वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने ओडिशा में करीब 1 लाख करोड़ के निवेश की घोषणा की है। यह निवेश एल्युमिनियम, माइनिंग, रिफाइनिंग और डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े प्रोजेक्ट्स में किया जाएगा। यह घोषणा 26 सितंबर को ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से मुलाकात के बाद की गई।
अनिल अग्रवाल के अनुसार, कंपनी अगले ढाई से तीन वर्षों में इन प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने की योजना बना रही है। हालांकि, प्रोजेक्ट्स की रफ्तार जमीन आवंटन और जरूरी सरकारी एवं नियामकीय मंजूरियों पर निर्भर करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के सहयोग से निवेश से जुड़े काम को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है।
वेदांता ओडिशा के रायगढ़ में एक नई रिफाइनरी के साथ एल्युमिनियम स्मेल्टर स्थापित करने की योजना पर भी काम कर रहा है। इसके अलावा, कंपनी राज्य में बॉक्साइट माइनिंग और एल्युमिनियम उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों का विस्तार करना चाहती है।
इस औद्योगिक निवेश के साथ कंपनी सामाजिक बुनियादी ढांचे को भी बढ़ाने का प्रस्ताव रख रही है। इसमें आदिवासी समुदायों के लिए अस्पताल, एक डिजिटल यूनिवर्सिटी और रिसर्च पर केंद्रित मेडिकल संस्थान स्थापित करने की योजनाएं शामिल हैं।
यह निवेश योजना ओडिशा में वेदांता की मौजूदा मौजूदगी को और बढ़ाएगी। मार्च 2025 में ओडिशा की हाई-लेवल क्लियरेंस अथॉरिटी ने रायगढ़ा जिले में वेदांता के दो बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी थी। इनमें 50,537 करोड़ की लागत वाली 60 लाख टन प्रति वर्ष क्षमता की एल्युमिना रिफाइनरी और ₹40,991 करोड़ का 12 लाख टन प्रति वर्ष क्षमता वाला ग्रीनफील्ड एल्युमिनियम स्मेल्टर शामिल है।
वेदांता की योजना में नीयामगिरी पहाड़ियों में बॉक्साइट माइनिंग को फिर से शुरू करने का मुद्दा भी शामिल है। यह प्रोजेक्ट एक दशक से ज्यादा समय से बंद है। पहले डोंगरिया कोंध आदिवासी समुदाय ने नीयामगिरी क्षेत्र में माइनिंग का विरोध किया था और ग्राम सभाओं के जरिए इसके खिलाफ प्रस्ताव पारित किए थे।
अनिल अग्रवाल की नई घोषणा के बाद भी क्षेत्र के आदिवासी समुदायों ने नीयामगिरी में माइनिंग के किसी भी प्रयास का विरोध जारी रखने की बात कही है। समुदाय इस क्षेत्र को पवित्र मानता है। इसके अलावा, रायगढ़ा-कलाहांडी क्षेत्र में वेदांता के सिजिमाली बॉक्साइट प्रोजेक्ट को लेकर भी विरोध सामने आया है।
वर्तमान में नीयामगिरी पहाड़ियों के पास लांजीगढ़ स्थित वेदांता की एल्युमिना रिफाइनरी को बड़े स्तर पर आयातित बॉक्साइट पर निर्भर रहना पड़ता है। कंपनी ने ओडिशा में सिजिमाली और कार्लापाट बॉक्साइट डिपॉजिट से जुड़े माइनिंग हित भी हासिल किए हैं।