दिल्ली के भारत मंडपम में देश के शिक्षा और एडटेक क्षेत्र के विशेषज्ञों ने National Education, Employability & EdTech Summit 2026 में इस बात पर जोर दिया कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में स्कूलों व विद्यार्थियों को केवल ज्ञान तक सीमित न रखते हुए उन्हें भविष्य के लिए तैयार, कौशल और अनुकूलन क्षमता से लैस करना होगा।
इस आयोजन का नेतृत्व सचिन मार्या, एडिटोरियल डायरेक्टर, Entrepreneur India ने उद्घाटन संबोधन में किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा, रोजगार और एडटेक की दुनिया तेजी से बदल रही है और आने वाले समय में शिक्षा प्रणाली को अधिक लचीला, नवाचार आधारित और उद्योग-सक्षम बनाना आवश्यक है।
शिक्षा का भविष्य: फ्यूचर-रेडी लर्नर्स
इस चर्चा में हरीश संडूजा, डोमिनिक टॉमलिन, देविका नाडिग और अमोल अरोड़ा सहित कई शिक्षा विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। मुख्य रूप से इस सत्र “The Future of Education: Preparing Learners for an Unpredictable World” में विशेषज्ञों ने शिक्षा प्रणाली में आवश्यक बदलाव और नए कौशल पर चर्चा की। सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने शिक्षा के बदलते स्वरूप, नई संभावनाओं और उन चुनौतियों पर चर्चा की जिनका सामना स्कूलों और शिक्षा संस्थानों को करना पड़ रहा है।
सत्र का मुख्य फोकस इस बात पर रहा कि आज की शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रह सकती। छात्रों को ऐसे कौशल सिखाने की जरूरत है जो उन्हें वास्तविक जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करें।
स्कूल बनें ‘लॉन्चपैड’
विशेषज्ञों ने कहा कि आने वाले समय में स्कूलों को केवल ज्ञान देने वाले संस्थान के बजाय छात्रों के करियर और जीवन के लिए लॉन्चपैड की भूमिका निभानी होगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा प्रणाली को इस तरह विकसित करना होगा जिससे विद्यार्थियों में रोजगार से जुड़े कौशल, अनुकूलन क्षमता और व्यावहारिक समझ विकसित हो सके।
कौशल और अनुकूलन क्षमता का महत्व
चर्चा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और नई तकनीकों के कारण रोजगार का स्वरूप भी लगातार बदल रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान देना पर्याप्त नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, विद्यार्थियों में क्रिटिकल थिंकिंग, समस्या समाधान क्षमता और डिजिटल समझ विकसित करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यही कौशल उन्हें भविष्य की अनिश्चित परिस्थितियों में सफल बना सकते हैं।
उद्योग और शिक्षा के बीच सहयोग जरूरी
सत्र में इस बात पर भी जोर दिया गया कि शिक्षा संस्थानों और उद्योग जगत के बीच मजबूत सहयोग होना चाहिए। इससे विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान ही वास्तविक अनुभव और रोजगार से जुड़े कौशल सीखने का अवसर मिल सकता है। वहीं विशेषज्ञों का मानना था कि यदि स्कूल और उद्योग एक साथ मिलकर काम करें, तो विद्यार्थियों को बेहतर करियर अवसर मिल सकते हैं और देश की अर्थव्यवस्था को भी इसका लाभ मिलेगा।
बदलते शिक्षा परिदृश्य की चुनौतियां
वक्ताओं ने यह भी कहा कि शिक्षा क्षेत्र को कई नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। तकनीक का तेजी से विकास, बदलती नौकरियां और वैश्विक प्रतिस्पर्धा शिक्षा संस्थानों के सामने नई जिम्मेदारियां खड़ी कर रही हैं। ऐसे में शिक्षकों, स्कूलों और नीति निर्माताओं को मिलकर ऐसी शिक्षा प्रणाली विकसित करनी होगी जो छात्रों को केवल परीक्षा के लिए नहीं बल्कि जीवन के लिए तैयार करे।
अतः इस चर्चा का मुख्य संदेश यह रहा कि भविष्य की दुनिया में सफलता पाने के लिए विद्यार्थियों को कौशल, रचनात्मकता और अनुकूलन क्षमता से लैस होना होगा। वहीं विशेषज्ञों का मानना था कि यदि स्कूल शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, कौशल आधारित और तकनीक समर्थित बनाते हैं, तो वे विद्यार्थियों को एक अनिश्चित लेकिन अवसरों से भरे भविष्य के लिए बेहतर तरीके से तैयार कर सकेंगे।