Lloyds Engineering ने स्टील इंफ्रा सॉल्यूशंस में नियंत्रक हिस्सेदारी खरीदी

Lloyds Engineering ने स्टील इंफ्रा सॉल्यूशंस में नियंत्रक हिस्सेदारी खरीदी

Lloyds Engineering ने स्टील इंफ्रा सॉल्यूशंस में नियंत्रक हिस्सेदारी खरीदी
इस सौदे से खरीद, परियोजना प्रबंधन, इंजीनियरिंग, विनिर्माण योजना और कॉर्पोरेट कार्यों में महत्वपूर्ण परिचालन लाभ मिलने की उम्मीद है


भारत की इंजीनियरिंग और EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन) कंपनियों में से एक Lloyds Engineering Works Limited (LEWL) ने घोषणा की है कि उसने Steel Infra Solutions Company Limited (SISCOL) में लगभग 1,220 करोड़ रुपये के इक्विटी मूल्यांकन पर नियंत्रक हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया है।

इस अधिग्रहण को नकद और इक्विटी के मिश्रित माध्यम से वित्तपोषित किया जा रहा है। इस सौदे के बाद LEWL, SISCOL की उत्पादन क्षमता को 1 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) से बढ़ाकर 2 लाख MTPA करने में मदद करेगी। इससे SISCOL भारत की सबसे बड़ी स्ट्रक्चरल स्टील फैब्रिकेशन कंपनी बन जाएगी और बड़े तथा जटिल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भाग लेने की उसकी क्षमता भी काफी बढ़ेगी।

कंपनी के अनुसार, इस लेनदेन से खरीद, परियोजना प्रबंधन, इंजीनियरिंग, विनिर्माण योजना और कॉर्पोरेट कार्यों में महत्वपूर्ण परिचालन तालमेल (सिनर्जी) पैदा होगा। अधिग्रहण के बाद भी SISCOL अपने मौजूदा ब्रांड और नेतृत्व के साथ काम करती रहेगी। Ravi Uppal कंपनी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक बने रहेंगे तथा वर्तमान वरिष्ठ प्रबंधन टीम उनका सहयोग करती रहेगी।

LEWL के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर श्रीकृष्ण गुप्ता ने कहा, “यह अधिग्रहण केवल क्षमता बढ़ाने का कदम नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए एक मजबूत मंच तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। SISCOL की इंजीनियरिंग प्रतिभा, स्ट्रक्चरल डिजाइन विशेषज्ञता और सफल परियोजना निष्पादन का अनुभव, लॉयड्स इंजीनियरिंग की EPC क्षमताओं और विनिर्माण विशेषज्ञता के साथ मिलकर भारत की अग्रणी एकीकृत इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों में से एक का निर्माण करेगा।”

SISCOL के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर रवि उप्पल (Ravi Uppal) ने कहा, “हम लॉयड्स समूह का हिस्सा बनने को लेकर बेहद उत्साहित हैं। दोनों कंपनियों की क्षमताएं एक-दूसरे की पूरक हैं और इनके बीच मजबूत व्यावसायिक तालमेल मौजूद है, जिससे नए कारोबारी अवसरों तक पहुंच मिलेगी। स्टील आधारित बुनियादी ढांचा और कोर इंडस्ट्री क्षेत्र अगले दो दशकों तक दोहरे अंकों की वृद्धि दर हासिल करने की स्थिति में हैं।”


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