EV बैटरी में आत्मनिर्भर बने भारत: तरुण गर्ग

EV बैटरी में आत्मनिर्भर बने भारत: तरुण गर्ग

EV बैटरी में आत्मनिर्भर बने भारत: तरुण गर्ग
हुंडई मोटर इंडिया के एमडी और सीईओ तरुण गर्ग ने ऑटो इंडस्ट्री से सेमीकंडक्टर चिप्स, ईवी बैटरी सेल, रेयर-अर्थ मैग्नेट और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों में घरेलू क्षमता विकसित करने का आह्वान किया है।

हुंडई मोटर इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव तरुण गर्ग ने बुधवार को भारतीय ऑटोमोटिव इंडस्ट्री से भविष्य की महत्वपूर्ण तकनीकों में घरेलू क्षमताएं विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत ने ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरिंग में बड़े पैमाने पर उत्पादन क्षमता हासिल की है, लेकिन अब देश को तकनीक के डिजाइन, विकास और निर्माण में भी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा।

गर्ग ने ACMA के 66वें Annual Session में बोलते हुए कहा कि भारत को सेमीकंडक्टर चिप्स, EV बैटरी सेल, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकों में घरेलू क्षमताएं विकसित करने की जरूरत है। उनके मुताबिक, ऑटो इंडस्ट्री को भविष्य की तकनीकों में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग स्केल से आगे बढ़ना होगा।

उन्होंने कहा कि भारत ने मैन्युफैक्चरिंग में महत्वपूर्ण स्तर हासिल किया है, लेकिन अब देश को भविष्य की तकनीकों के डिजाइन, डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग में अपनी क्षमता मजबूत करनी चाहिए।

तरुण गर्ग के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में भारत के ऑटो-कंपोनेंट उद्योग ने करीब 24 अरब डॉलर के कंपोनेंट्स का निर्यात किया, जबकि आयात लगभग 25.4 अरब डॉलर रहा। इससे करीब 1.4 अरब डॉलर का व्यापार घाटा हुआ।

हालांकि, उन्होंने कहा कि चुनौती केवल व्यापार घाटे तक सीमित नहीं है। भारत के कंपोनेंट निर्यात अभी भी अपेक्षाकृत परिपक्व और पारंपरिक तकनीकों पर केंद्रित हैं, जबकि आयात में उन्नत और अधिक मूल्य वाली तकनीकों की हिस्सेदारी ज्यादा है।

गर्ग ने ऑटो-कंपोनेंट निर्माताओं से घरेलू तकनीकी क्षमताओं को विकसित करने और रिसर्च एवं डेवलपमेंट (R&D) तथा इनोवेशन में निवेश बढ़ाने का आग्रह किया।

गर्ग ने कहा कि भारत को रणनीतिक आत्मनिर्भरता के लिए सेमीकंडक्टर, रेयर-अर्थ मैग्नेट, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और बैटरी सेल जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों में घरेलू क्षमता विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि केवल इन तकनीकों का इस्तेमाल करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि देश को इन पर स्वामित्व और निर्माण क्षमता भी हासिल करनी होगी।

उन्होंने ऑटो-कंपोनेंट कंपनियों से पारंपरिक कंपोनेंट एक्सपोर्ट से आगे बढ़कर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग क्षमताओं को विकसित करने की अपील की।

गर्ग ने इंडस्ट्री के लिए पांच प्रमुख प्राथमिकताएं भी बताईं—एक महत्वपूर्ण तकनीक में महारत हासिल करना, एक आयातित कंपोनेंट को स्थानीय बनाना, एक भारतीय पेटेंट तैयार करना, एक ग्लोबल मार्केट में प्रवेश करना और प्रत्येक बिजनेस फंक्शन में AI को शामिल करना।

उन्होंने कहा कि अगर ऑटो इंडस्ट्री के नेता इन पांच क्षेत्रों पर प्रतिबद्धता के साथ काम करते हैं, तो इसका भारतीय ऑटोमोटिव सेक्टर पर व्यापक और परिवर्तनकारी प्रभाव पड़ सकता है।

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