दिल्ली इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को अपनाने के मामले में देश का सबसे बेहतर परफॉरमेंस करने वाला राज्य/केंद्र शासित प्रदेश बनकर उभरी है। नीति आयोग ने 16 सितंबर को नई दिल्ली में India Electric Mobility Index (IEMI) 2025 जारी किया, जिसमें दिल्ली ने पहला स्थान हासिल किया। इसके बाद महाराष्ट्र, कर्नाटक, चंडीगढ़ और गोवा टॉप प्रदर्शन करने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शामिल रहे।
आईईएमआई (IEMI) के जरिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की प्रगति का आकलन किया जाता है। इसमें ट्रांसपोर्ट इलेक्ट्रिफिकेशन, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की तैयारी और रिसर्च एवं इनोवेशन जैसे प्रमुख इंडिकेटर्स को शामिल किया गया है। इंडेक्स के स्कोर में पिछले साल के मुकाबले सुधार भी देखा गया है। सबसे ज्यादा स्कोर 77 से बढ़कर 84 और मीडियन स्कोर 36 से बढ़कर 40 हो गया है।
नीति आयोग के मेंबर राजीव गौबा ने राज्य ईवी पॉलिसियों पर आयोजित वर्कशॉप में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ट्रांजिशन को भारत के Viksit Bharat 2047 विजन के लिए आर्थिक, पर्यावरणीय और रणनीतिक जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का करीब 89% आयात करता है। वहीं, ऑटोमोटिव सेक्टर देश की GDP में करीब 7.1% योगदान देता है और लगभग 1.9 करोड़ लोगों को रोजगार देता है।
गौबा के अनुसार, भारत के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 29 ने ईवी पॉलिसी को अधिसूचित किया है। उन्होंने कहा कि राज्यों के बीच इलेक्ट्रिक मोबिलिटी अपनाने में अंतर उनके औद्योगिक आधार, वित्तीय क्षमता और भौगोलिक परिस्थितियों से जुड़ा है। उन्होंने राज्यों के बीच बेस्ट प्रैक्टिस साझा करने, चुनिंदा शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इलेक्ट्रिफिकेशन और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता व विश्वसनीयता बढ़ाने पर जोर दिया।
उन्होंने बताया कि फेम, पीएम ई-ड्राइव और पीएम ई-बस सेवा जैसी योजनाओं के साथ ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स के लिए पीएलआई स्कीम तथा एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल बैटरी स्टोरेज सहित विभिन्न पहलों के जरिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को ₹92,000 करोड़ से अधिक का सरकारी समर्थन मिल रहा है। उन्होंने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और निजी क्षेत्र द्वारा चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार का भी उल्लेख किया और यूनिफाइड भारत ई-चार्ज ऐप को चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच आसान बनाने की दिशा में एक पहल बताया।
नीति आयोग ने 2025 में आईईएमआई का पहला संस्करण एक राज्य-स्तरीय फ्रेमवर्क के रूप में लॉन्च किया था, जिसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रगति को ट्रैक करना है। 2024 के संस्करण में 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों का 16 इंडिकेटर्स के आधार पर आकलन किया गया था।