“Viksit Bharat 2047: Youth Entrepreneurship and Innovation Powered by Atal Incubation Centres” थीम के साथ आयोजित इस समिट में सरकारी अधिकारी, स्टार्टअप फाउंडर्स, वेंचर कैपिटलिस्ट, कॉरपोरेट लीडर्स, नीति-निर्माता और देशभर से आए सैकड़ों छात्र व उद्यमी शामिल हुए।
समिट की शुरुआत विश्वविद्यालय के कुलपति विजयशेखर चेल्लाबोइना द्वारा नेतृत्व बातचीत और कैंपस विज़िट से हुई। इसके बाद उद्घाटन समारोह और स्वागत संबोधन आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में प्रेम सिंह, प्रेसिडेंट (ग्रुप HR), जेके ऑर्गनाइजेशन ने कहा कि विश्वविद्यालय और इनक्यूबेशन सेंटर अगली पीढ़ी के इनोवेटर्स को तैयार करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
समिट का उद्घाटन भाषण इरेंद्र छाबड़ा, प्रेसिडेंट, Bharuwa Solutions ने दिया। उन्होंने बताया कि युवा उद्यमी भारत को 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य तक पहुंचाने में अहम योगदान दे सकते हैं और छात्रों को उद्यमिता को राष्ट्रीय विकास का माध्यम मानना चाहिए। उन्होंने कहा, “उद्यमी ऐसे व्यवसाय खड़े करेंगे जो लोगों तक सेवाओं की पहुंच बढ़ाएं, उन्हें सस्ता बनाएं और समाज में समावेश को मजबूत करें। जब नए स्टार्टअप समस्याओं का समाधान करते हैं, तो वे राष्ट्र निर्माण की संस्थाएं बन जाते हैं।”
इसके बाद “Atmanirbhar Bharat through Student Startups: Building Indigenous Solutions with Global Competitiveness” विषय पर एक पैनल चर्चा आयोजित की गई। पैनल चर्चा में विक्रमजीत सिंह (बजाज जनरल इंश्योरेंस), शाकुन खन्ना (SHRM), अजमेर देशवाल (डिक्सन टेक्नोलॉजीज) और राजेश शर्मा (यूनिकफार्मा) शामिल हुए।
इसके बाद कई महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किए गए। सत्या नारायणन आर, सीएल एजुकेट ने “The Entrepreneurial Mindset: Lessons from 30 Years of Edu-Venturing” विषय पर मुख्य भाषण दिया। इसके अलावा “The Founder’s Playbook for 2047” नामक फायरसाइड चैट में उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने भविष्य के स्टार्टअप के लिए जरूरी कौशल और दृष्टि पर चर्चा की।
कार्यक्रम में एक विशेष सत्र दीपन साहू द्वारा लिया गया। उन्होंने मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन इनोवेशन सेल के माध्यम से 'विकसित भारत 2047' की रूपरेखा और अगले दो दशकों में युवाओं द्वारा संचालित नवाचार की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
समिट में विभिन्न पैनल चर्चाओं, फायरसाइड चैट, क्राउड वेंचर सत्र और डेमो डे में कई उद्योग विशेषज्ञों और मेंटर्स ने भी भाग लिया। इनमें सक्षम गुप्ता, पल्लवी टाक, अंकित जैन, अमित सिंगल, अभिषेक कक्कड़, मल्हार राजीव पोटनिस, सुंदीप तिबरेवाल, कृष्ण पाल जादौन, कुणाल जैन, संतोष नायर, सक्षम सक्सेना, अमित श्रीवास्तव, जेरी जोशी, पुनीत मदान और मनोज कुमार अग्रवाल शामिल थे।
समिट का समापन “From Incubation to Independence: How Ecosystem Support Shapes the Founder’s Entrepreneurial Journey” विषय पर पैनल चर्चा के साथ हुआ। इस कार्यक्रम ने छात्रों और स्टार्टअप फाउंडर्स को अनुभवी मेंटर्स और निवेशकों से मिलने और उनसे सीखने का बेहतरीन अवसर भी दिया।
समिट के बारे में बोलते हुए कुलपति विजयशेखर चेल्लाबोइना ने कहा, “Aarohan 3.0 की सफलता हमारे उस विज़न को मजबूत करती है जिसमें हम उद्यमशील प्रतिभा को आगे बढ़ाना चाहते हैं। छात्रों और स्टार्टअप्स को उद्योग विशेषज्ञों के साथ उत्साहपूर्वक बातचीत करते देखना भारत के भविष्य के इनोवेटर्स की क्षमता को दर्शाता है।”
वहीं प्रेम सिंह, प्रेसिडेंट (ग्रुप HR), जेके ऑर्गनाइजेशन ने कहा “Aarohan 3.0 ने नए उद्यमियों को अनुभवी मेंटर्स से जोड़ने का महत्वपूर्ण काम किया है। यहां हुई चर्चाएं और विचार स्टार्टअप समुदाय पर लंबे समय तक प्रभाव डालेंगे।” उन्होंने आगे कहा कि “Aarohan जैसे मंच युवा नवाचारकों को प्रेरित करने और उनके विचारों को सफल स्टार्टअप में बदलने के लिए बेहद जरूरी हैं।”
Aarohan 3.0 ने AIC-JKLU के उस मिशन को और मजबूत किया है जिसका उद्देश्य स्टार्टअप फाउंडर्स को सशक्त बनाना, नवाचार आधारित विकास को बढ़ावा देना और भारत के तेजी से विकसित हो रहे स्टार्टअप इकोसिस्टम में सार्थक योगदान देना है।