साल 2025 में कर्नाटक के टेक स्टार्टअप इकोसिस्टम में फंडिंग के रुझान में साफ बदलाव देखने को मिला। निवेशकों ने बड़े और लेट-स्टेज निवेश से दूरी बनाते हुए नए और शुरुआती स्टार्टअप्स पर ज्यादा ध्यान दिया।
साल 2025 में कुल फंडिंग 3.8 अरब डॉलर रही, जो 2024 की तुलना में 28 प्रतिशत कम है। वहीं, डील्स की संख्या में भी 27 प्रतिशत की गिरावट आई। इससे यह संकेत मिलता है कि निवेश का माहौल अब ज्यादा सतर्क और चुनिंदा हो गया है, न कि तेजी से विस्तार वाला।
पहली तिमाही के बाद ट्रैक्सन ने कर्नाटक टेक इकोसिस्टम पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी की। इसमें बताया गया कि 2025 में पूंजी का प्रवाह, सेक्टर की प्राथमिकताएं और एग्जिट ट्रेंड कैसे बदले। रिपोर्ट के अनुसार, कुल फंडिंग भले ही कम हुई हो, लेकिन अलग-अलग स्टेज, सेक्टर और कंपनियों के स्तर पर बड़ा अंतर देखने को मिला।
पिछले वर्षों की तुलना करें तो 2025 की फंडिंग 2024 में जुटाए गए 5.4 अरब डॉलर और 2023 के 5.0 अरब डॉलर से कम रही। हालांकि यह गिरावट सभी स्टेज पर समान नहीं थी। सीड-स्टेज स्टार्टअप्स ने 2025 में 434 मिलियन डॉलर जुटाए, जो 2024 से 17 प्रतिशत कम और 2023 से थोड़ा कम रहा।
इसके उलट, शुरुआती चरण (अर्ली-स्टेज) की फंडिंग मजबूत रही। इस स्टेज की कंपनियों ने 1.6 अरब डॉलर जुटाए, जो 2024 से 32 प्रतिशत और 2023 से 37 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं, लेट-स्टेज फंडिंग में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली और यह घटकर 1.8 अरब डॉलर रह गई, जो 2024 के मुकाबले लगभग आधी है।
सेक्टर के हिसाब से देखें तो 2025 में कर्नाटक में एंटरप्राइज एप्लिकेशन, फिनटेक और रिटेल सेक्टर को सबसे ज्यादा निवेश मिला। एंटरप्राइज एप्लिकेशन सेक्टर ने 1.1 अरब डॉलर जुटाए, जो लगभग पिछले साल के बराबर है, लेकिन 2023 से थोड़ा कम है।
फिनटेक सेक्टर में अच्छी वापसी देखने को मिली। यहां फंडिंग साल-दर-साल 47 प्रतिशत बढ़कर 1.0 अरब डॉलर हो गई, जिससे डिजिटल फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेशकों की दोबारा रुचि दिखी। वहीं, रिटेल टेक सेक्टर की फंडिंग घटकर 920 मिलियन डॉलर रह गई, जो 2023 और 2024 के उच्च स्तर से काफी कम है।
साल 2025 में बड़े फंडिंग राउंड्स की संख्या भी कम हो गई। कर्नाटक में 100 मिलियन डॉलर से ज्यादा के सिर्फ तीन राउंड हुए, जबकि पिछले दो वर्षों में ऐसे नौ-नौ राउंड हुए थे। ज़ेप्टो ने सीरीज़ H में 300 मिलियन डॉलर जुटाए, ग्रो ने सीरीज़ F में 202 मिलियन डॉलर और जंबोटेल ने सीरीज़ D में 120 मिलियन डॉलर की फंडिंग हासिल की। ये डील्स फूड और एग्री टेक, फिनटेक और रिटेल जैसे सेक्टर्स में हुईं।
नई बड़ी कंपनियों के बनने की बात करें तो 2025 में कर्नाटक में तीन नए यूनिकॉर्न जुड़े। यह संख्या 2024 में पांच और 2023 में एक थी। शेयर बाजार में लिस्टिंग के मामले में, 2025 में कर्नाटक की टेक कंपनियों के नौ आईपीओ आए। यह 2024 के आठ आईपीओ से 13 प्रतिशत ज्यादा और 2023 के तीन आईपीओ से 200 प्रतिशत ज्यादा है। ग्रो, मीशो और एथर एनर्जी उन कंपनियों में शामिल रहीं जो इस साल शेयर बाजार में उतरीं।
मर्जर और अधिग्रहण (M&A) गतिविधियां भी सक्रिय रहीं। 2025 में कुल 46 डील्स पूरी हुईं। यह संख्या पिछले साल से थोड़ी कम लेकिन 2023 से ज्यादा रही। सबसे बड़ी डील ग्रो द्वारा फिसडम का 150 मिलियन डॉलर में अधिग्रहण रही, इसके बाद ICRA द्वारा फिनटेलिक्स का अधिग्रहण हुआ।
भौगोलिक रूप से, बेंगलुरु कर्नाटक के टेक इकोसिस्टम का केंद्र बना रहा और राज्य में जुटाई गई लगभग पूरी फंडिंग यहीं से आई। 2025 में सभी स्टेज पर निवेशकों की सक्रियता बनी रही। सीड स्टेज में एंटलर, रेनमैटर और इन्फ्लेक्शन पॉइंट वेंचर्स आगे रहे, अर्ली-स्टेज में पीक XV पार्टनर्स, एक्सेल और एलेवेशन कैपिटल सक्रिय रहे, जबकि लेट-स्टेज में सोफिना, सॉफ्टबैंक विज़न फंड और थिंक इन्वेस्टमेंट्स ने निवेश किया।