GARC को EV और ADAS टेस्टिंग के लिए 221 करोड़ रुपये मिले

GARC को EV और ADAS टेस्टिंग के लिए 221 करोड़ रुपये मिले

GARC को EV और ADAS टेस्टिंग के लिए 221 करोड़ रुपये मिले
पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत चेन्नई स्थित GARC में ईवी, बैटरी, एडीएएस और क्रैश टेस्टिंग सुविधाओं को अपग्रेड किया जा रहा है, जिसके लिए सरकार ने 221.13 करोड़ आवंटित किए हैं।

ग्लोबल ऑटोमोटिव रिसर्च सेंटर (GARC) में ऑटोमोटिव टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड किया जा रहा है। यह विस्तार भारत सरकार की PM Electric Drive Revolution in Innovative Vehicle Enhancement (PM E-DRIVE) योजना के तहत किया जा रहा है। नई सुविधाओं में इलेक्ट्रिक व्हीकल, बैटरी, एडवांस्ड सेफ्टी सिस्टम और नई ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी की टेस्टिंग शामिल होगी।

GARC, Ministry of Heavy Industries के National Automotive Board के तहत काम करता है और केंद्रीय मोटर वाहन नियम के नियम 126 के तहत अधिकृत टेस्टिंग एजेंसी है। मौजूदा समय में सेंटर पावरट्रेन, एमिशन, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कम्पैटिबिलिटी (EMC), फैटिग, इलेक्ट्रिक व्हीकल और सेफ्टी टेस्टिंग सहित व्हीकल और कंपोनेंट टेस्टिंग, R&D, होमोलोगेशन और सर्टिफिकेशन की सुविधाएं उपलब्ध कराता है।

सरकार ने GARC में इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड के लिए ₹221.13 करोड़ आवंटित किए हैं। प्रस्तावित उपकरणों में से लगभग सभी के लिए खरीद ऑर्डर जारी किए जा चुके हैं। PM E-DRIVE योजना का कुल बजट ₹10,900 करोड़ है, जिसमें टेस्टिंग एजेंसियों के अपग्रेड के लिए ₹780 करोड़ निर्धारित किए गए हैं। यह योजना 31 मार्च 2028 तक लागू है।

अपग्रेड के तहत GARC में AIS-156 मानकों के अनुरूप इलेक्ट्रिक व्हीकल और EV बैटरी टेस्टिंग सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इसके अलावा AIS-004 Part 3 Rev.1 के तहत EV इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस (EMI) और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कम्पैटिबिलिटी (EMC) टेस्टिंग की सुविधा भी जोड़ी जा रही है।

GARC में हेवी कमर्शियल व्हीकल टेस्टिंग फैसिलिटी स्थापित करने के साथ पावरट्रेन लैब को भी अपग्रेड किया जा रहा है। इसके अलावा, पैसिव सेफ्टी टेस्टिंग के लिए एडवांस्ड उपकरण, डमी और डमी कैलिब्रेशन सिस्टम, ADAS टेस्टिंग उपकरण और सॉफ्ट टारगेट्स जोड़े जा रहे हैं। ऑटोमोटिव कंपोनेंट टेस्टिंग की सुविधाओं को भी स्थापित और अपग्रेड किया जा रहा है।

खरीदे गए उपकरणों की इंस्टॉलेशन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इनमें एक हाई-स्पीड और हाई-रिजॉल्यूशन इमेजिंग सिस्टम भी शामिल है, जिसमें UHD-4K कैमरे 750 फ्रेम प्रति सेकंड (fps) तक रिकॉर्डिंग कर सकते हैं। वहीं, Full HD मोड में यह सिस्टम 3,000 fps तक रिकॉर्डिंग करने में सक्षम है।

इस इमेजिंग सिस्टम का इस्तेमाल फ्रंटल, साइड और रियर क्रैश टेस्ट के दौरान वाहन के डिफॉर्मेशन, यात्रियों की मूवमेंट और एयरबैग डिप्लॉयमेंट को रिकॉर्ड करने के लिए किया जाएगा। इससे प्राप्त वीडियो फुटेज का इस्तेमाल सेफ्टी एनालिसिस और होमोलोगेशन गतिविधियों में किया जाएगा।

पीएम ई-ड्राइव (PM E-DRIVE) के तहत GARC में विकसित किया जा रहा इंफ्रास्ट्रक्चर भारत में ईवी, बैटरी, एडवांस्ड सेफ्टी सिस्टम, ADAS, हेवी कमर्शियल व्हीकल और अन्य नई ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी की घरेलू टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन क्षमता को बढ़ाने में मदद करेगा। इससे GARC की इलेक्ट्रिफिकेशन, व्हीकल सेफ्टी और एडवांस्ड ऑटोमोटिव सिस्टम के लिए टेस्टिंग और रिसर्च सेंटर के रूप में भूमिका भी मजबूत होगी।

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