दिल्ली NCR के स्टार्टअप इकोसिस्टम में 2026 की पहली तिमाही (जनवरी- मार्च) के दौरान निवेश गतिविधियों में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। Tracxn की रिपोर्ट “Delhi NCR Tech Quarterly Funding Report - Q1 2026” के अनुसार, क्षेत्र के स्टार्टअप्स ने इस दौरान कुल 1.7 बिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई। यह आंकड़ा Q4 2025 में जुटाए गए 523 मिलियन डॉलर की तुलना में 220 प्रतिशत अधिक रहा, हालांकि Q1 2025 के 1.9 बिलियन डॉलर की तुलना में इसमें 11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि निवेशकों का भरोसा फिर से बढ़ रहा है, लेकिन वे अब अधिक सतर्कता के साथ केवल मजबूत ग्रोथ क्षमता वाले सेक्टर्स में निवेश कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, सीड-स्टेज स्टार्टअप्स ने Q1 2026 में 147 मिलियन डॉलर जुटाए, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 137 प्रतिशत अधिक है। वहीं अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स को 362 मिलियन डॉलर की फंडिंग मिली, जो Q4 2025 की तुलना में 63 प्रतिशत ज्यादा रही। लेट-स्टेज फंडिंग में सबसे बड़ा उछाल देखने को मिला, जहां निवेश 239 मिलियन डॉलर से बढ़कर 1.2 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि यह आंकड़ा पिछले साल की समान अवधि की तुलना में थोड़ा कम रहा।
इस तिमाही में 100 मिलियन डॉलर से अधिक के तीन बड़े निवेश सौदे भी हुए। इनमें Nxtra ने 710 मिलियन डॉलर, Inox Clean Energy ने 344 मिलियन डॉलर और Wingify ने 150 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई। ये निवेश मुख्य रूप से एंटरप्राइज इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लीन एनर्जी और एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी सेक्टर्स में केंद्रित रहे। सेक्टर के हिसाब से एंटरप्राइज इंफ्रास्ट्रक्चर सबसे आगे रहा, जहां 869.1 मिलियन डॉलर का निवेश दर्ज किया गया। वहीं एनवायरनमेंट टेक्नोलॉजी सेक्टर में 434 मिलियन डॉलर और एंटरप्राइज एप्लिकेशन सेक्टर में 243 मिलियन डॉलर की फंडिंग हुई।
हालांकि प्राइवेट फंडिंग में सुधार देखने को मिला, लेकिन IPO गतिविधियां धीमी रहीं। इस तिमाही में केवल Novus Loyalty ने पब्लिक लिस्टिंग की, जबकि पिछली तिमाहियों में अधिक कंपनियां IPO लेकर आई थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा बाजार परिस्थितियों को देखते हुए कंपनियां अभी पब्लिक मार्केट में उतरने को लेकर सतर्क बनी हुई हैं।
वहीं विलय और अधिग्रहण (M&A) गतिविधियों में स्थिरता देखने को मिली। Q1 2026 में कुल 9 अधिग्रहण सौदे हुए। इनमें सबसे बड़ा सौदा Polymarket द्वारा Brahma का 1.2 बिलियन डॉलर में अधिग्रहण रहा, जबकि Cars24 ने CarInfo का 44.4 मिलियन डॉलर में अधिग्रहण किया। इससे यह संकेत मिलता है कि स्टार्टअप इकोसिस्टम में कंसोलिडेशन की प्रक्रिया लगातार जारी है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि इस तिमाही में कोई नया यूनिकॉर्न सामने नहीं आया। इससे संकेत मिलता है कि फंडिंग में सुधार के बावजूद हाई-वैल्यूएशन ग्रोथ की रफ्तार अभी धीमी बनी हुई है। भौगोलिक रूप से गुरुग्राम आधारित स्टार्टअप्स ने कुल फंडिंग का 52 प्रतिशत हिस्सा हासिल किया, जबकि नोएडा की हिस्सेदारी 27 प्रतिशत रही।
निवेशकों की बात करें तो सीड-स्टेज निवेश में Inflection Point Ventures, India Accelerator और Venture Catalysts सक्रिय रहे। वहीं अर्ली-स्टेज में Peak XV Partners, Saama और Bain Capital Ventures ने महत्वपूर्ण निवेश किए। लेट-स्टेज फंडिंग में Orbimed, Blume Ventures और Swedfund जैसे निवेशकों की मजबूत भागीदारी देखने को मिली।
विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली NCR भारत के सबसे बड़े स्टार्टअप और टेक्नोलॉजी हब्स में अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए है। आने वाले समय में AI, क्लीन टेक, इंफ्रास्ट्रक्चर और एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी आधारित स्टार्टअप्स में निवेश और तेजी से बढ़ सकता है।