फ्यूचर ऑफ इंडिया फाउंडेशन ने जीआईटीएएम विशाखापत्तनम में आयोजित विजाग फ्यूचररेडी फॉर विकसित भारत 2047 कार्यक्रम के दौरान आंध्र प्रदेश स्टेट हैंडबुक ऑफ यूथ अपॉर्च्युनिटी लॉन्च किया। इस कार्यक्रम में सरकार, शिक्षा, स्किलिंग और इंडस्ट्री से जुड़े नेताओं ने हिस्सा लिया और आंध्र प्रदेश के अलग-अलग जिलों में युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए रणनीतियों पर चर्चा की।
यह हैंडबुक आंध्र प्रदेश के सभी 26 जिलों में युवाओं के अवसरों का जिला-स्तरीय आकलन प्रस्तुत करता है। यह यूथपावर डॉट इन पर आधारित है, जो फाउंडेशन का जिला-स्तरीय यूथ अपॉर्च्युनिटी प्लेटफॉर्म है। इसमें 27 सरकारी डेटाबेस से करीब 180 इंडिकेटर्स को पांच प्रमुख क्षेत्रों पार्टिसिपेशन, अपॉर्च्युनिटी, वर्क, एजुकेशन और रेडीनेस (स्किलिंग) के आधार पर शामिल किया गया है।
शिक्षा में प्रगति, रोजगार से मजबूत कनेक्शन की जरूरत
रिपोर्ट में बताया गया है कि आंध्र प्रदेश ने शिक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर, बैंकिंग और डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में प्रगति की है, खासकर युवा महिलाओं के बीच। राज्य के स्कूलों में सुविधाएं अपेक्षाकृत बेहतर हैं और ज्यादा युवा अब हायर एजुकेशन की ओर बढ़ रहे हैं।
हालांकि, हैंडबुक शिक्षा में हुई प्रगति और रोजगार के नतीजों के बीच लगातार बने हुए अंतर को भी सामने लाता है। रिपोर्ट के अनुसार, 46.4 प्रतिशत युवा लेबर फोर्स में हैं, जबकि यूथ अनएम्प्लॉयमेंट 16.2 प्रतिशत है। वहीं, 28.4 प्रतिशत युवा न तो काम कर रहे हैं, न शिक्षा या ट्रेनिंग में हैं। युवा महिलाओं की लेबर-फोर्स पार्टिसिपेशन 29.7 प्रतिशत है।
राज्य का ओवरऑल यूथपावर स्कोर 45.3 है। इसमें एजुकेशन का स्कोर 57, वर्क का 37 और रेडीनेस का 41 है। ये आंकड़े शिक्षा, स्किल्स और रोजगार के बीच मजबूत कनेक्शन बनाने की जरूरत को दिखाते हैं।
पिछले आठ वर्षों में आंध्र प्रदेश में युवाओं के रोजगार के पैटर्न में भी बदलाव आया है। इसमें कृषि से जुड़े कामों से युवाओं का रुझान सर्विसेज, ट्रेड, हॉस्पिटैलिटी और कंस्ट्रक्शन की ओर बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रोथ के अगले फेज में ज्यादा सुरक्षित और बेहतर वैल्यू वाली नौकरियां पैदा करने पर फोकस करना जरूरी होगा।
शिक्षा, स्किल्स और इंडस्ट्री कनेक्ट को मजबूत करने की जरूरत
विशाखापत्तनम के सांसद और जीआईटीएएम के अध्यक्ष एम. श्रीभरत ने शिक्षा, स्किलिंग और इंडस्ट्री के बीच मजबूत कनेक्शन की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटीज और स्किलिंग इंस्टीट्यूशंस को स्थानीय इंडस्ट्री की जरूरतों को समझना चाहिए, जबकि एम्प्लॉयर्स को यह स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए कि जरूरी टैलेंट कहां तैयार किया जा रहा है।
हैंडबुक में आंध्र प्रदेश के लिए तीन प्रमुख प्राथमिकताएं बताई गई हैं- एंटरप्राइज और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देना, युवाओं को काम और एंटरप्रेन्योरशिप के लिए तैयार करना और जिला-स्तरीय गवर्नेंस में यूथ आउटकम्स को केंद्र में रखना। रिपोर्ट में एम्प्लॉयर्स, एजुकेशनल और स्किलिंग इंस्टीट्यूशंस तथा जिला प्रशासन के बीच बेहतर सहयोग की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही पैदा होने वाली नौकरियों की गुणवत्ता और उनके स्वरूप को बेहतर तरीके से ट्रैक करने पर भी जोर दिया गया है।
रिपोर्ट में पोर्ट्स, लॉजिस्टिक्स, एक्वाकल्चर, टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी जैसे सेक्टर्स की पहचान की गई है, जहां आंध्र प्रदेश युवाओं के लिए ज्यादा वैल्यू वाले अवसर तैयार कर सकता है। इसमें स्थानीय स्तर पर ग्रोथ की क्षमता रखने वाले एंटरप्राइजेज की पहचान कर उन्हें क्रेडिट, मार्केट, स्किल्स और टैलेंट से जोड़ने की सिफारिश की गई है।
जिला-स्तरीय डेटा से यूथ-केंद्रित गवर्नेंस को बढ़ावा
फ्यूचर ऑफ इंडिया फाउंडेशन की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रुचि गुप्ता ने विशाखापत्तनम के सांसद मथुकुमिल्ली श्रीभरत की जिला-स्तर पर इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए सराहना की। उन्होंने यूथ आउटकम्स को बेहतर बनाने के लिए राज्य की पॉलिसीज और जिला-स्तरीय कार्रवाई को प्रभावी बनाने में निर्वाचित प्रतिनिधियों और स्थानीय नेतृत्व की भूमिका पर जोर दिया।
सीएल एजुकेट लिमिटेड के फाउंडर और चेयरमैन सत्य नारायणन आर. ने युवाओं को अवसरों से जोड़ने में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि येलोडॉट्स डॉट एआई को इस उद्देश्य से तैयार किया गया है कि काम की तलाश कर रहे युवाओं और खास स्किल्स की तलाश कर रहे एम्प्लॉयर्स के बीच के अंतर को कम किया जा सके, भले ही दोनों एक ही क्षेत्र में मौजूद हों।
कार्यक्रम में टैलेंट और अवसरों की जिला-स्तरीय स्थिति को लगातार अपडेट रखने की जरूरत पर भी चर्चा हुई। इसमें यह समझना शामिल है कि एम्प्लॉयर्स को किन स्किल्स की जरूरत है, युवा क्या चाहते हैं, संस्थान क्या पढ़ा रहे हैं और कहां नए गैप सामने आ रहे हैं। प्रतिभागियों ने कहा कि ऐसी जानकारी को लगातार अपडेट रखने से यूनिवर्सिटीज, स्किलिंग इंस्टीट्यूशंस, एम्प्लॉयर्स और सरकारी एजेंसियां स्थानीय जरूरतों में बदलाव के अनुसार तेजी से प्रतिक्रिया दे सकती हैं।
विशाखापत्तनम का यूथपावर स्कोर सबसे ज्यादा
विशाखापत्तनम ने आंध्र प्रदेश में 55 का सबसे ज्यादा यूथपावर स्कोर दर्ज किया। जिले ने रोजगार से जुड़े इंडिकेटर्स में बेहतर प्रदर्शन किया है। यहां 60 प्रतिशत वर्कर्स रेगुलर सैलरी वाली नौकरियों में हैं, जबकि सामान्य जिले में यह आंकड़ा 21 प्रतिशत है।
जिले में प्रति वर्कर वैल्यू एडेड करीब 1.79 लाख रुपये है, जबकि सामान्य जिले में यह करीब 1.42 लाख रुपये है। शिक्षा से जुड़े इंडिकेटर्स भी अपेक्षाकृत मजबूत हैं। 15 से 21 वर्ष की सिर्फ 15 प्रतिशत युवा महिलाएं शिक्षा से बाहर हैं, जबकि सामान्य जिले में यह आंकड़ा 33 प्रतिशत है। इसके अलावा, कक्षा 9 के 41 प्रतिशत छात्र गणित में अपने ग्रेड के स्तर तक पहुंचते हैं, जबकि सामान्य जिले में यह आंकड़ा 35 प्रतिशत है।
हैंडबुक को सरकार, हायर एजुकेशन, स्किलिंग और इंडस्ट्री से जुड़े प्रतिनिधियों की मौजूदगी में औपचारिक रूप से लॉन्च किया गया। कार्यक्रम में विजाग और आंध्र प्रदेश यूथपावर तथा फ्यूचररेडीनेस रोडमैप पर एक पैनल डिस्कशन भी आयोजित किया गया।
पैनल में आंध्र यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर प्रो. जी.पी. राजा शेखर, सीडैप के सीईओ पी. नारायण स्वामी, जीआईटीएएम स्कूल ऑफ बिजनेस के डीन राजा पी. पप्पू, सेंचुरियन यूनिवर्सिटी, विजयनगरम के डीन और रजिस्ट्रार प्रो. के.वी. रवि कुमार तथा एकस्टेप फाउंडेशन के स्टार्टअप एंड कम्युनिकेशंस स्ट्रैटेजी लीड प्रणय वीके शामिल थे। चर्चा का संचालन करियर लॉन्चर / टैलइवेट की सीईओ सुजाता क्षीरसागर ने किया।
येलो डॉट्स प्लेटफॉर्म का भी किया गया प्रदर्शन
कार्यक्रम में येलो डॉट्स का शुरुआती डेमोंस्ट्रेशन भी किया गया। यह युवाओं के अवसरों पर केंद्रित एक डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पहल है। ओपन और इंटरऑपेरेबल सिद्धांतों पर तैयार यह प्लेटफॉर्म छात्रों, शिक्षकों, स्किलिंग प्रोवाइडर्स, एम्प्लॉयर्स और स्टार्टअप्स को लर्निंग, इंटर्नशिप, जॉब्स, मेंटरिंग और एंटरप्रेन्योरशिप से जुड़े अवसरों से जोड़ने का लक्ष्य रखता है।
विशाखापत्तनम उन शुरुआती स्थानों में शामिल है, जहां इस प्लेटफॉर्म का टेस्ट किया जा रहा है। प्रतिभागियों को अपनी प्रोफाइल बनाने और यह देखने के लिए आमंत्रित किया गया कि सिस्टम किस तरह स्थानीय टैलेंट और अवसरों को ज्यादा दिखाई देने योग्य बना सकता है।
एम. श्रीभरत ने कहा कि जिला अर्थव्यवस्था के दोनों पक्षों की एक गतिशील तस्वीर होना जरूरी है युवा क्या सीख रहे हैं और क्या चाहते हैं, तथा एम्प्लॉयर्स को किन चीजों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस जानकारी को लगातार लाइव और आसानी से उपलब्ध रखने से यूनिवर्सिटीज, स्किलिंग इंस्टीट्यूशंस और इंडस्ट्री बदलती जरूरतों के अनुसार तेजी से प्रतिक्रिया दे सकते हैं।