इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए दिल्ली सरकार अपनी आगामी ईवी नीति 2.0 (EV Policy 2.0) के तहत एक विशेष ईवी बैटरी रिसाइक्लिंग फ्रेमवर्क लागू करने की तैयारी कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस व्यवस्था के लिए दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी (DPCC) को नोडल एजेंसी बनाने का प्रस्ताव है।
अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली की सड़कों पर बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहनों के कारण आने वाले वर्षों में बड़ी मात्रा में बैटरी वेस्ट उत्पन्न होगा। आमतौर पर एक इलेक्ट्रिक कार की बैटरी को 12–14 साल बाद बदलना पड़ता है, इसलिए बैटरियों के सुरक्षित निपटान और मटेरियल रिकवरी के लिए संगठित व्यवस्था बनाना जरूरी हो गया है।
सरकार का कहना है कि नई ईवी नीति का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के साथ-साथ इस्तेमाल हो चुकी बैटरियों के पर्यावरण सुरक्षित प्रबंधन को सुनिश्चित करना है। इसके लिए रीसाइक्लिंग सुविधाएं, बैटरी कलेक्शन नेटवर्क और कड़े नियामक प्रावधान विकसित किए जाएंगे।
दिल्ली की मौजूदा ईवी नीति अगस्त 2020 में लागू हुई थी, जिसे कई बार बढ़ाया गया है और यह इस महीने के अंत तक समाप्त होने वाली है। सरकार नई EV Policy 2.0 को दिल्ली विधानसभा के आगामी बजट सत्र के दौरान पेश कर सकती है, जो मार्च के चौथे सप्ताह में शुरू होने की संभावना है।
प्रस्तावित फ्रेमवर्क के तहत पर्यावरण विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि वाहन निर्माता कंपनियां और अन्य संबंधित संस्थाएं बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2022 (Battery Waste Management Rules, 2022) और Extended Producer Responsibility (EPR) नियमों का पालन करें। इसमें बैटरी वेस्ट की अनिवार्य रिपोर्टिंग भी शामिल होगी।
ड्राफ्ट नीति के अनुसार, दिल्ली में पब्लिक–प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत बैटरी कलेक्शन सेंटर स्थापित किए जाएंगे, जहां अधिकृत रीसाइक्लर और अन्य पात्र संस्थाएं मिलकर पुरानी ईवी बैटरियों को सुरक्षित रूप से एकत्रित और प्रोसेस करेंगी।
इसके साथ ही सरकार शहर में पब्लिक और प्राइवेट ईवी चार्जिंग स्टेशनों के नेटवर्क को भी विस्तार देने की योजना बना रही है, ताकि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को और अधिक सुलभ और सुविधाजनक बनाया जा सके।
अधिकारियों के अनुसार, डीपीसीसी बैटरी कचरे के कलेक्शन, स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट और अधिकृत रीसाइक्लर तक ट्रांसफर के लिए विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी करेगा। सरकार का फोकस ईवी प्रोत्साहन बढ़ाने, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करने और बैटरी प्रबंधन व कंपोनेंट रिकवरी के लिए मजबूत सप्लाई चेन विकसित करने पर होगा।