भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के उपयोग में वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2024-25 के बीच लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। पंजीकृत ईवी की संख्या 2019-20 में 1.74 लाख से बढ़कर 2024-25 में 19.68 लाख हो गई है।
इस विकास को और मजबूती देने के लिए भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) ने घरेलू विनिर्माण और ईवी इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए कई योजनाओं की शुरुआत की है। प्रमुख योजनाओं में शामिल हैं:
पीएलआई-ऑटो योजना: 15,09,21 को मंजूरी, बजट आवंटन 25,938 करोड़ रुपये, उन्नत ऑटोमोटिव तकनीक (AAT) उत्पादों के लिए घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा।
पीएलआई-एसीसी बैटरी योजना: 12.05.2021 को अधिसूचित, बजट 18,100 करोड़ रुपये, देश में 50 गीगावॉट संचयी बैटरी निर्माण क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य।
पीएम ई-ड्राइव योजना: 29.09.2024 को अधिसूचित, बजट 10,900 करोड़ रुपये, ई-2डब्ल्यू, ई-3डब्ल्यू, ई-एम्बुलेंस, ई-ट्रक और ई-बसों की बिक्री को प्रोत्साहित और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास।
आरईपीएम योजना: 15.12.2025 को अधिसूचित, बजट 7,280 करोड़ रुपये, भारत में 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट उत्पादन क्षमता स्थापित करना।
पीएसएम योजना: 28.10.2024 को अधिसूचित, बजट ₹3,435.33 करोड़, 38,000 से अधिक ई-बसों की तैनाती और भुगतान सुरक्षा सुनिश्चित करना।
एसपीएमईपीसीआई योजना: 15.03.2024 को अधिसूचित, ई-यात्री कारों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने के लिए न्यूनतम ₹4,150 करोड़ का निवेश आवश्यक।
एमएचआई ने कहा कि इन पहलों का उद्देश्य भारत को इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण और मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में आत्मनिर्भर बनाना, निवेश आकर्षित करना और वैश्विक ईवी बाजार में देश की स्थिति मजबूत करना है।