₹900 करोड़ की स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर योजना, दिल्ली में बनेंगे 27 नए सरकारी स्कूल भवन

₹900 करोड़ की स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर योजना, दिल्ली में बनेंगे 27 नए सरकारी स्कूल भवन

₹900 करोड़ की स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर योजना, दिल्ली में बनेंगे 27 नए सरकारी स्कूल भवन
दिल्ली सरकार ने सुरक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए 34 सरकारी स्कूल भवनों को ध्वस्त करने का फैसला किया है। इनकी जगह करीब 900 करोड़ रुपये की लागत से 27 नए और आधुनिक स्कूल भवन बनाए जाएंगे।


34 सरकारी स्कूल भवनों के पुनर्निर्माण की तैयारी

दिल्ली सरकार शहर के सरकारी स्कूलों में सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। एक अधिकारी के अनुसार, सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी समस्याओं वाले 34 सरकारी स्कूलों की पहचान की गई है। इन स्कूल भवनों को चरणबद्ध तरीके से ध्वस्त किया जाएगा और उनकी जगह नए भवनों का निर्माण किया जाएगा।

इनमें से 16 स्कूलों में ध्वस्तीकरण और निर्माण से जुड़ा काम शुरू हो चुका है, जबकि 9 मामलों को मंजूरी मिल चुकी है। कुछ स्कूलों में जलभराव की समस्या है, जबकि कुछ भवनों में सुरक्षा संबंधी चिंताएं सामने आई हैं। कुछ स्कूल ऐसे स्थानों पर भी स्थित हैं, जिन्हें विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त नहीं माना गया है।

27 नए स्कूल भवनों पर खर्च होंगे करीब 900 करोड़ रुपये

दिल्ली में 27 नए सरकारी स्कूल भवनों का निर्माण खाली पड़ी जमीनों पर किया जाएगा। इन परियोजनाओं पर करीब 900 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। अधिकारियों के अनुसार, नए स्कूल भवनों का निर्माण लगभग 18 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

तेजी से निर्माण और बेहतर निगरानी के लिए सभी 27 निर्माण स्थलों को पांच भौगोलिक क्लस्टर में बांटा गया है। इससे अलग-अलग क्षेत्रों में चल रहे निर्माण कार्यों की निगरानी और प्रगति की समीक्षा अधिक व्यवस्थित तरीके से की जा सकेगी।

1,090 सरकारी स्कूलों की डिजिटल प्रोफाइलिंग पूरी

अधिकारी ने बताया कि 34 स्कूलों को ध्वस्त करने का फैसला दिल्ली के सभी 1,090 सरकारी स्कूलों की डिजिटल प्रोफाइलिंग पूरी होने के बाद लिया गया है। इस प्रोफाइलिंग का उद्देश्य प्रत्येक स्कूल में मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा व्यवस्था और जरूरी सुविधाओं की स्थिति का विस्तृत आकलन करना है।

शिक्षा विभाग अब इस प्रोफाइलिंग से मिले डेटा का विश्लेषण कर रहा है। इसके आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि किन स्कूलों में मरम्मत, रेट्रोफिटिंग, सुरक्षा सुधार या नए निर्माण की जरूरत है।

स्कूलों की सुविधाओं का किया गया विस्तृत रिकॉर्ड

डिजिटल प्रोफाइलिंग के दौरान स्कूलों के क्लासरूम और भवनों की संपत्तियों का विस्तृत डॉक्यूमेंटेशन किया गया है। इसमें सफाई व्यवस्था, पीने के पानी की सुविधा, सुरक्षा इंतजाम, फर्नीचर, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, किचन और लैब जैसी सुविधाओं की जानकारी शामिल की गई है।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल स्कूल भवनों की मौजूदा स्थिति दर्ज करना नहीं है, बल्कि भविष्य में मरम्मत, निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार की जरूरतों को डेटा के आधार पर तय करना भी है। इससे स्कूलों के लिए बजट और विकास योजनाएं तैयार करने में मदद मिलेगी।

360-डिग्री इमेजिंग से तैयार हुआ डिजिटल रिकॉर्ड

स्कूल भवनों की जांच के लिए आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। स्कूलों के प्रत्येक कमरे को 360-डिग्री इमेजिंग के माध्यम से डिजिटाइज किया गया है। इससे प्रत्येक स्कूल भवन का एक स्थायी डिजिटल रिकॉर्ड तैयार हुआ है।

इस डिजिटल रिकॉर्ड की मदद से वर्चुअल वॉकथ्रू किया जा सकता है। इससे अधिकारियों को स्कूल परिसर का निरीक्षण करने, समस्याओं की पहचान करने और निर्माण या मरम्मत से जुड़े फैसले लेने में आसानी होगी।

ड्रोन और जीआईएस तकनीक से होगी निगरानी

भविष्य में स्कूलों के निर्माण और मरम्मत कार्यों की योजना बनाने, बजट तैयार करने और प्रोजेक्ट की निगरानी के लिए ड्रोन सर्वे, हाई-रिजॉल्यूशन ऑर्थोमोजेक इमेज और जीआईएस आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन तकनीकों से स्कूल भवन और उसके आसपास के क्षेत्र की विस्तृत जानकारी हासिल की जा सकेगी। इससे निर्माण कार्य की प्रगति पर नजर रखने और योजनाओं को अधिक सटीक तरीके से लागू करने में मदद मिल सकती है।

भवनों की मजबूती के लिए वैज्ञानिक जांच

स्कूल भवनों की संरचनात्मक मजबूती जांचने के लिए विशेष टीमें विजुअल निरीक्षण और नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्ट कर रही हैं। इन परीक्षणों के दौरान भवन को नुकसान पहुंचाए बिना उसकी मजबूती और संरचना की स्थिति का आकलन किया जाता है। जांच में अल्ट्रासोनिक पल्स टेस्ट और रिबाउंड हैमर टेस्ट जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। वैज्ञानिक आकलन के आधार पर स्कूल भवनों को अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाएगा। इनमें सुरक्षित रखने, मरम्मत करने, रेट्रोफिटिंग करने या पूरी तरह ध्वस्त करने की श्रेणियां शामिल हैं।

27 नए सरकारी स्कूल भवनों के निर्माण के लिए शिक्षा निदेशालय (DoE) ने केंद्र सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) से बोलियां आमंत्रित की हैं। इन परियोजनाओं के लिए एक प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट-कम-EPC एजेंसी नियुक्त की जाएगी। यह एजेंसी नए स्कूल भवनों के निर्माण की योजना, क्रियान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी संभालेगी। निर्माण स्थलों को पांच क्लस्टर में बांटने का उद्देश्य परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाना और अलग-अलग क्षेत्रों में काम की निगरानी को आसान बनाना है।

सुरक्षित और आधुनिक स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस

दिल्ली सरकार की यह पहल सरकारी स्कूलों में सुरक्षा, बुनियादी सुविधाओं और आधुनिक शिक्षा के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 1,090 सरकारी स्कूलों की डिजिटल प्रोफाइलिंग से तैयार डेटा का इस्तेमाल भविष्य में स्कूलों की मरम्मत, पुनर्निर्माण और विकास योजनाओं के लिए किया जा सकेगा।

27 नए स्कूल भवनों का निर्माण और 34 पुराने भवनों का पुनर्निर्माण विद्यार्थियों के लिए अधिक सुरक्षित और बेहतर सीखने का वातावरण तैयार करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। साथ ही, डिजिटल सर्वे, जीआईएस, ड्रोन और वैज्ञानिक भवन परीक्षण जैसी तकनीकों के इस्तेमाल से स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर की योजना और निगरानी को अधिक डेटा-आधारित बनाने पर जोर दिया जा रहा है।


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