भारत सरकार ने 25 सितंबर 2026 को 'मेक इन इंडिया' पहल के 12 साल पूरे होने का जश्न मनाया। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मैन्युफैक्चरिंग, निवेश और निर्यात में हुई बढ़ोतरी को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत में ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग, ज्यादा निवेश और भारत से ज्यादा निर्यात की दिशा में लगातार आगे बढ़ा जा रहा है।
31 मार्च 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, Production Linked Incentive (PLI) योजनाओं के तहत करीब 2.40 लाख करोड़ रुपये का वास्तविक निवेश हुआ है। इससे लगभग 23.8 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन और बिक्री हुई, जबकि करीब 15.2 लाख करोड़ रुपये का निर्यात दर्ज किया गया। इन योजनाओं से 14.6 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी पैदा हुए हैं। PLI योजनाएं इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल्स, सोलर PV मॉड्यूल्स, स्पेशियलिटी स्टील और टेक्सटाइल्स समेत 14 सेक्टर्स को कवर करती हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में पिछले 12 वर्षों के दौरान बड़ी ग्रोथ देखने को मिली है। इसका कुल उत्पादन वित्त वर्ष 2014-15 में करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में अनुमानित 13.11 लाख करोड़ रुपये हो गया। अकेले मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग का उत्पादन इसी अवधि में करीब 18,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 6.27 लाख करोड़ रुपये हो गया।
भारत में निवेश और मैन्युफैक्चरिंग को मिला बढ़ावा
कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल ने कहा कि भारत में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अब तक का सबसे ज्यादा 94.53 बिलियन डॉलर का वार्षिक FDI इनफ्लो दर्ज किया गया। वहीं, वित्त वर्ष 2014-15 से वित्त वर्ष 2025-26 के बीच कुल FDI इनफ्लो 843 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। Make in India के तहत अब Make in India 2.0 के जरिए 27 सेक्टर्स को कवर किया जा रहा है, जिनमें 15 मैन्युफैक्चरिंग और 12 सर्विसेज सेक्टर्स शामिल हैं।
पीयूष गोयल ने कहा कि इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि वह कॉन्फिडेंस है जो इस पहल ने पैदा किया है। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप फाउंडर्स, एंटरप्रेन्योर्स, मैन्युफैक्चरर्स, इनोवेटर्स और एक्सपोर्टर्स के साथ देश के लोगों के बीच यह भरोसा बढ़ा है कि भारत मैन्युफैक्चर कर सकता है, इनोवेट कर सकता है और दुनिया के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकता है।