केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री जीतन राम मांझी ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत देशभर में 11,333 नए सूक्ष्म उद्यमों को सहायता देने के लिए ₹1,000 करोड़ की मार्जिन मनी सब्सिडी जारी की है। इस सहायता से लगभग ₹3,260 करोड़ का बैंक ऋण उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी और 1.02 लाख से अधिक स्थायी रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है। इस पहल का उद्देश्य स्वरोजगार को बढ़ावा देना और ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता के अवसरों का विस्तार करना है।
PMEGP के जरिए सूक्ष्म उद्यमों को वित्तीय सहायता
यह सब्सिडी नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-3 में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान जारी की गई। इस अवसर पर MSME राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे, मंत्रालय के सचिव भरत खेड़ा और मंत्रालय व संबंधित संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
PMEGP केंद्र सरकार की प्रमुख ऋण-संबद्ध सब्सिडी योजनाओं में शामिल है। इसका उद्देश्य गैर-कृषि क्षेत्र में नए सूक्ष्म उद्यम स्थापित करके स्थायी स्वरोजगार के अवसर पैदा करना है। MSME मंत्रालय द्वारा संचालित इस योजना का राष्ट्रीय स्तर पर कार्यान्वयन खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) करता है। इसके अतिरिक्त, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड, जिला उद्योग केंद्र और कॉयर बोर्ड जैसी एजेंसियां भी योजना के क्रियान्वयन में सहयोग करती हैं।
75 लाख रोजगार के अवसर सृजित
वित्त वर्ष 2014-15 से अब तक PMEGP के तहत ₹70,000 करोड़ से अधिक के बैंक-स्वीकृत ऋण और ₹25,193 करोड़ से अधिक की मार्जिन मनी सब्सिडी के माध्यम से 8.38 लाख से अधिक सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना में सहायता दी गई है। इसके परिणामस्वरूप देशभर में लगभग 75 लाख स्थायी रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।
योजना के तहत सहायता प्राप्त लगभग 80 प्रतिशत इकाइयां ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित हुई हैं। वहीं, करीब 50 प्रतिशत लाभार्थी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से हैं, जबकि लगभग 40 प्रतिशत उद्यमों का स्वामित्व महिला उद्यमियों के पास है। ये आंकड़े ग्रामीण उद्यमिता, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समावेशन में योजना की भूमिका को दर्शाते हैं।
वित्त वर्ष 2026-27 में भी जारी है योजना का विस्तार
अक्टूबर 2026 तक वित्त वर्ष 2026-27 में PMEGP के तहत 25,895 सूक्ष्म उद्यमों को ₹794.52 करोड़ की मार्जिन मनी सब्सिडी दी जा चुकी थी। अब जारी की गई अतिरिक्त ₹1,000 करोड़ की राशि से नए उद्यमों की स्थापना और रोजगार सृजन को और गति मिलने की उम्मीद है।
मंत्रालय के अनुसार, इस चरण में महिला उद्यमियों, सामाजिक रूप से वंचित समुदायों और ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पूर्वोत्तर क्षेत्र और आकांक्षी जिलों में भी उद्यमिता को प्रोत्साहित करने पर जोर रहेगा।
इस पहल के माध्यम से सरकार का लक्ष्य स्थानीय विनिर्माण और सेवा क्षेत्र को मजबूत करना, स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना और समावेशी आर्थिक विकास को गति देना है। PMEGP के जरिए सूक्ष्म उद्यमों को वित्तीय सहायता देकर आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था और विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।