केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के पुनर्मूल्यांकन और परीक्षोत्तर सेवाओं में आ रही तकनीकी समस्याओं को दूर करने के लिए IIT विशेषज्ञों की मदद लेने के निर्देश दिए हैं। छात्रों और अभिभावकों की लगातार बढ़ती शिकायतों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है, ताकि पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और छात्र-हितैषी बनाया जा सके।
हाल ही में सीबीएसई बोर्ड परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद कई छात्रों और अभिभावकों ने पोस्ट-रिजल्ट सर्विस पोर्टल पर तकनीकी दिक्कतों की शिकायत की थी। कई छात्रों को लॉगिन, आवेदन जमा करने और भुगतान प्रक्रिया के दौरान समस्याओं का सामना करना पड़ा। इसके बाद शिक्षा मंत्रालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने का निर्णय लिया।
IIT मद्रास और IIT कानपुर की टीम करेगी तकनीकी जांच
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मद्रास और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कानपुर के प्रोफेसरों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम सीबीएसई की सहायता करेगी। यह टीम इस वर्ष पुनर्मूल्यांकन सेवाएं शुरू होने के बाद सामने आई सभी तकनीकी खामियों की विस्तृत जांच करेगी।
विशेषज्ञों की टीम पोर्टल की स्थिरता, सर्वर की क्षमता और पूरे आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती का आकलन करेगी। साथ ही लॉगिन ऑथेंटिकेशन सिस्टम, यूजर एक्सेस मैकेनिज्म और पेमेंट गेटवे की कार्यप्रणाली की भी जांच की जाएगी, ताकि छात्रों को आवेदन प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो।
पेमेंट गेटवे सिस्टम में भी होगा बड़ा सुधार
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने इस मुद्दे को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ भी चर्चा की। बैठक के बाद फैसला लिया गया कि चार बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक और इंडियन बैंक सीबीएसई के पेमेंट गेटवे सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करेंगे।
इन बैंकों की सहायता से मजबूत पेमेंट प्रोटोकॉल तैयार किए जाएंगे, जिससे भुगतान प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और तेज हो सके। साथ ही पेमेंट फेल होने की स्थिति में त्वरित समाधान और अतिरिक्त भुगतान की स्थिति में ऑटोमैटिक रिफंड जैसी सुविधाओं को भी बेहतर बनाया जाएगा।
छात्रों के हित को प्राथमिकता देने पर जोर
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि छात्रों का हित सर्वोपरि है और सीबीएसई को सभी जरूरी सुधार जल्द से जल्द लागू करने चाहिए। उन्होंने बोर्ड को निर्देश दिया कि पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, कुशल और तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जाए, ताकि भविष्य में छात्रों और अभिभावकों को किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।
विशेषज्ञों का मानना है कि IIT संस्थानों और सरकारी बैंकों की मदद से सीबीएसई का डिजिटल सिस्टम पहले से अधिक मजबूत और विश्वसनीय बन सकता है। इससे लाखों छात्रों को ऑनलाइन सेवाओं का बेहतर अनुभव मिलेगा और बोर्ड की परीक्षोत्तर प्रक्रियाएं अधिक व्यवस्थित और आसान हो सकेंगी।