the-changing-direction-of-global-talent-and-the-new-path-of-future-opportunities
नेशनल एजुकेशन, एम्प्लॉयबिलिटी और एडटेक समिट 2026 का आयोजन भारत मंडपम में किया गया, जहां उद्योग जगत के नेताओं और शिक्षा विशेषज्ञों ने तेजी से बदलती दुनिया में ग्लोबल टैलेंट और रोजगार के भविष्य पर चर्चा की।
“द ग्रेट रीरूट ऑफ ग्लोबल टैलेंट एंड व्हेयर अपॉर्च्युनिटी इज़ हेडेड नेक्स्ट” विषय पर आयोजित सत्र में Leverage Edu के सीईओ अक्षय चतुर्वेदी ने Entrepreneur India के एडिटर संजीव कुमार झा के साथ बातचीत की। इस दौरान उन्होंने वैश्विक स्तर पर टैलेंट के बदलते प्रवाह और उभरते अवसरों वाले बाजारों पर विचार साझा किए।
इस कार्यक्रम के उद्घाटन संबोधन में Entrepreneur India के एडिटोरियल डायरेक्टर सचिन मार्या ने कहा कि शिक्षा, रोजगार और एडटेक की दुनिया तेजी से बदल रही है और इन तीनों क्षेत्रों के बीच मजबूत तालमेल की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि, “भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए शिक्षा प्रणाली को अधिक लचीला, नवाचार-आधारित और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप बनाना होगा।”
चर्चा के दौरान वक्ताओं ने यह भी कहा कि बदलते वैश्विक कार्यबल के साथ कदम मिलाने के लिए पारंपरिक शिक्षा मॉडल को भी बदलना जरूरी है। इसके लिए संस्थानों को व्यावहारिक कौशल, इंडस्ट्री एक्सपोज़र और तकनीक आधारित शिक्षा को अपने पाठ्यक्रम में शामिल करना होगा, ताकि छात्र नए करियर विकल्पों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि “रोजगार-केंद्रित शिक्षा भविष्य के लिए तैयार टैलेंट तैयार करने में अहम भूमिका निभाएगी।” उनका मानना है कि आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था ऐसे पेशेवरों की मांग कर रही है जो कुशल, लचीले और बदलते अंतरराष्ट्रीय अवसरों के साथ खुद को ढाल सकें।
यह समिट शिक्षा जगत, उद्योग जगत और नीति निर्माताओं के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच बना, जहां अगली पीढ़ी के वैश्विक टैलेंट को तैयार करने के लिए शिक्षा प्रणाली में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया गया।
चर्चा के दौरान वक्ताओं ने यह भी कहा कि रोजगार-केंद्रित शिक्षा (Employability-Led Learning) आने वाले समय में बेहद महत्वपूर्ण होने वाली है। केवल डिग्री हासिल करना अब पर्याप्त नहीं रह गया है। आज के समय में कंपनियां ऐसे युवाओं की तलाश कर रही हैं जिनके पास प्रैक्टिकल स्किल्स, समस्या समाधान की क्षमता, टेक्नोलॉजी की समझ और वैश्विक स्तर पर काम करने की क्षमता हो। इसलिए शिक्षा संस्थानों को अपने पाठ्यक्रम में बदलाव करते हुए छात्रों को इंटरनशिप, इंडस्ट्री प्रोजेक्ट्स, डिजिटल स्किल्स और वास्तविक कार्य अनुभव से जोड़ना होगा, ताकि वे पढ़ाई के साथ-साथ उद्योग की जरूरतों को भी समझ सकें।
समिट के दौरान यह भी जोर दिया गया कि भविष्य की अर्थव्यवस्था तेजी से वैश्विक और तकनीक आधारित बन रही है, ऐसे में युवाओं को केवल स्थानीय नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय अवसरों के लिए भी तैयार करना जरूरी है। इस मंच ने शिक्षा जगत, उद्योग जगत और नीति निर्माताओं को एक साथ लाकर इस बात पर विचार करने का अवसर दिया कि कैसे नई नीतियों, आधुनिक शिक्षा मॉडल और इंडस्ट्री सहयोग के माध्यम से अगली पीढ़ी को बेहतर अवसर दिए जा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर शिक्षा प्रणाली को समय के साथ बदला जाए और छात्रों को सही कौशल दिए जाएं, तो भारत वैश्विक टैलेंट हब के रूप में उभर सकता है।