इस डील में टीम की वैल्यूएशन लगभग 1.65 बिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 15,660 करोड़ रुपये) आंकी गई है। यह सौदा इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के बदलते मालिकाना ढांचे में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस अधिग्रहण का नेतृत्व उद्योगपति लक्ष्मी एन. मित्तल और आदित्य मित्तल कर रहे हैं। उनके साथ Serum Institute of India के सीईओ आदर पूनावाला भी साझेदार के रूप में शामिल हैं। यह समूह राजस्थान रॉयल्स को मौजूदा मालिक मनोज बादले और अन्य निवेशकों से खरीदेगा।
इस डील में केवल IPL टीम ही नहीं, बल्कि राजस्थान रॉयल्स का पूरा ग्लोबल पोर्टफोलियो शामिल है। इसमें दक्षिण अफ्रीका की Paarl Royals और कैरेबियन लीग की Barbados Royals टीम भी शामिल हैं। इससे साफ है कि नया समूह केवल भारतीय क्रिकेट ही नहीं, बल्कि वैश्विक क्रिकेट लीग्स में भी अपनी मजबूत मौजूदगी बनाना चाहता है।
इस घोषणा के साथ उन अटकलों पर भी विराम लग गया है, जिनमें अमेरिकी कारोबारी कैल सोमानी के नेतृत्व वाले अमेरिकी समूह द्वारा टीम खरीदने की चर्चा हो रही थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह समूह भी लगभग इसी वैल्यूएशन पर डील की संभावनाएं तलाश रहा था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सौदा 2026 की तीसरी तिमाही तक पूरा हो सकता है। डील पूरी होने के बाद मित्तल परिवार के पास फ्रेंचाइजी की 75 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी, जबकि आदर पूनावाला लगभग 18 प्रतिशत हिस्सेदारी रखेंगे। बाकी 7 प्रतिशत हिस्सेदारी मौजूदा निवेशकों, जिनमें मनोज बादले भी शामिल हैं, के पास बनी रहेगी।
हालांकि, इस अधिग्रहण को पूरा करने से पहले कई नियामक मंजूरियां जरूरी होंगी। इसमें भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI), भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) और IPL गवर्निंग काउंसिल की स्वीकृति शामिल है। मनोज बादले, जो 2008 में IPL की शुरुआत से ही राजस्थान रॉयल्स से जुड़े हुए हैं, टीम के बोर्ड सदस्य के रूप में जुड़े रहेंगे। फ्रेंचाइजी के अनुसार, उनका अनुभव इस बदलाव के दौरान टीम को स्थिरता और निरंतरता देने में मदद करेगा।
मैदान पर भी राजस्थान रॉयल्स का प्रदर्शन इस समय मजबूत बना हुआ है। IPL 2026 सीजन में टीम प्लेऑफ की दौड़ में बनी हुई है। फिलहाल राजस्थान रॉयल्स 10 टीमों की अंक तालिका में 12 अंकों के साथ चौथे स्थान पर है और टेबल टॉपर पंजाब किंग्स से सिर्फ एक अंक पीछे है।
यह डील IPL के बढ़ते बिजनेस और निवेश आकर्षण को भी दर्शाती है। पिछले कुछ वर्षों में IPL फ्रेंचाइजियों की वैल्यू तेजी से बढ़ी है और अब बड़े भारतीय और वैश्विक निवेशक क्रिकेट टीमों में निवेश को एक मजबूत बिजनेस अवसर के रूप में देख रहे हैं।