केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) में ₹5,000 करोड़ की इक्विटी पूंजी डालने को मंज़ूरी दे दी है। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया, जिसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को अधिक कर्ज़ उपलब्ध कराना और SIDBI की पूंजी स्थिति को मजबूत करना है।
यह पूंजी सहायता वित्तीय सेवा विभाग के माध्यम से तीन चरणों में दी जाएगी। वित्त वर्ष 2025-26 में 3,000 करोड़ की पहली किस्त दी जाएगी, जबकि शेष ₹2,000 करोड़ की राशि वित्त वर्ष 2026-27 और 2027-28 में ₹1,000 करोड़ की दो बराबर किस्तों में दी जाएगी।
इस इक्विटी निवेश के बाद, SIDBI से वित्तीय सहायता पाने वाले MSMEs की संख्या 76.26 लाख से बढ़कर लगभग 1.02 करोड़ होने का अनुमान है। इससे करीब 25.74 लाख नए MSMEs को लाभ मिलेगा और लगभग 1.12 करोड़ नए रोजगार सृजित होने की संभावना है।
अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल और बिना गारंटी वाले कर्ज़, निर्देशित ऋण और स्टार्टअप्स के लिए वेंचर डेब्ट जैसे क्षेत्रों में बढ़ते निवेश के कारण SIDBI के लिए मजबूत पूंजी आधार आवश्यक है। यह सहायता बैंक की कैपिटल पर्याप्तता, क्रेडिट रेटिंग और कम लागत पर दीर्घकालिक फंडिंग बनाए रखने में मदद करेगी।
1990 में स्थापित SIDBI, भारत में MSME वित्तपोषण व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यह पारंपरिक छोटे उद्योगों से लेकर तकनीक आधारित स्टार्टअप्स तक को प्रत्यक्ष और पुनर्वित्त सहायता देता है। ऐसे में यह नई इक्विटी सहायता MSME क्षेत्र के लिए एक अहम कदम मानी जा रही है।