यूनियन बजट 2026 से FMCG सेक्टर को ग्रोथ और जीएसटी राहत की उम्मीद

यूनियन बजट 2026 से FMCG सेक्टर को ग्रोथ और जीएसटी राहत की उम्मीद

यूनियन बजट 2026 से FMCG सेक्टर को ग्रोथ और जीएसटी राहत की उम्मीद
यूनियन बजट 2026 से पहले FMCG उद्योग ने खपत बढ़ाने, जीएसटी युक्तिकरण और कोल्ड-चेन व लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की मांग की है।

यूनियन बजट 2026 से पहले एफएमसीजी (FMCG) उद्योग के प्रमुख विकास को गति देने वाले और साथ ही राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने वाले बजट की उम्मीद कर रहे हैं। वर्ष 2025 ने भारत की मजबूत उपभोक्ता मांग (कंजम्पशन स्टोरी) की पुष्टि की, हालांकि कुछ अस्थायी चुनौतियां भी सामने आईं। 2026 में प्रवेश करते हुए यह सेक्टर स्पष्ट रणनीति, अनुकूल परिस्थितियों और निवेश के बेहतर अवसरों के साथ आगे बढ़ रहा है।

जहां जीएसटी मोर्चे पर सरकार के समर्थन का उद्योग ने स्वागत किया है, वहीं कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने के लिए नीति स्तर पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता बताई जा रही है। कमजोर ग्रामीण लॉजिस्टिक्स और अपर्याप्त कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं अब भी FMCG उत्पादों की ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच में बाधा बनी हुई हैं।

डेयरी सेक्टर को भारत की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए मिल्की मिस्ट डेयरी फूड लिमिटेड के होल टाइम डायरेक्टर और सीईओ डॉ. के. रथनाम ने कहा कि यूनियन बजट 2026 इस महत्वपूर्ण सेक्टर के अगले विकास चरण को तेज करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने पैकेजिंग मटीरियल, रेफ्रिजरेशन इक्विपमेंट, एनिमल फीड और वेटरनरी सर्विसेज जैसे इनपुट्स पर जीएसटी के और युक्तिकरण की जरूरत पर जोर दिया, जिससे लागत दबाव कम होगा और वैल्यू चेन की दक्षता बढ़ेगी।

उन्होंने आगे कहा कि वैल्यू-एडेड डेयरी उत्पादों, ऑटोमेशन, एडवांस क्वालिटी टेस्टिंग लैब्स और सस्टेनेबिलिटी पहलों के लिए प्रोत्साहन से निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और संगठित डेयरी सेक्टर वैश्विक मानकों के अनुरूप आगे बढ़ सकेगा।

वहीं, भारत का रिटेल और कंज्यूमर सेक्टर तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है। घरेलू खपत, डिजिटल अपनाने, प्रीमियमाइजेशन और ई-कॉमर्स ग्रोथ के चलते यह सेक्टर मजबूत बना हुआ है। डेलॉइट की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में 1.06 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का यह सेक्टर 2030 तक करीब 1.93 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना है, जिसमें लगभग 10 प्रतिशत की सीएजीआर रहने का अनुमान है।

हालांकि जीएसटी रेशनलाइजेशन से राहत मिली है, लेकिन होम केयर जैसे बड़े मास-कंजम्पशन FMCG कैटेगरी पर अब भी 18 प्रतिशत जीएसटी लागू है। गॉडरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (GCPL) के एमडी और सीईओ सुधीर सीतापति ने कहा कि बजट से उनकी मुख्य अपेक्षा उपभोग को बढ़ावा देने वाले उपायों की है, खासकर जीएसटी दरों में और युक्तिकरण के जरिए। उन्होंने सुझाव दिया कि 18 प्रतिशत टैक्स वाली कुछ श्रेणियों को 5 प्रतिशत के निचले स्लैब में लाया जा सकता है, जिससे मांग को समर्थन मिलेगा।

स्वास्थ्यवर्धक और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों की बढ़ती मांग के बावजूद, उच्च उत्पादन लागत और सीमित टैक्स सपोर्ट के कारण इनकी किफायती उपलब्धता चुनौती बनी हुई है। भारत की पाम ऑयल पर भारी निर्भरता और पारंपरिक पैकेजिंग मटीरियल पर्यावरण व स्वास्थ्य दोनों के लिए जोखिम पैदा करते हैं। इस संदर्भ में डेलॉइट के पार्टनर आनंद रामनाथन ने कम-शुगर फॉर्मुलेशन, वैकल्पिक तेलों और बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग के लिए आरएंडडी पर लक्षित टैक्स इंसेंटिव, टैक्स हॉलिडे और सेक्शन 35(2AB) के तहत वेटेड डिडक्शन देने का सुझाव दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि पीएम गति शक्ति पहल के तहत एक समर्पित ग्रामीण FMCG इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, ग्रामीण कोल्ड-चेन के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग और भारतनेट के साथ लॉजिस्टिक्स इंटीग्रेशन से लॉजिस्टिक्स लागत घटाई जा सकती है, जो फिलहाल जीडीपी का लगभग 14 प्रतिशत है।

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि कम खुदरा कीमतें न केवल खपत बढ़ाएंगी, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार और ग्रामीण क्षेत्रों में नए रोजगार अवसर भी पैदा करेंगी। बढ़ती क्रय शक्ति, खासकर जेन जेड की अनुमानित 250 अरब डॉलर की खर्च क्षमता, भारत को एक मजबूत उपभोग बाजार के साथ-साथ वैश्विक FMCG निर्यात हब के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभा रही है।

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