इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के अपने मिशन की जानकारी देते हुए बताया है कि अब तक 373 स्टार्टअप्स को SAMRIDH (स्टार्टअप एक्सेलेरेटर ऑफ MeitY फॉर प्रोडक्ट इनोवेशन, डेवलपमेंट एंड ग्रोथ) कार्यक्रम के तहत अहम सहायता मिल चुकी है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को तेज़ी से आगे बढ़ाने के अपने लक्ष्य को दोहराते हुए कहा कि SAMRIDH योजना के ज़रिए अब तक 373 स्टार्टअप्स को सपोर्ट दिया गया है।
जानें SAMRIDH योजना किन क्षेत्रों को मिलेगा फायदा
मंत्रालय ने बताया कि इस कार्यक्रम के माध्यम से वह हेल्थ-टेक, एजु-टेक, एग्री-टेक, कंज़्यूमर-टेक, फिनटेक, सॉफ्टवेयर ऐज़ ए सर्विस (SaaS) और सस्टेनेबिलिटी जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे लगभग 300 स्टार्टअप्स को मौजूदा और नए एक्सेलेरेटर्स के ज़रिए तेज़ी से आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।
इन उच्च-प्रभाव वाले सेक्टर्स पर फोकस करके यह पहल सुनिश्चित करती है कि देश में विकसित टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए सही मार्गदर्शन और पूंजी मिल सके।
यह कार्यक्रम एक प्रतिस्पर्धी चयन प्रक्रिया के तहत संचालित किया जाता है, जिसमें देशभर से बेहतरीन बिज़नेस मेंटर्स और एक्सेलेरेटर्स को चुना जाता है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 186 एक्सेलेरेटर्स ने इसमें रुचि दिखाई, जिनमें से 16 राज्यों के 43 टॉप एक्सेलेरेटर्स का चयन किया गया।
चुने गए ये एक्सेलेरेटर्स स्टार्टअप्स की ग्रोथ के मुख्य इंजन के रूप में काम करते हैं। उन्हें प्रभावी रूप से स्टार्टअप्स का मार्गदर्शन करने के लिए सरकार की ओर से लक्षित वित्तीय प्रोत्साहन भी दिया जाता है।
आधिकारिक बयान में कहा गया है कि SAMRIDH योजना के तहत चुने गए एक्सेलेरेटर्स को प्रति स्टार्टअप 2 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है, जिससे इन नए स्टार्टअप्स को आगे बढ़ाने से जुड़े ऑपरेशनल खर्चों को पूरा किया जा सके।
जाने मैचिंग फंडिंग के बारे में
फंडिंग इस पहल का एक अहम हिस्सा है, खासकर इसके “मैचिंग फंडिंग” मॉडल के ज़रिए, जो प्राइवेट निवेश को प्रोत्साहित करता है। इस योजना के तहत एक्सेलेरेट किए गए 241 स्टार्टअप्स को अतिरिक्त निवेश मिला है, जिससे अब तक कुल 93.75 करोड़ रुपये की फंडिंग वितरित की जा चुकी है।
मंत्रालय ने बताया कि यह योजना स्टार्टअप्स को अधिकतम 40 लाख रुपये तक की मैचिंग फंडिंग प्रदान करती है, जो कार्यक्रम के दिशा-निर्देशों के अनुसार होती है। यह तरीका न केवल आर्थिक सुरक्षा देता है, बल्कि अन्य निवेशकों के सामने स्टार्टअप्स के बिज़नेस मॉडल को भी भरोसेमंद बनाता है।
मंत्रालय ने यह भी बताया कि MSH (MeitY Startup Hub) चयनित एक्सेलेरेटर्स के प्रदर्शन की निगरानी और मूल्यांकन करता है, जो एक्सेलेरेशन प्रोग्राम के गुणात्मक और मात्रात्मक मानकों पर आधारित होता है।
भौगोलिक रूप से इस योजना का प्रभाव व्यापक रहा है। कुछ राज्य प्रमुख स्टार्टअप हब के रूप में उभरे हैं। कर्नाटक इस सूची में सबसे आगे है, जहां 69 स्टार्टअप्स को सपोर्ट मिला और 15 करोड़ रुपये से अधिक की फंडिंग जारी की गई। इसके बाद दिल्ली और तमिलनाडु का स्थान आता है।
जहां एक ओर पारंपरिक टेक हब आगे हैं, वहीं यह कार्यक्रम अब 16 राज्यों तक फैल चुका है, जो यह दिखाता है कि देशभर में इनोवेशन तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।