केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को बायोटेक्नोलॉजी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए BIRAC-RDI फंड के लिए पहली राष्ट्रीय घोषणा की। यह फंड भारत सरकार की 1 लाख करोड़ रुपये की अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) पहल का हिस्सा है। इस पहल का उद्देश्य है उच्च प्रभाव वाले बायोटेक्नोलॉजी नवाचारों को बढ़ावा देना और प्रयोगशाला अनुसंधान और उद्योग के बीच की खाई को पाटना।
मंत्री ने कहा कि यह कदम भारत के विज्ञान आधारित विकास दृष्टिकोण में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है। अब देश उभरती प्रौद्योगिकियों में पीछे नहीं रहेगा, बल्कि शुरुआत के चरण से ही आगे बढ़ेगा।
इस घोषणा के कार्यक्रम में नीति आयोग के सदस्य विनोद पॉल, बायोटेक्नोलॉजी विभाग के सचिव राजेश एस. गोखले, BIRAC के मैनेजिंग डायरेक्टर जितेंद्र कुमार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन के अधिकारी, उद्योग जगत के नेता, वेंचर कैपिटल के प्रतिनिधि और वैज्ञानिक समुदाय के सदस्य उपस्थित थे।
सिंह ने बताया कि भारत का जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र पिछले 10 सालों में नीतिगत संकोच से तेजी की ओर बढ़ा है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 2014 में भारत में बायोटेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स की संख्या लगभग 50 थी, जो अब बढ़कर 11,000 से अधिक हो गई है। जैव अर्थव्यवस्था का मूल्य 2014 में लगभग 8 अरब डॉलर था, जो अब तेजी से बढ़ रही है और भारत को वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाती है। आगे कहा कि जैसे सूचना प्रौद्योगिकी ने देश के विकास को आगे बढ़ाया, वैसे ही बायोटेक्नोलॉजी भी औद्योगिक विकास के अगले चरण को गति देगी। वर्तमान पहल का उद्देश्य सिर्फ नए विचार उत्पन्न करना नहीं है, बल्कि उन्हें औद्योगिक रूप देने की क्षमता को भी बढ़ाना है।
सिंह ने यह भी बताया कि भारत पहले ही अंतरिक्ष जैव प्रौद्योगिकी जैसे उभरते क्षेत्रों में सक्रिय है। पादप विज्ञान और जीव विज्ञान अनुसंधान के लिए भारत में बने किट का उपयोग करके अंतरिक्ष में बायोटेक्नोलॉजी प्रयोग किए जा रहे हैं। इसका मतलब है कि भारत वैश्विक महत्व के ज्ञान और अनुप्रयोगों में योगदान देने के लिए तैयार है।
BIRAC-RDI फंड से बायोटेक स्टार्टअप्स और नवाचार को मिलेगा बढ़ावा
बायोटेक्नोलॉजी विभाग के सचिव राजेश एस. गोखले ने कहा कि RDI फंड लंबे समय तक चलने वाले, उच्च जोखिम वाले और धैर्यपूर्ण पूंजी वाले शोध कार्यों का समर्थन करेगा। यह फंड बायो-औषधीय उत्पादों, जैव-औद्योगिक विनिर्माण, जैव-ऊर्जा, नीली अर्थव्यवस्था और जैव-कंप्यूटेशन जैसे क्षेत्रों में अगली पीढ़ी के उत्पादों के विकास में मदद करेगा।
BIRAC के मैनेजिंग डायरेक्टर जितेंद्र कुमार ने बताया कि फंड के तहत BIRAC अगले 5 वर्षों में 2,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगा। BIRAC ने पहले ही 100 से अधिक बायो-इनक्यूबेशन केंद्र, 10 लाख वर्ग फुट से अधिक इनक्यूबेशन स्पेस और 15 लाख से अधिक स्टार्टअप उद्यमियों के साथ एक राष्ट्रीय नवाचार नेटवर्क तैयार किया है। उन्होंने आगे कहा कि भारत की जैव अर्थव्यवस्था 2012 में 28 अरब डॉलर थी, जो 2024 में बढ़कर 165.7 अरब डॉलर हो गई है। इसका लक्ष्य है कि 2030 तक इसे 300 अरब डॉलर और 2047 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाया जाए।
BIRAC-RDI फंड से TRL-4 से TRL-9 तक की तकनीकों को मिलेगा समर्थन
BIRAC-RDI फंड राष्ट्रीय RDI पहल का हिस्सा है, जिसे जुलाई 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी और नवंबर 2025 में राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन के तहत शुरू किया गया। यह फंड TRL-4 से TRL-9 तक की प्रौद्योगिकियों को इक्विटी, परिवर्तनीय उपकरण और दीर्घकालिक ऋण के माध्यम से समर्थन देगा।
राष्ट्रीय स्तर पर आवेदन आमंत्रित किए जा चुके हैं। योग्य स्टार्टअप, लघु और मध्यम उद्यम और उद्योग साझेदार आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से अपने प्रस्ताव जमा कर सकते हैं। पहले चरण के लिए आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 31 मार्च, 2026 है। वहीं सिंह ने कहा कि इस घोषणा से भारत बायोटेक्नोलॉजी में नेतृत्व करने के अपने इरादे को मजबूत करता है। इसके तहत वैज्ञानिक क्षमता, उद्यमशीलता और नीतिगत समर्थन मिलकर औद्योगिक परिवर्तन के अगले चरण को आकार देंगे।