ईवी चार्जिंग को भरोसेमंद बनाने पर IEEFA का जोर

ईवी चार्जिंग को भरोसेमंद बनाने पर IEEFA का जोर

ईवी चार्जिंग को भरोसेमंद बनाने पर IEEFA का जोर
आईईईएफए ने भारत में ईवी अपनाने को बढ़ावा देने के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को अधिक भरोसेमंद, किफायती और सुलभ बनाने पर जोर दिया है।

भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) को तेजी से अपनाने के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को अधिक भरोसेमंद, किफायती और आसानी से उपलब्ध बनाने की जरूरत है। इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंशियल एनालिसिस (IEEFA) की एक रिपोर्ट में ईवी चार्जिंग से जुड़ी मौजूदा चुनौतियों को दूर करने पर जोर दिया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में ईवी बिक्री 2016 में करीब 50,000 यूनिट से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 25 लाख यूनिट हो गई है। इसी अवधि में पब्लिक ईवी चार्जिंग स्टेशनों की संख्या भी 2022 में 5,151 से बढ़कर जुलाई 2026 तक 52,718 हो गई है।

हालांकि, ज्यादातर व्हीकल सेगमेंट में ईवी की हिस्सेदारी अभी भी सिंगल डिजिट या लो डबल डिजिट में है। IEEFA के अनुसार, इससे पता चलता है कि ईवी अपनाने की रफ्तार बढ़ाने के लिए सिर्फ चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि चार्जिंग से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं को भी दूर करना जरूरी है।

आईईईएफए (IEEFA) की ब्रीफिंग नोट ‘Improving the EV charging experience in India: Beyond charger deployment’ में पब्लिक चार्जर्स की कम विश्वसनीयता, अलग-अलग चार्जिंग नेटवर्क के बीच इंटरऑपरेबिलिटी की समस्या, पब्लिक चार्जिंग की ज्यादा लागत, होम चार्जिंग से जुड़ी चुनौतियों और ग्रिड कनेक्शन में देरी को प्रमुख बाधाओं के रूप में बताया गया है।

आईईईएफए (IEEFA) के लीड एनर्जी स्पेशलिस्ट और रिपोर्ट के को-ऑथर चरित कोंडा ने कहा कि ईवी चार्जिंग अनुभव के लिए सिर्फ चार्जर्स की संख्या नहीं, बल्कि उनका लगातार उपलब्ध और भरोसेमंद होना भी जरूरी है। रिपोर्ट में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सरकारी सहायता को सत्यापित अपटाइम और प्रदर्शन से जोड़ने की सिफारिश की गई है।

रिपोर्ट में एक यूनिफाइड पेमेंट सिस्टम की दिशा में आगे बढ़ने और तय पार्किंग स्पेस वाले घरों में ईवी चार्जिंग की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए ‘Right to Charge’ लागू करने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा, सार्वजनिक EV चार्जिंग पर GST को मौजूदा 18% से घटाकर 5% करने की सिफारिश की गई है, जो ईवी खरीद पर लागू GST दर के अनुरूप होगी।

आईईईएफए (IEEFA) ने ग्रिड अपग्रेड से जुड़ी लागत के लिए रियायती फाइनेंसिंग की व्यवस्था करने और बैटरी-स्वैपिंग सेवाओं पर भी 5% GST लागू करने का सुझाव दिया है। साथ ही, ट्रांसपोर्ट विभागों और बिजली वितरण कंपनियों के बीच बेहतर समन्वय के साथ ग्रिड-रेडीनेस प्लानिंग पर जोर दिया गया है।

रिपोर्ट में Time-of-Use (ToU) टैरिफ को भी ईवी चार्जिंग को बेहतर बनाने का एक महत्वपूर्ण तरीका बताया गया है। IEEFA के एनर्जी फाइनेंस एनालिस्ट और रिपोर्ट के को-ऑथर ध्रुव गर्ग के अनुसार, ToU टैरिफ के जरिए चार्जिंग डिमांड को शाम के पीक आवर्स से हटाकर ऑफ-पीक और ज्यादा रिन्यूएबल एनर्जी उपलब्ध होने वाले समय में शिफ्ट किया जा सकता है। इससे क्लीन एनर्जी का बेहतर उपयोग और सिस्टम की कुल लागत कम करने में मदद मिल सकती है।

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