त आयात खर्च में सालाना 125 अरब डॉलर तक की बचत हो सकती है। यह जानकारी इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (ICCT) द्वारा इंडिया क्लीन ट्रांसपोर्टेशन समिट 2026 में जारी एक वर्किंग पेपर में सामने आई है।
अध्ययन के अनुसार, संभावित 125 अरब डॉलर की बचत में से 94 अरब डॉलर की बचत केवल EV अपनाने की गति से हो सकती है, भले ही सभी बैटरी सेल का आयात किया जाए। वहीं, बाकी 31 अरब डॉलर की अतिरिक्त बचत घरेलू बैटरी सेल मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने से हासिल हो सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पेट्रोल और डीजल के आयात में कमी से होने वाली वित्तीय बचत आयातित बैटरी सेल की खरीद लागत से काफी अधिक होगी।
अध्ययन में कहा गया है कि बेसलाइन कच्चे तेल की कीमतों के अनुमान के तहत, धीमी और तेज इलेक्ट्रिफिकेशन अपनाने की राह के बीच 2050 तक सालाना आयात लागत में 104 अरब डॉलर का अंतर हो सकता है। वहीं, कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहने की स्थिति में यह अंतर बढ़कर सालाना 166 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
आईसीसीटी (ICCT) के इंडिया मैनेजिंग डायरेक्टर अमित भट्ट ने कहा कि भारत जितनी तेजी से इलेक्ट्रिफिकेशन करेगा, वह वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति उतना ही कम संवेदनशील होगा और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में उसकी स्थिति मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि स्थानीय बैटरी मैन्युफैक्चरिंग अतिरिक्त लाभ देती है, लेकिन सबसे पहले भारत को आयात जोखिम से बचाने के लिए इलेक्ट्रिफिकेशन की गति महत्वपूर्ण है।
वर्किंग पेपर में 2024 से 2050 के बीच दोपहिया, तिपहिया, पैसेंजर कार, लाइट कमर्शियल व्हीकल, बस और हैवी ट्रक समेत सभी प्रमुख वाहन श्रेणियों में बैटरी की मांग का आकलन किया गया है।
सभी परिदृश्यों में 2030 के बाद भारत की घरेलू बैटरी जरूरत में तेज वृद्धि होने का अनुमान है। बेसलाइन अनुमान के तहत 2050 तक यह मांग 340 गीगावाट-घंटे (GWh) तक पहुंच सकती है, जबकि आक्रामक EV अपनाने की स्थिति में यह बढ़कर 573 GWh हो सकती है।
अध्ययन के मुताबिक, घरेलू सेल मैन्युफैक्चरिंग को बड़े पैमाने पर स्थापित करने में समय लगेगा। इसलिए 2030 तक भारत की लगभग पूरी बैटरी सेल जरूरत आयात के जरिए पूरी होने की संभावना है।
सियाम इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ग्रुप (SIAM Electric Mobility Group) के चेयरमैन और टाटा मोटर्स (Tata Motors) के चीफ कॉरपोरेट अफेयर्स ऑफिसर सुशांत नाइक ने कहा कि ऑटो इंडस्ट्री ने भारत के लिए स्थानीय स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग करके आयात को पहले ही करीब 20,000 करोड़ रुपये कम किया है।
उन्होंने कहा कि आगे की टेक्नोलॉजी रणनीति का लक्ष्य केवल भारत में बैटरी और मोटर का निर्माण करना नहीं, बल्कि इससे जुड़ी स्किल और डिजाइन क्षमता भी देश में विकसित करना होना चाहिए। इसके साथ ही, लोकलाइजेशन को केवल फाइनल असेंबली तक सीमित रखने के बजाय पूरी वैल्यू चेन में बढ़ाने की जरूरत है।
अध्ययन की सह-लेखक नमिता सिंह ने कहा कि भारत की सड़कों पर आने वाला हर इलेक्ट्रिक वाहन देश की आयातित तेल पर निर्भरता को कम करता है, चाहे उसकी बैटरी घरेलू स्तर पर बनाई गई हो या आयात की गई हो।
उनके अनुसार, केवल ईवी अपनाने में तेजी लाने से 2050 तक भारत के सड़क परिवहन के आयात बिल में 61% तक की कमी आ सकती है। वहीं, तेज ईवी मैन्युफैक्चरिंग के साथ घरेलू बैटरी सेल उत्पादन को जोड़ने पर यह बचत 82% तक पहुंच सकती है, जो करीब 125 अरब डॉलर सालाना के बराबर होगी।