भारत सरकार ने अपने 1 लाख करोड़ रुपये के रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (RDI) स्कीम के तहत फंड जारी करना शुरू कर दिया है। इस योजना के पहले लाभार्थियों के रूप में पांच डीप-टेक स्टार्टअप्स को चुना गया है। टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB) ने 13 मई को शुरुआती समझौतों पर हस्ताक्षर किए और फंडिंग की पहली किस्त जारी की। इसे निजी क्षेत्र में इनोवेशन को बढ़ावा देने वाली इस बड़ी योजना का महत्वपूर्ण शुरुआती कदम माना जा रहा है।
पहले चरण में ध्रुवा स्पेस, एंड्योर एयर सिस्टम्स, ETRNL एनर्जी, नॉकार्क रोबोटिक्स और IISTEM रिसर्च को शामिल किया गया है। नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने बेंगलुरु में स्थित IISTEM रिसर्च को 50 करोड़ रुपये की पहली राशि इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर के जरिए जारी की।
अधिकारियों के अनुसार, यह पहल उन भारतीय स्टार्टअप्स के लिए बड़ी राहत है, जिन्हें एडवांस टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट्स के लिए लंबे समय से फंडिंग की कमी का सामना करना पड़ रहा था। यह स्कीम खासतौर पर उन कंपनियों की मदद के लिए बनाई गई है, जो प्रोटोटाइप से प्रोडक्ट डेवलपमेंट के चरण में काम कर रही हैं।
जुलाई 2025 में मंजूर और उसी साल नवंबर में लॉन्च की गई इस आरडीआई स्कीम के तहत छह वर्षों में 1 लाख करोड़ रुपये निवेश करने का लक्ष्य रखा गया है। यह योजना उभरते और रणनीतिक सेक्टर्स में काम कर रही निजी कंपनियों को समर्थन देगी। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इसमें 20,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। यह फंड अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के तहत संचालित होगा, जबकि टीडीबी और BIRAC सेकंड-लेवल फंड मैनेजर के रूप में काम करेंगे।
पारंपरिक ग्रांट मॉडल से अलग, इस योजना में कंपनियों को कम ब्याज दर वाले लोन, इक्विटी निवेश या दोनों के मिश्रण के रूप में फंडिंग दी जाएगी। लोन पर ब्याज दर 3% से 4% के बीच होगी और इसे चुकाने के लिए 15 साल तक का समय मिलेगा। टीडीबी के सचिव राजेश कुमार पाठक के अनुसार, पहले चरण में 124 प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनकी कुल मांग 25,000 करोड़ रुपये से अधिक थी।
चयनित कंपनियों में ध्रुवा स्पेस को सैटेलाइट प्लेटफॉर्म प्रोजेक्ट के लिए 105 करोड़ रुपये मिले हैं। वहीं एंड्योर एयर सिस्टम्स लॉजिस्टिक्स और रक्षा उपयोग के लिए बिना पायलट वाला हेलीकॉप्टर विकसित कर रही है। ईटीआरएनएल एनर्जी एडवांस लिथियम-आयन बैटरी सेल्स पर काम कर रही है, जबकि नॉकार्क रोबोटिक्स पोर्टेबल आईसीयू-ग्रेड लाइफ सपोर्ट सिस्टम तैयार कर रही है।
यह योजना रिवॉल्विंग फंड मॉडल पर आधारित है, यानी कंपनियों से वापस आने वाली राशि को भविष्य की नई परियोजनाओं में दोबारा निवेश किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि इससे आने वाले वर्षों में भारत के डीप-टेक इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी और निजी निवेश भी बढ़ेगा।