कंपनी का कहना है कि वह खुद को एक एआई-आधारित (AI-native) संगठन में बदल रही है। पिछले चार सालों में सीमित बाहरी फंडिंग और मुनाफे को लेकर उठ रहे सवालों के बीच यह कदम उठाया गया है।
हालांकि कंपनी ने कहा है कि करीब 12% कर्मचारी प्रभावित हुए हैं, लेकिन Moneycontrol की एक रिपोर्ट में यह संख्या 25% तक बताई गई है। इससे पहले भी Livspace ने मार्च 2023 में लगभग 2% कर्मचारियों की छंटनी की थी और मई 2020 में कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान करीब 450 कर्मचारियों को निकाला था।
कंपनी ने अपने बयान में कहा कि यह फैसला खर्च कम करने के लिए नहीं, बल्कि संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए लिया गया है। Livspace ने बताया कि उसने सेल्स, डिजाइन, ऑपरेशंस और मार्केटिंग जैसे प्रमुख विभागों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन को शामिल कर लिया है। कंपनी के अनुसार, अब कई काम एडवांस एआई सिस्टम द्वारा किए जा रहे हैं, जो पहले कर्मचारी मैन्युअली करते थे।
यह बदलाव पिछले छह महीनों में धीरे-धीरे लागू किया गया। इस दौरान एआई सिस्टम को अलग-अलग विभागों में टेस्ट और लागू किया गया, ताकि सेवाओं की गुणवत्ता बनी रहे, जबकि कुछ भूमिकाएं धीरे-धीरे खत्म की गईं। कंपनी में नेतृत्व स्तर पर भी बदलाव हुआ है। सह-संस्थापक सौरभ जैन 11 साल बाद कंपनी छोड़ रहे हैं और अब अपने व्यक्तिगत रुचियों पर ध्यान देंगे।
Livspace की स्थापना 2014 में हुई थी। कंपनी को KKR, Jungle Ventures और Venturi Partners जैसे निवेशकों से 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की फंडिंग मिल चुकी है। 2022 में KKR के नेतृत्व में 180 मिलियन डॉलर की फंडिंग के बाद यह कंपनी यूनिकॉर्न बनी थी।
मार्च 2025 में समाप्त वित्त वर्ष में कंपनी ने 1,460 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया और अपने घाटे में 42% की कमी की। Livspace भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य-पूर्व के बाजारों में काम करती है।