सरकार के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य स्टार्टअप्स के लिए लंबे समय का घरेलू निवेश बढ़ाना और भारत के वेंचर कैपिटल इकोसिस्टम को मजबूत करना है। यह योजना Startup India पहल के तहत शुरू की गई है। इससे पहले 2016 में Fund of Funds for Startups (FFS 1.0) शुरू किया गया था। उसका मकसद स्टार्टअप्स को फंड की कमी से बचाना और देश में वेंचर कैपिटल मार्केट को बढ़ावा देना था।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में पहले 500 से भी कम स्टार्टअप्स थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 2 लाख से ज्यादा हो गई है, जिन्हें DPIIT द्वारा मान्यता मिली है। साल 2025 में सबसे ज्यादा स्टार्टअप रजिस्ट्रेशन दर्ज किए गए।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह नया फंड डीप टेक, बड़े निवेश वाले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और शुरुआती दौर के स्टार्टअप्स को मदद देगा। इससे निजी निवेश भी बढ़ेगा, ज्यादा रोजगार पैदा होंगे और भारत को एक वैश्विक इनोवेशन हब बनाने में मदद मिलेगी।
सरकार की जानकारी के मुताबिक, FFS 1.0 के तहत ₹10,000 करोड़ का पूरा फंड 145 Alternative Investment Funds (AIFs) को दिया गया था। इन AIFs ने मिलकर ₹25,500 करोड़ से ज्यादा का निवेश 1,370 से अधिक स्टार्टअप्स में किया।