Apple ने भारत को अपनी वैश्विक सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बना लिया है, क्योंकि कंपनी ने यहां iPhone निर्माण क्षमता को तेजी से बढ़ाया है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में Apple के वैश्विक उत्पादन का लगभग 25 प्रतिशत iPhone भारत में बनाया गया।
नील शाह, को-फाउंडर, Counterpoint Research ने कहा कि आदर्श स्थिति में भारत को 2027 के अंत तक वैश्विक iPhone उत्पादन में कम से कम 35% हिस्सेदारी हासिल करने का लक्ष्य रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि पर्याप्त उत्पादन क्षमता विकसित की जाए और कंपोनेंट इकोसिस्टम को मजबूत किया जाए तो यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
भारत अब Apple की सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग विविधीकरण रणनीति के लिए एक प्रमुख डेस्टिनेशन बन गया है। नील शाह के अनुसार, अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के कारण पिछले साल चीन की तुलना में अमेरिका के लिए भारत से iPhone निर्माण और निर्यात में तेजी आई है। यह रफ्तार आगे भी जारी रहने की उम्मीद है क्योंकि Apple अपने मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर्स के आसपास एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार कर रहा है।
कुछ साल पहले Apple ने अपने कुछ डिवाइसों का असेंबली कार्य भारत और वियतनाम में शुरू किया था, ताकि चीन पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम किया जा सके।
JPMorgan की 2022 की एक रिपोर्ट में विश्लेषकों ने कहा था कि Apple 2025 तक अपने कुल iPhone उत्पादन का 25 प्रतिशत भारत में बनाने की दिशा में काम करेगा। वहीं वियतनाम को iPad और Apple Watch के लगभग 20 प्रतिशत उत्पादन में योगदान देने की उम्मीद जताई गई थी।
पिछले वर्ष दुनिया भर में बने लगभग 220 से 230 मिलियन iPhones में से करीब 55 मिलियन iPhones भारत में बनाए गए। Apple ने पिछले साल सितंबर में लॉन्च से पहले ही iPhone 17 की पूरी लाइनअप का निर्माण भारत में शुरू कर दिया था। हालांकि अभी भी अधिकांश iPhones का उत्पादन चीन में होता है, लेकिन 2025 में चीन से भेजे जाने वाले उत्पादों पर लगे टैरिफ के कारण Apple और उसके सप्लायर्स ने अन्य विकल्प तलाशने शुरू किए और भारत एक अहम विकल्प बनकर उभरा।
हालांकि चीन के पास अभी भी मजबूत सप्लाई चेन है, जिसमें कंपोनेंट और उपकरणों का बड़ा नेटवर्क शामिल है, जिससे अधिकांश Apple उत्पादों का निर्माण होता है। नील शाह के अनुसार, भारत ने भी वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को तेजी से बढ़ाया है और सपोर्ट इकोसिस्टम भी मजबूत हो रहा है। उन्होंने कहा कि Production-Linked Incentive (PLI) योजना का समर्थन उत्पादन से लेकर निर्यात तक जारी रहना चाहिए, ताकि भारत लागत के मामले में प्रतिस्पर्धी बना रहे।
iPhone 17 सीरीज की मजबूत मांग के कारण Apple चीन के बाजार में भी साल-दर-साल वृद्धि हासिल करने वाला प्रमुख ब्रांड बना। रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2026 में चीन में Apple की बाजार हिस्सेदारी पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक स्तर पर पहुंच गई। यह वृद्धि iPhone 17 सीरीज पर दी गई कीमत में कटौती और संभावित आगे के मूल्य समायोजन से भी जुड़ी रही।
मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, अब दुनिया में बनने वाले हर चार iPhones में से एक iPhone भारत में बन रहा है। इस तरह भारत, चीन के बाद Apple का दूसरा सबसे बड़ा iPhone निर्माण केंद्र बन चुका है। यदि सरकारी प्रोत्साहन जारी रहे तो आने वाले वर्षों में भारत की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत से भी अधिक हो सकती है।
हालांकि इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली और कंपोनेंट निर्माण की लागत अभी भी भारत में चीन और वियतनाम जैसे देशों की तुलना में अधिक है। फिर भी भारत सरकार इस अंतर को कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में Electronics Component Manufacturing Scheme (ECMS) के तहत हाल ही में 41,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश को मंजूरी दी गई है, ताकि देश में स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिल सके।
मार्च 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस योजना को 22,919 करोड़ रुपये के बजट के साथ मंजूरी दी थी। यह पहल सरकार के उस बड़े लक्ष्य का हिस्सा है, जिसके तहत 2030–31 तक भारत में 500 अरब डॉलर का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
भारत की Production-Linked Incentive (PLI) योजना के तहत वैश्विक निर्माताओं को सब्सिडी और टैक्स में छूट दी गई। Apple के कॉन्ट्रैक्ट पार्टनर Foxconn, Pegatron और Wistron ने इस योजना के तहत तमिलनाडु और कर्नाटक में अपने ऑपरेशन तेजी से बढ़ाए, जो भारत में iPhone निर्माण की वृद्धि के प्रमुख कारणों में से एक रहा है।