इस प्लेटफॉर्म के तहत कुल 300 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 2500 करोड़ रुपये से अधिक) का निवेश किया जाएगा, जिसका उद्देश्य भारत के क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन को मजबूत करना है।
इस साझेदारी के तहत British International Investment (BII) और Copenhagen Infrastructure Partners (CIP) के Growth Markets Fund II द्वारा 150-150 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक का निवेश किया जाएगा। यह प्लेटफॉर्म भारत में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, हाइब्रिड रिन्यूएबल एनर्जी और एनर्जी स्टोरेज प्रोजेक्ट्स में निवेश करेगा।
North Star प्लेटफॉर्म के तहत विकसित किए जाने वाले प्रोजेक्ट्स से हर साल 4 मिलियन मेगावॉट-घंटे से अधिक स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन होने की उम्मीद है। इसके साथ ही, इन परियोजनाओं से प्रति वर्ष लगभग 4 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिल सकती है, जिससे भारत के पर्यावरण और जलवायु लक्ष्यों को समर्थन मिलेगा।
यह पहल British Climate Partners के तहत किया गया पहला निवेश है। British Climate Partners, BII का 1.1 बिलियन पाउंड का क्लाइमेट फाइनेंस प्रोग्राम है, जिसे उभरते एशियाई बाजारों में जलवायु और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ी परियोजनाओं में निवेश बढ़ाने के लिए शुरू किया गया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत, इंडोनेशिया, वियतनाम और फिलीपींस जैसे देशों में क्लाइमेट इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में संस्थागत निवेश को बढ़ावा देना है। भारत को इस पहल के लिए पहला बाजार इसलिए चुना गया है क्योंकि देश ने रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं।
भारत का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता हासिल करना और 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य पूरा करना है। हालांकि, इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए देश को हर साल लगभग 160 बिलियन अमेरिकी डॉलर के क्लाइमेट फाइनेंस की जरूरत होगी।
निवेशकों के अनुसार, North Star प्लेटफॉर्म रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपर्स को फंडिंग और प्रोजेक्ट डेवलपमेंट से जुड़ी चुनौतियों को हल करने में मदद करेगा। यह प्लेटफॉर्म परियोजनाओं के पूरे लाइफसाइकल में सहयोग प्रदान करेगा और निजी निवेश को आकर्षित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।